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मानसिक रोग दूर करे केसर

केसर को कुंकुम एवं जाफरान भी कहा जाता है। इसकी खेती कश्मीर मे व्यापक रूप से होती है। केसर का उपयोग मिष्ठान एवं आयुर्वेदिक औषधि निर्माण के अलावा देवपूजा में भी किया जाता है। केसर के पुष्प से सूत्राकार स्त्री केसर का संग्रह करके इसे सुखा लिया जाता है। इसका वर्ण गहरे लाल रंग का होता है।

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नींद और हमारी सेहत

हमारे जीवन में जितना जरूरी काम है उतनी ही जरूरी है नींद, परंतु आज हम अपनी व्यस्तताओं में खो कर नींद को नजर-अंदाज करते जा रहे हैं। क्या हो सकता है इसका परिणाम तथा अच्छी नींद कैसे पाएं? जानें इस लेख से।

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योग से रहें निरोग

जब तक भारत में योग के द्धारा वास्तविक शक्ति की उपासना होती रही तब तक इस देश के बच्चे शक्तिशाली होते रहे। आज इस योग शक्ति के बिना देश मृतप्राय हो रहा है। देश के कलानिधि, मायानिधि इससे रूठे हुए हैं। योग सर्व विद्याओं, सब देवों के देवत्व परमतत्त्व का कारण होने से हमारी सारी उपासनायें योग द्धारा सर्वशक्तिसंपन्न कराया करती थी।

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इम्युनिटी मजबूत तो बच्चा तंदुरूस्त

बच्चों की इम्युनिटी मजबूत करना आज के समय में बहुत जरूरी है। बच्चों की इम्युनिटी के लिए फायदेमंद खाने से जुड़ी बातें बता रही हैं छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी, कानपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर और पोषण विशेषज्ञ डॉ. भारती दीक्षित-

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स्वभाव, स्वास्थ्य एवं भाग्य को दर्शाते हैं नाखून

नाखून मात्र हमारी उंगलियों का सौंदर्य ही नहीं बढ़ाते। बल्कि हमारे भविष्य की ओर भी इशारा करते हैं फिर वह हमारा भाग्य हो या स्वास्थ्य। नाखून हमारे स्वभाव एवं छिपे व्यक्तित्व को भी उजागर करते हैं। हमें इनको पढ़ने की भाषा आनी चाहिए।

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वास्तु अनुरूप गणेश जी का स्वरूप

वास्तु एवं फेंग-शुई की बढ़ती लोकप्रियता ने देवी-देवताओं की मूर्तियों एवं चित्रों को पूजा घर के साथ-साथ ड्रॉइंग रूम, गेस्ट रूम और प्रवेश द्वार का भी हिस्सा बना दिया है। विशेषकर गणेश जी की प्रतिमा को लोग शुभ एवं सुख-सौभाग्य के साथ जोड़कर देखने लगे हैं। वास्तु अनुसार भगवान गणेश की प्रतिमा किस प्रकार आपके जीवन में सुख-समृद्घि ला सकती है, जानें इस लेख से।

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ज्योतिष से पाएं पिछले और अगले जन्म का ज्ञान

पुनर्जन्म के बारे में भारतीय ज्योतिष ग्रंथ हमारा समुचित मार्गदर्शन करते हैं। हमारे ऋषियों और आचार्यों ने अपनी गहन साधना से प्राप्त दिव्य दृष्टि और ज्ञान द्वारा जन्मकुंडली में ग्रह स्थिति के आधार पर पिछले और अगले जन्म की स्थिति का आकलन सुलभ कर दिया है।

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संतान नाशक योग के निवारण

ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार पंचम् भाव संतान सुख का प्रतिनिधित्व करता है। कारक ग्रहों में बृहस्पति को संतान का कारक ग्रह माना जाता है। संतान सुख हेतु पंचमेश एवं बृहस्पति का बलवान होना एवं पंचम् भाव पर और कारक पर शुभ ग्रहों का प्रभाव संतान सुख देता है।

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मन हैं अनेक – आचार्य महाप्रज्ञ

मन तो एक ही है। हमारे चित्त अनेक होते हैं। हमारे चित्त की वृत्तियां अनेक होती हैं। चित्त में नाना प्रकार की वृत्तियां जागती हैं, नाना प्रकार के चित्त जागते हैं और अनेक बन जाते हैं अनके चित्तों के कारण मन भी अनेक जैसा प्रतिभासित होने लग जाता है।

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दिव्य जीवन, चिरस्थायी अनुभव है – स्वामी चिन्मयानंद

दिव्य जीवन स्वयं ही एक चिरस्थायी अनुभव है जिसमें जीवन को सदा सुख मिलता है और वह सच्चिदानन्द की परम सत्ता में विलीन होने के लिए आगे बढ़ता है। यही परम सत्ता है और जीवन का परम लक्ष्य है।

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