doctor ka kartavya bodh
doctor ka kartavya bodh

Hindi Motivational Story: वीर अपने दफ़्तर में गया था, जब उसके मोबाइल पर कॉल आई कि उसके बेटे को किसी कार ने ठोकर मार दी है। वह भागता दौड़ता अस्पताल पहुँचा, तो उसने देखा कि बेटा आई.सी.यू. में है। पर डॉक्टर का फोन लग नहीं रहा था। ज़ोर का ग़ुस्सा आया। उसका बेटा ज़िंदगी और मौत से लड़ रहा है और डॉक्टर का कोई पता नहीं है। थोड़ी देर बाद एक आदमी सफ़ेद कुर्ते-पायजामे में दौड़ता हुआ आया, जिसे नर्स ‘डॉक्टर साहब’ कह रही थी। वीर समझ गया कि यही डॉक्टर है।

डॉक्टर के पास पहुँच कर उसने चिल्ला कर कहा, आप डॉक्टर हैं या जल्लाद? अगर आज यहाँ मेरे बेटे की जगह आपका बेटा होता, तो क्या आप ऐसा ही करते? नर्स ने वीर को चुप रहने का इशारा किया, पर डॉक्टर नर्स को चुप कराते हुए बोले, आप परेशान ना हों। आपके बेटे को कुछ नहीं होगा। वीर बोला, आपकी बातों से मैं चुप रहने वाला नहीं। वैसे भी आपको क्या फ़र्क़ पड़ता है। डॉक्टर चुपचाप ऑपरेशन थिएटर चला गया। थोड़ी देर में ऑपरेशन ख़त्म हो गया। डॉक्टर बाहर आया और वीर से बोला आपका बेटा एकदम ठीक है। नर्स आपको बाकी सारी चीज़ें बता देगीं। माफ़ कीजिएगा मुझे थोड़ी जल्दी है। वीर का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ था। पर जब तक वह डॉक्टर को पकड़ता वह वहाँ से चले गए। वीर ने नर्स से कहा, कैसा जल्लाद डॉक्टर है यह! नर्स बोली, जिस डॉक्टर को आप जल्लाद बोल रहे हैं, वह अपने बेटे को चिता पर छोड़कर आए थे क्योंकि उन्हें आपके बेटे की जान बचानी थी। कल रात उनका बेटा रोड एक्सिडेंट में मर गया। क्या एक डॉक्टर अपने बेटे की चिता को आग भी नहीं दे सकता? यह सुनकर वीर स्तब्ध रह गया। उसे अपने कहे पर जितना अफसोस हो रहा था, उतना ही चकित वह उस डॉक्टर की कर्त्तव्यपरायणता पर था।

बिना सोचे समझे किसी के बारे में कोई राय नहीं बनानी चाहिए।

ये कहानी ‘नए दौर की प्रेरक कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंNaye Dore ki Prerak Kahaniyan(नए दौर की प्रेरक कहानियाँ)