दो दिन की चाँदनी-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Do Din Ki Chandani

Hindi Kahaniya: सुहानी ने बड़ी हिम्मत जुटाई और रात को अपने बिस्तर से उठकर घर से बाहर निकल गई उस शानदार रंजना निवास कोठी से।

जिस बड़े घर में आने के , यहां रोहित के साथ रहने के सपने पूरे करने के लिए वो अपने परिवार को ही अपना दुश्मन बना बैठी थी आज उसी घर में उसका दम घुटता है।

पहले भी कई बार उसने भागने की कोशिश की पर हर बार नाकाम रही।
उसकी दुबली पतली सी बीमार दिखने वाली सास जिनके नाम पर ही रामशरण जी ने इस मकान में नेमप्लेट लगाई है।
उनमें उसके खिलाफ षड़यंत्र रचने,उसे मारने और ताने कसने में ना जाने कहां से इतनी ताकत आती है।

अपनी सास रंजना को जब पहली बार उसने देखा तो उस समय तो वो बड़े प्यार से उससे बोली, ” काश! तेरी जैसी प्यारी सी बिटिया हमारे घर में होती, उसकी हंँसी से घर में रौनक रहती। ढेरों नौकर चाकर हैं पर एक बिटिया की कमी हमेशा सताती है। मैं तो अपनी बहू को अपनी बेटी जैसा रखूंगी। बहू नहीं मैं तो बेटी घर लाऊंगी, बस रोहित शादी के लिए हांँ कह दे, तो लड़की ढूंढूं उसके लिए तेरे जैसी ही सुंदर।”

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उस समय यह बात सुनकर मन ही मन कितना खुश हुई थी सुहानी। शादी के बाद मुझे भी रोहित की मांँ जैसी सास मिल जाए।
उस समय कैसे बताती आपके बेटे ने अपने लिए लड़की ढूंढ ली है।

हम तीन साल से रिलेशनशिप में थे। वो तो हम दोनों ने ही अपने परिवार वालों को एक दूसरे के बारे में कुछ नहीं बताया था। वह तो अपने कॉलेज की तरफ से होने वाले कल्चरल प्रोग्राम की टिकट देने के बहाने रोहित के साथ उसकी मम्मी से मिलने आई थी और अपने होने वाले ससुराल के दर्शन करने आई थी।

कितना प्रभावित हुई थी उस आलिशान कोठी को देखकर। रोहित के पिता कपड़ों के व्यापारी थे। उनके

कई शो रूम भी थे। जो उनके अकेले वारिस रोहित के नाम ही हो जाएंगे यही सब सोच कर तो वो रोहित से प्यार कर बैठी थी।

बड़े मन्नतों के बाद शादी के बारह साल बीतने पर ही तो रंजना की गोद भरी थी। वो भी एक अमीर बाप की बेटी थी, उनके पिता ने ही रामशरण को फैक्ट्री में जब आग लग गई और उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना बहुत बड़ा घाटा होने से बचाया और उनकी जान भी बचाई ।
तब अस्पताल में ही वो बोले थे, “मैं तो कर्जदार हो गया आपका। मेरी बेटी को आपसे अच्छा लड़का मिल ही नहीं सकता।”

समय बीतता रहा और रामशरण अपनी मेहनत से बड़े व्यवसाई में अपनी पहचान बना लिए।

इकलौती संतान रोहित लाड़ प्यार में बिगड़ता चला गया। उसमें अपने पिता समान कोई गुण नहीं था वह तो अपनी मांँ पर ही गया था।
जब जो मांगता उसकी हर फरमाइश पूरी करने के लिए रंजना लड़ जाती थी उसके पिता रामशरण गुप्ता जी से।

सुहानी चार साल से रोहित को जानती थी, उसी के साथ कॉलेज में पढ़ता था। जैसे तैसे बारहवीं पास की थी उसने और डोनेशन के बदौलत ही शहर के नामी कॉलेज में उसका एडमिशन करवाया था रामशरण जी ने।

वहीं सुहानी के पिता गोपालदास तो उन्हीं के एक शो रूम में अकाउंट का काम देखते थे जिसके बदले उन्हें हर महीने वेतन तो मिलता पर वो बच्चों की पढ़ाई और घर खर्च में पूरा नहीं पड़ता।
वो रामशरण जी से कर्जा लेकर अपनी दोनों बेटी और बेटे को पढ़ा रहे थे।
इस बात से सुहानी भी अनभिज्ञ नहीं थी। वो जानती थी कि इतने मंहगे कॉलेज की फीस उसके मध्यमवर्गीय परिवार के लिए जुटाना मुश्किल है। पर सुहानी को तो बचपन से ही बड़े स्कूल, कॉलेज में पढ़ना था और बड़े घर में ही जाना है। उसके शौक रईशों वाले थे।

हमेशा ब्रांडेड मंहगे कपड़े जूते और बैग चाहिए होते थे उसको। उसे हमेशा लगता था कि भगवान ने उसके साथ अन्याय किया है जो एक मध्यमवर्गीय नहीं,‌ इस गरीब पिता की बेटी बनाकर।
अब शादी वो किसी अमीर लड़के से ही करेगी जिससे वो शान सौकत वाला जीवन जी सकें। उसके पास भी बड़ी गाड़ियां और एक से बढ़कर एक आधुनिक सामान हो।

रोहित ने फर्स्ट इयर में एडमिशन लिया पर उसका पढ़ने में बिल्कुल मन नहीं लगता था। वो तो नशे की लत का शिकार था।
बड़े घर का है यह उसकी शानदार गाड़ी और ब्रांडेड कपड़े चुगली करते थे। हाथ में आइ फोन गले में सोने की मोटी चेन और आंँखों पर सुनहरे फ्रेम का चश्मा पहने रोहित किसी राजा महाराजा से कम नहीं समझता था खुद को।
कॉलेज की सभी लड़कियां उसकी दीवानी बनी आगे पीछे मंडराती थी। पर वो किसी से बात नहीं करता। हमेशा एक अलग ही नशे में रहता।

उसकी नशीली आंखों में या उसकी अमीरी में सुहानी खो जाती थी। उसे लगता कि रोहित से शादी के बाद वो खूब ऐश से रहेगी।

गोपालदास रोहित के बारे में सब जानते थे इसलिए जब पहली बार सुहानी ने रोहित के साथ अपने रिलेशनशिप के बारे में बताया और यह कहा कि वो जल्द ही शादी करना चाहते हैं तो बहुत समझाया पर सुहानी ने एक ना सुनी।

“मैं खुद को खत्म कर लूंगी, अगर रोहित से मेरी शादी नहीं हुई तो। हमेशा गरीबी में नहीं जीना है मुझे।”

” बेटी पैसा ही सबकुछ नहीं होता है, वो लड़का सही नहीं है। गलत धंधा करने वालों के साथ उसकी दोस्ती है। “

” मुझे कुछ नहीं पता। हमने तीन महीने पहले कोर्ट मैरिज कर ली है। बस अब धूमधाम से शादी करवा दो वरना अपनी बेटी का मरा मुंह देखोगे।”

बेटी के प्रेम में आकर और लोक समाज के डर से उन्होंने अपना मकान भी गिरवी में रख दिया सुहानी की शादी के लिए। रामशरण से तो पहले ही वो बहुत सारा कर्ज ले चुके थे जिसे चुकाना भी जरूरी था।

शादी हुई कुछ दिन सब ठीक रहा लेकिन थोड़े दिन बाद ही सुहानी को इस रईशी और रोहित की असलियत पता चली। अब वो अक्सर जब भी नशे में होता उसे अपनी बेल्ट निकाल कर खूब पीटता।
वो रोहित की शिकायत किससे करती।
रामशरण तो अपने बेटे की शादी में भी नहीं आ सके थे, वो अपने बिजनेस के सिलसिले में जापान गए थे। रंजना जी तो अपने बेटे के खिलाफ एक शब्द नहीं सुनना चाहती थी।

उस दिन तो हद ही कर दी थी रोहित ने जब वो अपने दोस्तों को अपने घर लेकर आया और सुहानी को उन्हें खुश करने के लिए सबके सामने ही उसकी टॉप के बटन खोल दिए और लड़खड़ाते हुए बोला…
“बहुत ही नशीली है यह… आज रात तुम्हारी हुई। सब कोई मिल बांट कर इसका मजा लो, और ऐश करो। आज की पार्टी।”

बहुत कसमसाई थी ,उनकी गिरफ्त से निकलने के लिए छटपटाई थी।

वो दो दिन की चांदनी ढल चुकी थी, और सुहानी हर हाल में वापस अपने घर जाना चाहती थी। पर एक बार जब दलदल में पैर धंस गया था उसका तो अब वहां से निकलना मुश्किल था।

रोहित ने उसके कंधे पर हाथ रखा और जैसे ही चांटा मारने को हुआ उसने जोरदार धक्का दिया और रोहित ज़मीन पर जा गिरा।

आखिरकार उस दलदल से निकल ही गई वो। अब अपने पैरो पर खड़ा होना है, अधूरी पढ़ाई पूरी करनी है और अपने पिता के गिरवी रखे घर को छुड़ाना है यह संकल्प कर लिया।

दो साल बाद आइ एस की परीक्षा पास कर ली। रोहित जेल की सलाखों के पीछे था और उसकी मांँ रंजना देवी भी, बहू पर ज़ुल्म करने के अपराध में सलाखों के पीछे थी।