Mere papa ek hatyare hai
Mere papa ek hatyare hai

Hindi Social Story: सुबह से मुआयना हो रहा था। छान बीन की जा रही थी कि इतने बड़े आलीशान बंगला में अपनी बेटी के गायब होने की रिपोर्ट डॉक्टर शरमन ने लिखवाई,सर मेरी बेटी काव्या कल से नहीं आई। सभी तरह से छानबीन में जुटी पुलिस तहकीकात करने में लगी थी। उनसे पूछा गया कि बेटी काव्या कितमेरेने बजे कहाँ के लिए निकली। तब डॉक्टर शरमन ने कहा जी कल शाम छह बजे कोचिंग के लिए निकली थी। उसके कपड़े ,बैग ,डायरी, जूते सभी की जानकारी दी। इतने पर भी अधिकारियों को संतोष नहीं हुआ वो कहने लगे हमें आपके घर की तलाशी लेनी होगी। और वे लोग काव्या की आलमारी देख रहे थे, कहीं कोई सुराग मिल जाए आखिर काव्या कहां हो सकती है ,ऐसा कुछ नोट मिल जाए….

 काव्या की माँ छह माह पहलही गुजर चुकी है,उसे डॉक्टर शरमन ने पत्नी की मौत को बीमारी बताया था। एक दिन उसे मां की डायरी मिली ,जिसे उसने संभाल कर रख लिया। मां की लिखने की आदत के कारण पूरी डायरी जब काव्या पढ़ रही थी ,तब एक एक शब्द से आंसू मोती से आंखों में डबडबा गये। जब भी समय मिलता वो पढ़ती, एक दिन डॉक्टर शरमन ने देख लिया। उस समय कुछ न बोला, वह उस पर नजर रखने लगा। अब पंद्रह साल की काव्या के मन में था ,ये मेरे पिता मनोहर अंकल के हत्यारे है। जिस कारण वो बच न सके। यदि पापा समय रहते आपरेशन करते तो वे बच जाते , उन्हें दूसरे शहर से रिफर किया गया था,पर आंटी के पास पर्याप्त पैसा न था। ना पैसा जमा करने की स्थिति में उनका मृत्यु हुई थी।। अगर वो समय से आपरेशन करते तो वे बच जाते। इसी कारण कामिनी आंटी ने पापा के खिलाफ केस किया ,पर पापा ने पैसे ले देकर रफा दफा करने की कोशिश की, स्टाफ से झूठे बयान दिलवाए। मम्मी ने कामिनी आंटी का साथ देना चाहा तो उन्होंने रोक लिया।

इस तरह उसे एहसास हुआ कि पापा ही मनोहर अंकल के हत्यारे हैं , मुझे आंटी को इंसाफ दिलाना ही होगा। मम्मी ने बहुत कोशिश की ,पर पापा के कारण वे पूरी तरह से उनका साथ नहीं दे पाई। एक तो उनकी तबीयत दूसरा कारण पापा की बंदिश…खैर अब उनका साथ मैं दूंगी ताकि और कोई डॉक्टर पैसे की लालच में कोई अंधा न हो जाए। उसने सोच लिया था कि पापा की करतूत का भांडा पुलिस के सामने खोलकर रहेगी। लेकिन वह पिता से कुछ पूछने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी। वह अकेले में एक एक जुल्म की दास्ताँ याद कर वह रो रही है कि कैसे पापा ने बेबस अंकल का आपरेशन नहीं किया ,जिसके कारण उन्होंने वही दो घंटे में दम तोड़ दिया।ये सब मम्मी की डायरी पढ़कर उसके आंसू बहने लगे। जैसे ही पिता को देखती और वो गुमसुम सी हो जाती है। उन्हें देखकर प्यार नहीं नफरत बढ़ रही थी। और उसका पढ़ाई से ध्यान हट रहा था।

डॉक्टर शरमन विख्यात हार्ट स्पेशलिस्ट है, वो अंदर से कठोर हृदय के इंसान थे। पत्नी के प्रति रवैया सही नहीं था। यह काव्या समझ चुकी थी। जब से मां की डायरी पढ़ी तो वह समय की ताक में थी ,पापा निकले मैं ये डायरी बैग में रखूं। पिता की नजर उस पर थी, जब बैग में डायरी रख रही थी। तो उसके पिता को पता था कि उसकी मम्मी ने उसके काले कारनामे कर कच्चा चिट्ठा लिखा है,वह छीनकर जलाने लगे। तब वह बोली – पापा ये क्या कर रहे हो, मेरी मां की डायरी है, आपने उनका सही से आपरेशन नहीं किया, आप किस तरह मां से लड़ते थे, ये जानती थी।मेरी नजर में आप हत्यारे हैं मैं सबको बताऊंगी । तब उसके पापा कहने लगे- ये क्या कह रही हो ? पता नहीं है क्या…उन्हें हार्ट में ब्लाकेज हो गये थे। आप तो पापा इतने बड़े डॉक्टर थे ,तो फिर क्यों नहीं बचाया मम्मी को!! तब उसके पापा बोले -कुछ भी मत समझों ,काव्या तुम्हारी मां की हालत सही नहीं थी। पर पापा ये डायरी में लिखा एक एक शब्द कुछ और ही कह रहा है…. अच्छा तेरी बात का कौन विश्वास करेगा।यदि दोषी नहीं तो उनकी डायरी को क्यों जलाया बताइये पापा?? काव्या की बात सुनकर डॉक्टर शरमन को बहुत गुस्सा आया और आपे से बाहर हो गये- गुस्से से चिल्ला कर कहने लगे-जब तेरी मां मेरा कुछ नहीं कर पाई, तो तू बीत्ते भर की मेरा क्या कर लेगी? तब वह बोलने लगी मुझे पता है कि कामिनी आंटी ने आपके खिलाफ केस किया तो आपने मम्मी को उनके साइड होने पर उन्हें नहीं बक्शा। ताकि मम्मी आपके खिलाफ कुछ न बोल सके। उन्हें पता था कि आपकी वजह से कामिनी आंटी के पति की मौत हुई। वो इसकी गवाही देना चाहती थी , पर आपने उनका साथ नहीं देने दिया। पर आप मनोहर अंकल के कातिल ही कहलाओगे। और मम्मी के भी ……..

उन्होंने कसकर हाथ पकड़ कर तहखाने में बंद कर दिया। पापा मुझे बंद क्यों कर रहे हैं छोड़ो….
अब जैसे ही पुलिस घर से निकलने लगती है तब उन्हें कुछ कागज जले हुए मिलते हैं।
 उसे पालीथीन में रखकर पुलिस छानबीन करती है। तब पता चलता है कि कुछ समय पहले इन पर केस चल रहा था।

छानबीन और गहराई से होती है…..
कुछ दिनों बाद डॉक्टर शरमन की गैर मौजूदगी में पुलिस घर के नौकर से पूछताछ करती है ,उस पेपर की जांच की गयी इससे पता चलता है कि ये डायरी के पेज है। तुम इस बारें कुछ जानते हो तो बताओ तब वह कहता मेरी मालकिन डायरी लिखती थी। ये वही डायरी के पेज है। तब पुलिस की तलाश जारी ही रहती है कि आखिर काव्या कहां चली गयी।वो स्कूल ,कोचिंग क्लासेस, दोस्तों से पता करने की कोशिश करते है।तब पता चलता है कि वो उस दिन कोचिंग आई ही नही। पुलिस ने नौकर से पूछा – जब काव्या कोचिंग जा रही थी, तब तुम कहाँ थे। तब वो बोला साहब तब मैं घर पर नहीं था। फिर पुलिस को नौकर पर शक होता है पुलिस नजर रखती है, तब पुलिस देखती है कि नौकर तह खाने के पास जा रहा है। वही पुलिस पीछा करती है तब तो ये देखती है कि काव्या तो बंधी हुई है। तुरंत उसे छुड़ा कर उसका बयान लेती है, नौकर को अरेस्ट करती है।और डॉक्टर के खिलाफ सर्च वारंट भी निकाल देती है उसकी बेटी की झूठी रिपोर्ट करने और नाबालिग बच्ची को बंधक बनाने के जुर्म सजा मिलती है । और काव्या को एन जी ओ में रखा जाता है। काव्या के बयान से ये साबित होता ये लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करते हैं। ये पैसे कमाने के चक्कर दूसरे की जान की परवाह भी नहीं करते थे और। ये सब उसने मम्मी की डायरी में पढ़ा था। और नौकर के बयान ने भी उन्हें गलत साबित कर दिया। भगवान माने जाने वाले डॉक्टर भी हत्यारे होते हैं जो गरीबों को मरने के लिए छोड़ देते हैं पैसे डिपाजिट न होने पर इलाज शुरू नहीं करते हैं। ये पढ़कर उसकी मम्मी की सहेली के पति का इलाज शुरू न होने से वो मर गया था, यही अस्पताल के स्टाफ से पुलिस उगलवा लेती है। इसी कारण उसकी मम्मी -पापा का झगड़ा हुआ था। इसकी दोषी उसकी मम्मी की सहेली कामिनी ने पुलिस को बताया मेरे पति की मौत के जिम्मेदार डॉक्टर शरमन ही है। तब पुलिस लापरवाही का केस कर सजा दिलवाती है ताकि ऐसे डॉक्टर को सबक मिले।
इस तरह एक पिता दोषी बाप साबित होता है।