Rishton ki Dori
Rishton ki Dori

Motivational Story: ” हमारा यह जीवन अमूल्य होता है यह ईश्वर का वरदान है इसलिए हमें अपने जीवन का ध्यान रखना चाहिए और हमें यह याद रखना चाहिए कि हमें इसका सही उपयोग करना है सकारात्मिक विचार , सत्य , कर्तव्यनिष्ठा , अच्छाईयों को बढ़ावा देना आदि विचारों का हमें ध्यान रखना चाहिए और अपने बड़ों का सम्मान , छोटों को प्यार करना चाहिए “। विद्यालय में अपनी कक्षा में बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाते हुए कुमकुम अचानक रुक जाती है और कुछ ही पलों में कक्षा का समय समाप्त हो जाता है और स्कूल के चपरासी घंटी बजाकर इसको निर्धारित कर देते हैं कि अब कुछ समय के बाद अगली कक्षा शुरू हो जाएगी।
कुमकुम किताबें लेकर शिक्षक कमरे में चली जाती है और अगली कक्षा की तैयारी करने लगती है मगर उसका मन आज कक्षा में छोटों को प्यार देने की बात पर ही रुका हुआ था। वह अपने मन में सोचती है – ” बहन – बहन का प्यार ” कितना खास होता है कितना प्यार होता है इस रिश्ते में मगर यह ” रिश्तों की डोरी ” इतनी कमजोर हो जाएगी यह मैंने और पूर्णिमा ने कभी सोचा भी नहीं था। इतना प्यारा रिश्ता आज नफरत के रूप में किसी गुलाब के पौधे में कांटों के रूप में निवास कर रहा है।

विद्यालय के ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू हो गए थे इसलिए आज विद्यालय में शिक्षकों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसमें इस ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद आगे की रणनीति पर सभी शिक्षकों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इस बैठक के बाद सभी शिक्षक अपने घर की ओर चल देते हैं दोपहर का समय हो गया था और कुमकुम अकेले ही रास्ते में चल रही थी कुमकुम कोई रिक्शा देख रही थी जिससे वह इस गर्मी से स्वयं को बचाते हुए घर जल्दी पहुंचकर थोड़ा आराम कर सके।
तभी एक लड़की स्कूटी चलाते हुए नजर आती है उस लड़की ने अपना चेहरा कपड़े से ढ़क रखा था और कुमकुम ने भी अपना चेहरा कपड़े से ढ़क रखा था। इसलिए सिर्फ कुमकुम की आवाज़ सुनकर ही उस लड़की ने स्कूटी को रोका और कुमकुम ने उससे कुछ दूरी तक स्कूटी से छोड़ने का आग्रह किया।
लड़की ने अपनी सहमति देकर अपने सफर में कुमकुम को भी शामिल कर लिया। दोनों में थोड़ी बातें होती हैं जो मजाक और मस्ती से भरी हुई थीं। कुमकुम सोचती है – ” यह अनजान व्यक्ति भी मेरी बहन जैसी ही लगने लगी है। ” बहन – बहन का प्यार ” कुछ ऐसा ही होता है इस लड़की से भी ” रिश्तों की डोरी ” जुड़ गई है। कुमकुम उस लड़की को घर पर आने का निमंत्रण देती है मगर वह लड़की मना कर देती है। कुमकुम उसका नाम पूछती है और वह लड़की अपना नाम पूर्णिमा बताकर वहां से चली जाती है।

घर पहुंचकर कुमकुम भोजन ग्रहण करती है फिर थोड़ा आराम करने के बाद शाम को बच्चों को कोचिंग पढ़ाने की तैयारी करने लगती है। बच्चों के आने का समय हो जाता है इसलिए कुमकुम स्वयं के लिए चाय बनाने के लिए रसोईघर में चली जाती है। चाय बनाते हुए कुमकुम दोपहर में मुलाक़ात हुई लड़की और अपनी बहन पूर्णिमा के बारे में सोचने लगती है बचपन में शाम को कुमकुम और पूर्णिमा दोनों मिलकर चाय बनाते थे और मस्ती किया करते थे मगर एक गलतफहमी ने ” रिश्तों की डोरी ” को तोड़ दिया और ” बहन – बहन का प्यार ” समाप्त हो गया। कुमकुम स्वयं से कहती है – ” मैंने सिर्फ पूर्णिमा को पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए थोड़ा ज़ोर से बोल दिया था मगर पूर्णिमा ने इस बात को इतना गलत क्यों लिया यह मुझे अभी तक समझ ही नहीं आया उसने मुझसे कुछ नहीं कहा और एक चुप्पी में इतना समय निकाल दिया। एक बार मिल जाए तो एक थप्पड़ लगा दूं क्या कोई अपनी बहन से इतना नाराज़ होता है “।

शाम को बच्चों को कोचिंग पढ़ाने के बाद कुमकुम अपने कमरे की बालकनी में बैठकर चाय पीते हुए आज के दिन का आंकलन कर रही थी अपनी गलतियों को समझकर उन्हें सुधारने की कोशिश कर रही थी तभी मौसम बिगड़ने लगता है और तेज हवाओं का आना शुरू हो जाता है कुमकुम बालकनी से उठकर अपने कमरे में सामान रखकर सभी खिड़कियों और दरवाजों को बंद करने लगती है। तभी घर के दरवाजे पर एक दस्तक होती है कुमकुम कहती है – ” कौन है ? रुको अभी आती हूं “। कुमकुम दरवाजा खोलती है सामने स्कूटी वाली लड़की पूर्णिमा खड़ी होती है। कुमकुम उसे चाय – नाश्ता देते हुए कहती है – ” अब यहां धूप नहीं है अपना यह खूबसूरत चेहरा दिखा दीजिए “। पूर्णिमा अपना चेहरा दिखाती है उसका चेहरा देखकर कुमकुम और पूर्णिमा दोनों की आँखें नम हो जाती हैं क्योंकि यह स्कूटी वाली लड़की पूर्णिमा कोई और नहीं कुमकुम की बहन पूर्णिमा है। दोनों एक – दूसरे को गले लगाकर माफी मांगते हुए बहुत रोने लगती हैं। अचानक बारिश की बूंदे इस तपिश धरती को स्पर्श करके वातावरण को सुगंधित भीनी खुशबू से महका देती हैं। ” बहन – बहन का प्यार ” आज भी ” रिश्तों की डोरी ” से जुड़ा हुआ था।

पूर्णिमा कहती है – ” मैंने आपको स्कूल में पढ़ाते हुए देख लिया था इसलिए सुबह और दोपहर आपको देखने के लिए स्कूटी से रास्ते में चक्कर लगाती रहती थी। मेरा घर आपके घर के पास में है मैं रोज मिलने की कोशिश करती मगर हिम्मत नहीं होती थी। एक गलतफहमी ने हमारा यह प्यारा रिश्ता समाप्त करने की कोशिश की मगर हमारे प्यार ने इसे पराजित कर दिया “। अब बारिश समाप्त हो चुकी थी ठंडी हवाओं ने वातावरण में ठंडक लाकर कुमकुम को घर और दिल के सभी दरवाजे और खिड़कियां खोलने के लिए मजबूर कर दिया। कुमकुम कहती है – ” पूर्णिमा बचपन वाली चाय बनाते हैं साथ में “। रसोईघर में कुमकुम और पूर्णिमा ने अपने बचपन को याद करते हुए चाय बनाकर बालकनी में मस्ती करते हुए ” बहन – बहन का प्यार ” महसूस किया और ” रिश्तों की डोरी ” से एक – दूसरे को जोड़ लिया।