हमारे शरीर के लिए जितना आवश्यक भोजन है उतनी ही आवश्यक नींद भी है क्योंकि, नींद न केवल हमारे शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत आवश्यक है, क्योंकि वर्तमान समय में हम भूलना, चिड़चिड़ापन, तनाव, अवसाद तथा एकाग्रता में कमी जैसी समस्याओं का सामना अक्सर करते हैं, परंतु इस बात से अनजान रहते हैं कि इन सभी समस्याओं का कारण हमारी अधूरी नींद भी हो सकती है। अच्छी नींद जहां एक तरफ याददाश्त तथा एकाग्रता के लिए उपयोगी होती है वहीं दूसरी तरफ यह हमें दीर्घायु भी बनाती है। प्राचीन काल में लोगों की लंबी आयु का एक कारण यह भी था कि वो कार्य तथा भोजन के साथ-साथ नींद को भी अपने जीवन में पूरा महत्त्व देते थे, परंतु वर्तमान समय में नींद हमारे जीवन में उपेक्षित हो गई है, जबकि वैज्ञानिकों का मानना है कि आठ घंटे की नींद प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है।

क्यों जरूरी है नींद

हमारा शरीर निरोगी हो इसके लिए बहुत आवश्यक है कि हम पौष्टिïक भोजन के साथ-साथ अपनी नींद अवश्य पूरी करें। विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी नींद न सिर्फ हमारे अच्छे स्वास्थ्य का आधार है बल्कि इससे हमारे दिमाग को भी पोषण मिलता है परंतु नींद पूरी न होने की वजह से हमारा शरीर पूरी तरह रिलैक्स नहीं हो पाता है और यदि हम नींद पूरी किए बिना ही लगातार काम करते हैं तो हमारे शरीर को अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है एवं हमारा रक्त मांसपेशियों की ओर बहने लगता है इस कारण मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी होती है और इस वजह से वहां स्थित तंत्रिकाओं की में तनाव उत्पन्न हो जाता है जो कई शारीरिक तथा मानसिक रोगों की वजह बनता है।

अगर हम पूरी तथा अच्छी नींद लेते हैं तो वह हमारे संपूर्ण शरीर के लिए ईंधन के समान कार्य करती है। इस संदर्भ में विशेषज्ञों का कहना है कि हमारी नींद कई टुकड़ों में बटी होती है, सर्वप्रथम हमारी भुजाओं, पैरों एवं गर्दन की बड़ी मांसपेशियां सोती हैं तथा अंत में होंठों एवं पलकों की छोटी मांसपेशियां। इसी प्रकार हमारे चेतना केंद्र भी एक-एक कर के सोते हैं, सबसे पहले सूंघने की शक्ति उसके बाद देखने एवं सुनने की शक्ति अवचेतना के आगोश में समा जाती है, परंतु इस अवस्था में भी हमारे महत्त्वपूर्ण अंग जैसे- हृदय, मस्तिष्क एवं नाड़ी क्रियाशील रहते हैं। किंतु इनकी क्रियाशीलता थोड़ी मंद पड़ जाती है इससे हमारे संपूर्ण शरीर की मांसपेशियों को आराम मिल जाता है तथा हम जगते हैं तो ऊर्जा से परिपूर्ण होते हैं।

इसके विपरीत यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक जगता है तो थकान के कारण चिड़चिड़ा होने लगता है एवं उसका शरीर तथा मस्तिष्क सुचारू रूप से कार्य नहीं कर पाता है।

नींद विज्ञान के जनक ‘विलियमडिमेंट’ ने अपने एक अघ्ययन के बाद बताया कि पूरी नींद लेने वाले व्यक्ति ऊर्जावान, आत्मविश्वासी, दक्ष एवं कुशल होते हैं।

नींद की उपयोगिता से जीव-जंतु भी भली-भांति परिचित हैं तभी चमगादड़ जैसे निशाचर दिन को सोते हैं, डॉलफिन मछली तैरते हुए ही अपनी नींद पूरी कर लेती है तो वहीं हिरन खड़े रह कर ही सो लेते हैं, परंतु इसके विपरीत साधनों से सम्पन्न हम मनुष्य अपनी नींद के जैविक चक्र को भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में शहरी आबादी के 64 प्रतिशत लोग सुबह सात बजे से पहले उठ जाते हैं जो विश्व में सर्वाधिक है, इसके साथ ही 61 फीसदी नगरीय क्षेत्र के लोग प्रतिदिन 7 घंटे से भी कम सोते हैं। इसके अतिरिक्त हमारे देश में अब केवल 4 फीसदी लोगों के सोने का समय परंपरागत तरीके अर्थात्ï सूरज की रोशनी से तय होता है, जबकि 29 प्रतिशत ने माना कि वो आधी रात के बाद नींद की शरण में जाते हैं और 45 प्रतिशत लोगों का कहना था कि वो अपने काम के अनुसार ही नींद का समय तय करते हैं। इन आंकड़ों को देखते हुए हम आसानी से समझ सकते हैं कि क्यों हर दूसरा व्यक्ति वर्तमान समय में अनेक शारीरिक रोगों के साथ-साथ तनाव, अवसाद, एकाग्रता में कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है।

किस उम्र में कितना सोएं?

प्रत्येक व्यक्ति की उम्र के अनुसार उसके लिए नींद की आवश्यकता भी भिन्न-भिन्न होती है। बच्चों को व्यस्कों की तुलना में अधिक नींद की आवश्यकता होती है, क्योंकि बच्चों की अधिकांश ऊर्जा खेलने में जाती है तथा उनको विकास के लिए भी अधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है।

यदि किसी बच्चे की आयु एक वर्ष है तो उसके लिए बारह घंटे की नींद आवश्यक है तथा किशोरवस्था के लिए दस घंटे की नींद आवश्यक है परंतु एक व्यस्क के लिए छह-आठ घंटे तथा बुजुर्ग के लिए पांच-छह घंटे की नींद प्रर्याप्त होती है।

नींद से लाभ

1. तनाव में राहत- हाल ही में हुए एक शोध से यह पता चला है कि तनाव से मुक्ति के लिए अच्छी नींद रामबाण सिद्ध होती है। जब हम सोते हैं तो अवचेतन अवस्था में रहते हैं जिस कारण हमारे मस्तिष्क की मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं जिससे तनाव कम होता है। इतना ही नहीं यदि हम पूरी नींद लेते हैं तो ‘अवसाद’ (तनाव का जटिल स्वरूप) से भी बच सकते हैं।

2. एकाग्रता में वृद्धि- हम कितनी नींद लेते हैं इसका हमारी एकाग्रता पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। प्राय: यह देखा गया है कि जिन व्यक्तियों में अनिद्रा की समस्या पाई जाती है, उनमें एकाग्र क्षमता कम होती है। इसके विपरीत जो लोग नींद पर्याप्त मात्रा में लेते हैं उनकी एकाग्रता अच्छी होती है। इसलिए डॉक्टर्स का ये मानना होता है कि पूरी नींद लेने से एकाग्रक्षमता में तो सुधार होता ही है साथ ही साथ हमारा दिमाग भी तेज होता है।

3. रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि- हाल ही में अमेरिका में हुए एक शोध के अनुसार हमारी सोने की आदतों का हमारी सेहत पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। किशोरों पर किए गए इस शोध में यह पाया गया कि उनमें गैस्ट्रोइंटेस्टाइन, जुखाम तथा फ्लू जैसी स्वास्थ्य समस्याएं आज नींद पूरी न होने की वजह से आम हो गई हैं।

डॉक्टर्स का ये मानना है कि अगर हम प्रर्याप्त नींद लेते हैं तो हमारे पूरे शरीर की मांसपेशियों को आराम तो मिलता है जिससे हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है तथा इसके परिणाम स्वरूप हमारा शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ रहता है, इसलिए डॉक्टर्स प्रत्येक बीमार व्यक्ति को दवाई लेने के साथ-साथ अच्छी तरह सोने की सलाह भी देते हैं।

4. मोटापे से मुक्ति- शोधकर्ताओं के अनुसार यदि नींद अधूरी रहे तो भूख महसूस करने वाले हार्मोंस का स्तर बदल जाता है तथा पेट भरने वाले और भोजन की मात्रा को नियंत्रित करने वाले ‘लेप्टिन हार्मोन’ के स्तर में कमी आ जाती है एवं भूख, मोटापे तथा वसा को बढ़ावा देने वाल ‘ग्रेलिन हार्मोन’ का स्तर बढ़ जाता है, परिणामस्वरूप व्यक्ति मोटापे का शिकार हो जाता है, इसलिए मोटापे से मुक्ति के लिए यह आवश्यक है कि खान-पान तथा व्यायाम का ध्यान रखने के साथ-साथ नींद भी पूरी लें। जिससे व्यक्ति में भूख तथा खाने की इच्छा बढ़ जाती है मुक्ति के लिए यह आवश्यक है कि खान-पान तथा व्यायाम का ध्यान रखने के साथ-साथ नींद भी पूरी लें।

5. मानसिक स्वास्थ- अधूरी नींद हमारे शरीर के साथ-साथ हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी घातक होती है। एक शोध के मुताबिक अच्छी नींद मस्तिष्क की कोशिकाओं स्वस्थ रखने में सहायक होती है, परंतु अगर नींद पूरी नहीं होती तो दिमाग को नुकसान पहुंचाने वाले मॉलिक्यूल्स अपने काम में लग जाते हैं, साथ ही पूरी नींद न लेने वाले व्यक्ति ही ज्यादातर पागलपन के शिकार होते हैं। अत: पूरी नींद लेकर हम स्वयं को मानसिक रूप से भी स्वस्थ रख सकते हैं।

6. बुढ़ापे का शत्रु- अगर नींद पूरी होती है तो बुढ़ापा हमसे कोसों दूर रहता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, अधूरी नींद के कारण चेहरे पर झुर्रियां, महीन रेखाएं एवं उदासी भी नजर आने लगती है जिसकी वजह से व्यक्ति थका हुआ नजर आने लगता है तथा उनके चेहरे का जवांपन फीका पड़ने लगता है जबकि पूरी नींद लेने से चेहरे पर ताजगी रहती है एवं उम्र का असर भी देरी से नजर आता है। 

अनिद्रा के कारण

1. बदलती जीवन शैली- वर्तमान समय में हमारी जीवनशैली बहुत बदल गई है, पुराने समय में जहां लोग जल्दी सोने तथा जल्दी जागने को प्राथमिकता देते थे वहीं आज देर रात तक पार्टी तथा साोशल नेटवर्किंग साइट्स पर चैटिंग करना आम बात हो गई है इन सब के साथ ही आज-कल नव धनाद्ïय वर्ग और उच्च वर्ग ने ‘दिन को काम और रात को मौजÓ करने के फलसफे को अपने जीवन का मूलमंत्र बना लिया है, परिणाम स्वरूप देर रात पार्टियों का आयोजन तथा उसमें शामिल होने वाले लोगों का प्रतिशत बढ़ा है एवं इस प्रकार लोगों के सोने के घंटों में कटौती हुई है। इसके साथ ही जहां पहले हम केवल पौष्टिïक भोजन को ही महत्त्व देते थे वहीं आज फास्ट फूड और जंक फूड हमारे जीवन के अभिन्न अंग बन चुके हैं, यही कारण है कि हम नींद से दूर होते जा रहे हैं और फिर हम नींद के लिए विभिन्न प्रकार की दवाइयों, वाइन आदि का सहारा लेने लगते हैं जिसके परिणाम स्वरूप अनेक बिमारियों की सौगात हमें मिल जाती है। 

2. अधिक चाय-कॉफी का सेवन- अधिक चाय-कॉफी का सेवन भी हमारी नींद के लिए घातक होता है। कॉफी में कैफीन पाया जाता है जो हमारे मस्तिष्क को सक्रिय कर देता है, जिस वजह से हमें नींद नहीं आती, इस कारण से छात्र परीक्षा के दौरान देर रात तक जगने के लिए चाय-कॉफी का सेवन करते हैं परंतु इस बात से अनजान होते हैं कि अधिक मात्रा में इसका सेवन हमें अनिद्रा का रोगी बना देता है। हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सोने और चाय-कॉफी के सेवन के मध्य आठ घंटे का अंतराल अवश्य रहे।

3. अव्यवस्थित मनोदशा- सबसे आगे निकलने की चाह तथा विकास के शीर्ष पर पहुंचने की ललक ने मनुष्य को निरंतर क्रियाशील रहने के लिए प्रेरित अवश्य किया है, परंतु इस व्यस्तता से कई बार हम अपने व्यक्तिगत तथा व्यवसायिक जीवन में तालमेल नहीं बैठा पाते हैं और न ही स्वं के लिए समय निकाल पाते हैं, परिणाम स्वरूप जन्म होता है तनाव का तथा हमारी मनोदशा भी व्यवस्थित नहीं रह पाती और हम अनिद्रा के शिकार हो जाते हैं।

4. रोग- कई बार हम शारीरिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण भी अनिद्रा के शिकार हो जाते हैं। किसी भी प्रकार की शारीरिक पीड़ा या व्याधी की वजह से हमारा मस्तिष्क तनावमुक्त नहीं हो पाता है तथा मस्तिष्क में शारीरिक पीड़ा की वजह से मस्तिष्क में अनेक विचार निरंतर चलते रहते हैं, जिससे हमें नींद आने में परेशानी होती है।

5. वातावरण- कई बार हमारे सोने के कमरे में फैली अव्यवस्था अथवा आस-पास का शोरगुल भरा वातावरण हमारे नींद में बाधक बनता है, क्योंकि नींद के लिए एक शांत तथा शोरमुक्त वातावरण की आवश्यकता होती है, साथ ही कमरे में फैली गंदगी तथा अव्यवस्था भी नींद में बाधक होती है।

6. यात्राएं- वर्तमान समय में यात्राएं मनुष्य के जीवन का एक अंग बन गई हैं, चाहे वह व्यवसाय से संबंधित हो या फिर किसी अन्य कार्य से। कई बार ऑफिस से घर की दूरी काफी अधिक होती है और वक्त की पाबंदी के कारण लोग समय पर पहुंचने के लिए कुछ घंटे अपनी नींद से कम कर देते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें तनाव तथा एकाग्रता में कमी के रूप में चुकाना पड़ता है।

अच्छी नींद के लिए उपाय

  1. व्यवस्थित दिनचर्या- अच्छी नींद के लिए आवश्यक है कि सोने तथा जगने का एक निश्चित समय निर्धारित करें तथा छुट्ïटी वाले दिन भी अगर संभव हो तो उसका पालन अवश्य करें। इससे आपको नींद भी समय पर एवं अच्छी आएगी और आप स्वयं को एक नई ऊर्जा से परिपूर्ण भी पाएंगे।

2. चिंता से बचें- अत्यधिक चिंता ‘चिता’ का काम करती है, इसलिए स्वयं को जितना अधिक हो पाए चिंता से दूर रखें तथा जब भी बिस्तर पर सोने जाएं तो केवल उन बातों का ही स्मरण करें जिससे आपको खुशी मिले।

3. नशे से दूर रहें- चाय, कॉफी, शराब तथा किसी भी प्रकार का नशा नींद का दुश्मन होता है। शराब में व्याप्त एल्कोहल से हमारे मस्तिष्क की गतिविधियां मंद हो जाती हैं जिससे शुरू में तो नींद आती है परंतु बाद में नींद टूटने लगती है तथा हम अनिद्रा के शिकार हो जाते हैं।

इसके साथ ही कोशिश करें कि जितना हो सके नींद की दवा से दूर रहें, क्योंकि यह हमारे लिए बहुत घातक है और इसके लगातार प्रयोग से नींद की दवाओं का सेवन हमारे लिए एक लत बन जाती है तथा इस बात को हम भली-भांति जानते हैं कि किसी भी प्रकार की लत हमारे लिए कितनी घातक सिद्ध होती है।

4. योग तथा व्यायाम– व्यायाम से हमारा स्वास्थ्य तो अच्छा रहता ही है साथ ही अगर हम शाम के समय व्यायाम करें तो थकान की वजह से हमें नींद जल्दी व अच्छी आएगी। इसके साथ ही योग, ध्यान तथा आत्मसम्मोहन की विधि का प्रयोग भी अच्छी नींद के लिए उपयोगी सिद्ध होती है। इन सब के अतिरिक्त योग तथा ध्यान का एक लाभ यह भी है कि इनको अभ्यास में उतार लेने के बाद नींद कम लेने के बावजूद भी स्फूर्ति एवं ताजगी को बनाए रखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त बिस्तर पर जाने के उपरांत गहरी-गहरी सांसे लेने से भी हम तनाव से दूर तथा नींद के निकट पहुंच जाते हैं।

5. सुपाच्य भोजन- अच्छी नींद के लिए यह आवश्यक है कि रात के समय किसी भी प्रकार का गरिष्ठï भोजन न करें साथ ही इस बात का ध्यान रखना भी आवश्यक है कि रात को हमेशा भूख से कम खाएं और यदि संभव हो तो सोने से दो घंटे पहले ही भोजन कर लें पंरतु हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि हम भूखे न सोएं, क्योंकि भूख की वजह से हमें नींद नहीं आती है और पेट खाली होने की वजह से हमें पेट में जलन तथा गैस आदि समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।

6. स्वच्छ वातावरण- अच्छी नींद के लिए आवश्यक है कि हमारा कमरा तथा बिस्तर साफ हो तथा कमरे में मच्छर या खटमल न हों साथ ही इस बात का ध्यान रखना भी आवश्यक है कि बिस्तर न तो आवश्यकता से अधिक मुलायम हो न अधिक कड़क तथा इस बात का भी ध्यान रखें कि अधिक भड़कीले रंगों का प्रयोग कमरे में न करें।

7. नींद आने पर ही लेटें- यदि आप अच्छी नींद लेना चाहते हैं तो यह आवश्यक है कि जब आपको नींद आने लगे तो ही बिस्तर पर जाएं। अगर आपको बिस्तर पर लेटने के 20 मिनट बाद भी नींद नहीं आती तो बिस्तर से निकल कर टहलें या कोई पुस्तक पढ़ें ऐसा करने से आपको शीघ्र ही नींद आने लगेगी।

8. बिस्तर पर काम न करें- कई व्यक्तियों की आदत होती है कि वो बिस्तर पर बैठ के अपने कई कार्य करते हैं तो वहीं कुछ लोगों को बिस्तर पर भोजन करने की आदत होती है, यदि आपके अंदर भी ऐसी कोई आदत है तो तुरंत ही उसे त्याग दें क्योंकि नींद पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

9. लिखने की आदत डालें- विशेषज्ञों का मानना है कि मन में यदि किसी तरह की भावना घुटन पैदा कर रही है तो उसे सोने से पहले लिख लें, क्योंकि लिखने से हमारे मन को सुकून मिलता है और मन शांत हो जाता है, जिससे नींद जल्दी आती है।

10. बाथ लें- अगर आप अनिद्रा से ग्रसित हैं तो सोने से पहले बाथ या हॉट बाथ लेना आपके लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है, क्योंकि बाथ से आपके दिन भर की थकान दूर होती है। यदि आप हॉट बाथ लेते हैं तो आपके शरीर का तापमान बढ़ जाता है तथा इससे आपको राहत तो मिलेगी ही तथा आपको नींद भी अच्छी आएगी।

11. माहौल- अच्छी नींद में हमारे आस-पास का वातावरण बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है अगर वातावरण शांत हो तो हमें नींद अच्छी आती है साथ ही प्रकाश का भी हमारी नींद पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है कुछ लोगों को बिलकुल अंधेरे कमरे में नींद आती है तो कुछ को कम प्रकाश में सोने की आदत होती है, जिन लोगों को प्रकाश में सोने की आदत हो वो हल्के प्रकाश वाले बल्ब का प्रयोग कर सकते हैं। साथ ही सोने के पहले यदि आप अपनी पसंद का संगीत सुने तो भी वह नींद में सहायक होता है परंतु इस बात का ध्यान रखें की संगीत हल्का हो।

12. मसाज- बिस्तर पर जाने के 10 मिनट पहले अपने सिर का हल्के हाथों से मसाज करें। अगर आप चाहें तो किसी तेल का प्रयोग भी कर सकते हैं। मसाज से सिर की मांसपेशियों को राहत मिलती है तथा नसें शिथिल होती हैं जो नींद में सहायक हैं।

13. गैजेट्स से दूरी- वर्तमान समय में फोन, कंप्यूटर, टी.वी. इत्यादि हमारे जीवन के अभिन्न अंग बन चुके हैं लेकिन हम इस बात से बिल्कुल अनजान होते हैं कि इनके प्रयोग की लत के कारण हम अनिद्रा के शिकार होते जा रहे हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि हम सोने के पहले इन चीजों से बिलकुल दूर रहें।

14. सुगंध का प्रयोग- चंदन, लैवेंडर तथा गुलाब आदि कुछ ऐसी खुशबुएं हैं जो हमारी नींद में सहायक होती हैं। अगर आप चाहें तो इन खुशबुओं का प्रयोग अपने सोने वाले कमरे में किसी भी रूप (अगरबत्ती, तेल, स्प्रे आदि) में करके इसका लाभ उठा सकते हैं।

15. तरल पदार्थों के सेवन से बचें- अच्छी नींद के लिए यह आवश्यक है कि रात के समय अधिक मात्रा में तरल पदार्थों के सेवन से बचें क्योंकि तरल पदार्थों के अधिक सेवन की वजह से बार-बार मुत्रत्याग की आवश्यकता होती है जिस वजह से नींद में अवरोध उत्पन्न होता है।

16. सूर्य का प्रकाश- विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिदिन 30 मिनट तक सन बाथ लेने से न केवल हमें विटामिन डी प्राप्त होता है बल्कि इससे ‘सेरोटोनिन’ का स्तर भी बढ़ जाता है जिससे नींद आने में सुविधा होती है। 

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