कुप्पू की दादी भी बड़े कमाल की हैं। वैसे तो उन्हें दुनिया भर की चीजें याद रहती हैं। और कहानी – किस्से तो बेशुमार। सुनाने पर आएँ तो समय का कुछ पता ही नहीं चलता। पर दादी को याद नहीं रहता तो बस अपना चश्मा। अकसर वे अपना चश्मा कहीं रखकर भूल जाती हैं। फिर […]
Author Archives: प्रकाश मनु
नन्ही सी नीना – नैतिक कहानी
बहुत समय पहले की बात है, सुभानपुर में एक अमीर स्त्री रहती थी। उसका नाम था चाँदतारा। चाँदतारा के पास बेशुमार दौलत थी। पर वह बिल्कुल अकेली थी। उसके कोई संतान भी नहीं थी, जिसे वह अपनी अपार दौलत सौंप जाए। इतना धन होने के बावजूद चाँदतारा के मन में जरा भी घमंड नहीं था। […]
किस्सा मीशा और डोडो का
छोटी सी मीशा है शैतानों की नानी। मजाल है जो मम्मी को जरा भी चैन लेने दे। यह तो अच्छा है कि इधर उसे ढेर सारे खेल सूझ गए हैं और खेल में मगन होती है वह तो सब कुछ भूल जाती है। कभी शेर और मोबाइल वाला खेल, कभी टेडीबियर को बिस्कुट खिलाने वाला […]
बेटा, तू तो शिवाजी की तरह है – नैतिक कहानी
शिवाजी का पूरा जीवन मुगलों से संग्राम करते बीता। उन्होंने देशभक्त लोगों को इकट्ठा करके फौज बनाई। छापामार लड़ाइयाँ लड़कर दुश्मन के किले जीते और एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की। शिवाजी कभी भी, कहीं भी मुगल सेना पर आक्रमण करके, उनके किलों पर अधिकार कर लेते थे। इस कारण मुगल सेना के मन में […]
जरा सँभल के बाबू!
कुप्पू की साइकिल सड़क पर जोर से फर्राटा न भरे तो भला उसे कुप्पू की साइकिल कौन कहे? उसने कोई हफ्ता भर पहले ही अपने प्यारे दोस्त सत्ते से साइकिल चलाना सीखा था। बड़ी चोटें खाकर। और बेचारे सत्ते ने भी क्या – क्या जतन न किए उसे सिखाने के लिए! खूब पसीना बहाया।… पर […]
और घड़ी रुक गई – नैतिक कहानी
जब से मुनमुनलाल ने घड़ी बनाई, उसका तो सिर ही फिर गया है। किसी से सीधे मुँह बात तक नहीं करता। एक छोटे से कस्बे माणिकपुर का है मुनमुनलाल। उस छोटे से कस्बे में भला घड़ियाँ किसने देखी थीं? बल्कि आसपास के गाँवों-कस्बों के लोग भी कुछ न जानते थे। खुद मुनमुनलाल एक दफे किसी […]
भोला भाई के कुरकुरे बिस्कुट
कुप्पू को सर्दियाँ पसंद हैं। सर्दियाँ आती हैं तो मूँगफलियाँ भी आती हैं। खूब भुनी करारी मूँगफलियाँ। जेब में भरो और मजे में कुड़-कुड़ खाते रहो। अहा, क्या मजे का स्वाद है! और सिर्फ मूँगफलियाँ ही क्यों? सर्दियों की एक खास चीज और पसंद है कुप्पू को। सो इधर जब से सर्दियाँ आई हैं, उसके […]
बिन्नू क्यों परेशान है? – नैतिक कहानी
बिन्नू स्कूल से निकला, तो थोड़ा परेशान था। उसे लगा, उसकी आँखें जल रही हैं, माथा तप रहा है। कंधे पर बस्ता लटकाए वह जैसे अपने आपमें ही बेसुध, बड़बड़ाता जा रहा था, ”सेकेंड, सेकेंड, सेकेंड…उफ फिर सेकेंड! मेरी जिंदगी में सेकेंड तो ऐसे दर्ज हो गया है, जैसे गले में पड़ा हुआ भारी पत्थर! […]
और फिर नाच उठा बिल्ली का बच्चा
सान्या का घर नदी किनारे था। पास ही था एक सुंदर हरा-भरा पहाड़, जो उसके गाँव बेलापुर की सरहद को छूता था। जैसा सुंदर – सा नाम था बेलापुर का, वैसा ही सुंदर था बेलापुर। वहाँ एक-दूसरे से गले मिलते पेड़ ही पेड़ थे, फूल ही फूल। हर पल हँसते-खिलखिलाते, खुशबुएँ फैलाते फूल। इसी बेलापुर […]
चाँदी के गहने – नैतिक कहानी
एक था निरगुनिया। उसकी पत्नी थी छिगुनिया। एक दिन छिगुनिया बोली, ”चलो, हरिद्वार जाकर गंगा में स्नान करके आएँ।” निरगुनिया बोला, ”चलो!” पर उनकी घास-फूस की कुटिया थी। छिगुनिया के पास चाँदी के कुछ बढ़िया गहने थे। ‘अगर पीछे से किसी ने चुरा लिए तो…?’ उसने सोचा। निरगुनिया ने सलाह दी, ”ऐसा करते हैं, सेठ […]
