फ्रैडा ग्रेहाउंड बस स्टेशन लौटी।
जौनी उसे कहीं नहीं दिखाई दिया। उसे इंतजार करते हुए बीस मिनट का समय बीत गया था, किन्तु जौनी अभी तक भी नहीं लौटा था। वह व्याकुल भाव से सीट से उठी और बस स्टेशन से बाहर आ गई। उसने हाथ में एक छोटा-सा होल्डाल पकड़ा हुआ था।
ज्यों-ज्यों समय बीतने लगा, उसकी बेचैनी बढ़ने लगी। तभी वह चौंक पड़ी। पीछे से एक हाथ ने हल्के-से उसके कंधे का स्पर्श किया –
दौलत आई मौत लाई नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- भाग-1
‘सॉरी बेबी। मैं तो तुम्हें पहचान ही न सका। तुम्हारी तो हुलिया ही बदल गई है। बेहद खूबसूरत लग रही हो।’
फ्रैडा घूम गई – उसने अपने कंधे का स्पर्श करने वाले की ओर देखा – पल भर के लिए वह ठिगने कद, भारी जिस्म वाले व्यक्ति को पहचान न सकी – दाढ़ी के साथ सिर के भी बाल सफाचट थे – होंठों के ऊपर सिर्फ घनी मूंछें थीं।
‘ओह जौनी!’ पहचानने के बाद वह खुशी से चीखी। वह तुरन्त उसकी ओर लपकी। परन्तु जौनी पीछे हट गया और ठोस आवाज में बोला – ‘यहां नहीं बेबी। मैं टिकटें ले आया हूं। आओ चलते हैं।’
वे दोनों बस में जा चढ़े।
बस की सबसे पिछली सीट पर बैठा हुआ जौनी हरेक चढ़ने वाले व्यक्ति का निरीक्षण कर रहा था, पर अभी तक उसे कोई संदिग्ध व्यक्ति दिखाई नहीं दिया। जैसे ही बस स्टार्ट हो गई – उसने फ्रैडा का हाथ अपने हाथ में ले लिया। उसे सहलाते हुए बोला, ‘तुम्हारी तो काया ही पलट हो गई बेबी। अपनी जरूरत का हर सामान ले आई हो न?’
‘हां।’
जौनी कुछ देर खामोश रहा, फिर बोला – ‘देखा बेबी। जिस मंजिल की ओर हम बढ़ चले हैं उसमें सरासर मौत का खतरा है। अब भी समय है, खूब अच्छी तरह से सोच लो। हालांकि देर हो चुकी हैं, फिर भी कुछ नहीं बिगड़ा है तुम चाहो तो…’
‘मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा।’ फ्रैडा उसकी ओर घूरते हुए, उसकी बात काटते हुए बोली।
‘मैंने हालात पर गंभीरता से सोचा है।’ – जौनी बोला – ‘तुम्हें अपने साथ इस झंझट में फंसाने का मैं ही जिम्मेदार हूं।’ देर-सबेर वे लोग मुझे पकड़ ही लेंगे, क्योंकि माफिया के हाथों से बच पाना असंभव है। अगर हम दोनों साथ-साथ पकड़े गये तो मैं जरूर ही मार दिया जाऊंगा, साथ में तुम्हें भी अपनी जान गंवानी पड़ जायेगी। यह मत समझना कि मुझे पकड़ने के बाद वे तुम्हें भूल जाएंगे। वे हर्गिज भी तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ेंगे और जिस दिन उन्होंने तुम्हें पकड़ लिया, वही तुम्हारी जिन्दगी का आखिरी दिन होगा। मैं तुम्हें साथ तो रखना चाहता हूं पर तुम सारी स्थिति पर गंभीरता से सोच लो। रिस्क बेहद जानलेवा है। हमारे पास मौके तो जरूर है परन्तु अधिक नहीं। धन यदि मेरे हाथ आ गया तो मैं तुमसे वायदा करता हूं कि उसमें से अच्छी-खासी रकम तुम्हें दे दूंगा। अतः पैसों की चिन्ता तो तुम भूल ही जाओ। आधा घंटे में हम जैक्सन विले पहुंच जाएंगे, चाहो तो वहां उतरकर तुम आसानी से गायब हो सकती हो। मुझे खोजने के चक्कर में उन्हें तुम्हारा तो ख्याल ही नहीं आयेगा।’
फ्रैडा ने सोचने की कोशिश की, किन्तु एक लाख बयासी हजार डॉलरों की कल्पना ने उसकी सारी सोचें काफूर की मानिंद उड़ा दीं।
धन की चकाचौंध ने उसको अच्छा-बुरा सोचने की पहचान भुला दी।
‘मैं तुम्हारे साथ ही रहूंगी जौनी।’ काफी अरसे तक सोचने-विचारने के बाद उसने फैसला दिया।
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36
सैमी ठीक साढ़े सात बजे उठ गया। परेशान और उनींदी-सी हालत में टॉयलेट में दाखिल हो गया। पन्द्रह मिनट के बाद बाहर निकला, शेव की, नहाया और परकोलेटर चालू करके कॉफी बनाने लगा।
कॉफी तैयार हो गई थी। अतः उसने वर्दी पहनी और बेमन से कॉफी पीने लगा।
तभी फोन घनघना उठा।
सैमी हिचकिचाया – ‘क्लोय का तो फोन नहीं है-सुबह ही सुबह चीखना – चिल्लाना न आरंभ कर दे कहीं।’
सैमी ने डरते-डरते रिसीवर उठाया।
‘सैमी।’
उसका समूचा बदन कांप उठा। आवाज जौनी की थी।
‘हां। सैमी बोल रहा हूं।’ वह हकलाता हुआ बोला।
‘सुनो सैमी। मैं चाहता हूं कि तुम ग्रेहाउंड बस स्टेशन पर जाकर यह पता लगाओ कि उसकी निगरानी की जा रही है या नहीं।’
‘मैं ऐसा नहीं कर सकता मिस्टर जौनी।’ सैमी लगभग रो देने वाली आवाज में बोला – ‘मैं पहले ही बहुत दुःखी हूं। ईश्वर के लिए मेरा पीछा छोड़ दो। मेरे हाल पर तरस खाओ।’
‘यह बहुत जरूरी है प्रेमी।’ जौनी के स्वर में कठोरता थी – ‘तुम्हें वहां जाना ही पड़ेगा। मैं वायदा करता हूं तुम्हारी रकम लौटाने के अलावा भी तुम्हें तीन हजार डॉलर और दे दूंगा।’
सैमी के शरीर में तनाव-सा पैदा हो गया। उसने पूछा – ‘सच कह रहे हो न मिस्टर जौनी?’
‘क्या मैंने तुमसे पहले कभी झूठ बोला है?’ – जौनी ने कहा – ‘जो कुछ मैंने कहा है उसे करो, बदले मैं तुम्हें छः हजार डॉलर का देने का वायद करता हूं।’
‘मान लो उसकी निगरानी की जा रही हो तब?’ सैमी ने आशका व्यक्त की।
‘उस हालत में तुम रोज चैक करते रहो। जब भी लाइन क्लीयर हो मुझे बता देना।’
सैमी चाहते हुए भी इंकार न कर सका, क्योंकि छः हजार डालर में उसकी कई परेशानियां दूर हो जाने वाली थीं।
‘ठीक है मिस्टर जौनी।’ वह बोला – ‘मैं ऐसा ही करूंगा।’
‘दैट्स राइट। मैं कल इसी समय फिर फोन करूंगा।’
जौनी ने संबंध-विच्छेद कर दिया।
हालांकि सैमी डर रहा था, फिर भी उसे यह बात अच्छी तरह से पता थी कि जौनी का वायदा कभी झूठा नहीं होता।
पी कैप पहनकर वह अपने अपार्टमेंट से बाहर निकला और तेजी से गैराज की ओर जाते हुए सोचने लगा – मिस्टर जौनी बस स्टेशन की निगरानी के बारे में क्यों इतने बेचैन थे। इसका सिर्फ एक ही मतलब हो सकता था, मगर सैमी ने उस मतलब को अपने दिमाग में पनपने ही नहीं दिया।
वह कार द्वारा मसीनो को उसके ऑफिस ले गया।
‘तुरन्त घर जाओ।’ मसीनो ने उसे दफ्तर के बाहर पहुंचकर आदेश दिया – ‘मिसेज मसीनो को शॉपिंग के लिए जाना है। फिर आज रात हमने कहीं जाना है। उसके बारे में तुम्हें वही बतायेंगी।’ मसीनो ने रुककर गौर से उसके चेहरे को देखते हुए पूछा – ‘क्या बात है, तुम कुछ परेशान-से दिख रहे हो?’
‘कुछ नहीं बॉस। मैं एकदम ठीक हूं।’ सैमी जल्दी से बोला।
मसीनो ने फिर उससे कुछ नहीं पूछा। वह कार से उतरा और धड़धड़ाता हुआ अपने दफ्तर की इमारत में प्रवेश कर गया।
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सैमी ने ग्रेहाउंड बस स्टेशन की ओर देखा। फिर काफी हिचकिचाहट के बाद कार से बाहर निकल आया।
ज्योंही मसीनो ने अपने दफ्तर में प्रवेश किया तो देखा – एन्डी खिड़की से बाहर की ओर झांक रहा था।
‘अब हमें फौरन इसे कर ही डालना चाहिए।’ मसीनो ने झल्लाते हुए कहा – ‘तुम सुन रहे हो न…।’
परन्तु उसका वाक्य अधूरा ही रह गया। एन्डी ने उसे हाथ के इशारे से अपने नजदीक बुला लिया। मन ही मन कुढ़ते हुए वह खिड़की के नजदीक जा पहुंचा।
उसने देखा – सैमी सड़क पार कर रहा था। वह सतर्क दृष्टि से दाएं-बाएं, इधर-उधर देखता जा रहा था। फिर वह ठिठकता हुआ बस स्टेशन में प्रवेश कर गया।
‘यह कलुआ क्या कर रहा है वहां?’ मसीनो गुर्राया – ‘मैंने इसे फौरन वापिस घर पहुंचने के लिए कहा था।’
‘देखते रहो।’ एन्डी ने शांत भाव में उत्तर दिया।
काफी देर बाद सैमी बस स्टेशन से बाहर निकला था। पहले की तरह चोरों की भांति इधर-उधर देखता हुआ सड़क पार करके कार में आ बैठा। उसने कार स्टार्ट की और उसे लेकर चला गया।
‘क्या मतलब हुआ इसका?’ मसीनो ने पूछा।
लेकिन एन्डी के चेहरे के भावों से साफ जाहिर हो रहा था कि वह इस दृश्य से कुछ समझ चुका था।
‘लगता है – मिस्टर जोय जैसे वह जासूसी कर रहा था।’ एन्डी ने उत्तर दिया – ‘साथ ही सहमा हुआ था।’
‘ठीक कहते हो। मैंने भी कुछ देर पहले ऐसा ही महसूस किया था जैसे वह कुछ परेशान हो। साथ ही डरा हुआ भी लगता था।’
एन्डी मसीनो के डेस्क पर आ बैठा और बोला – ‘मेरा शुरू से ही यह विचार था कि जौनी ने यह काम अकेले ही नहीं किया होगा – मेरा ध्यान फ्यूजैली पर तो चला गया परन्तु सैमी के बारे में तो मैंने सोचा तक भी नहीं।’
मसीनो खामोश खड़ा रहा था। उसकी आंखें चमक रही थीं।
‘वियान्डा और सैमी वर्षों तक साथ-साथ काम करते रहे हैं।’ एन्डी ने कहना आरंभ किया। हालांकि बात कुछ अजीब-सी लगती है मगर मेरा दावा है कि सैमी, जौनी से सम्पर्क स्थापित किये हुए है। धन निश्चित रूप से इन्हीं लॉकरों में है मिस्टर जोय। मेरा विचार है कि सैमी इन थैलों को उन लॉकरों में रख आया होगा, जबकि जौनी अपनी शहादतों (एलीबी) के चक्कर में पड़ा हुआ था।’
मसीनो बैठ गया। उसका चेहरा क्रोध से विकृत होने लगा। गुस्से भरी आवाज में वह बोला – ‘अर्नी और टोनी को भेजकर इस कलुए को यहां पेश करो – मैं स्वयं इससे बात करूंगा और इसकी वो गत बनाऊंगा कि इसकी मां भी इसे न पहचान सकेगी।’

‘नहीं’ एन्डी ने शांत स्वर में कहा – ‘हम वियान्डा तथा रकम दोनों चीजों को हासिल करना चाहते हैं। इसलिए क्यों न एक जाल फैला दें। आज मैं और आप दोपहर के बाद सैमी के साथ यूं ही रॉल्स में बैठकर चलेंगे। आप उसे सुनाते हुए मुझसे यह कहना कि ल्यूगी ने समाचार भिजवाया है, वियान्डा हवाना पहुंच चुका है और आप धन प्राप्त होने की आशा छोड़ बैठे हैं, फिर हम लॉकरों की निगरानी करने वाले अपने आदमियों को वहां से हटा देंगे ताकि अगली बार जब सैमी उन्हें चैक करे तो उसे लाइन क्लीयर ही नजर आये। वह जौनी को इसकी सूचना दे देगा और जौनी रकम निकालने के लिए यहां वापस आयेगा।’ एन्डी ने मसीनो की ओर देखा और फिर कहना आरंभ किया – ‘उस सूरत में हमने सिर्फ एक काम करना है – हम टोनी को टेलिस्कॉपिक साइलेंसर लगी रायफल लेकर यहां बिठा देंगे।’
‘लेकिन मैं उस हरामजादे को जिन्दा पकड़ना चाहता हूं।’ मसीनो ने कहा।
‘यदि रकम वापस हाथ आ रही हो तो उसे मुर्दा हासिल करना ही बेहतर है मिस्टर जोय।’
मसीनो ने कुछ क्षणों तक सोचा – फिर बोला – ‘शायद तुम ठीक ही कहते हो।’
‘शायद नहीं मिस्टर जोय, मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं। हमें बिगबॉस को भी कुछ देना नहीं पड़ेगा, क्योंकि सब-कुछ हम स्वयं ही कर लेंगे।’
मसीनो के चेहरे पर भेड़िये जैसी हंसी उभरी। दांत चमकाकर वह बोला –
‘आज तुम्हारा दिमाग सही दिशा में दौड़ रहा है। इस हरामजादे को ठिकाने लगाकर हम उस वेश्या की भी खबर लेंगे, जो उसकी सहायता कर रही है।’
दौलत आई मौत लाई भाग-36 दिनांक 23 Mar.2022 समय 08:00 बजे रात प्रकाशित होगा

