Worship Rules: शास्त्रों में भगवान की पूजा करना जरूरी माना गया है। सनातन धर्म में हिंदू संस्कृति के देवी देवताओं की पूजा अर्चना से जुड़े कई नियमों का उल्लेख मिलता है। ऋषि मुनियों और विद्वानों का मानना है कि भगवान की पूजा पाठ से आस पास के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है। इसलिए किसी भी तरह के पूजा पाठ, मांगलिक कार्यों और यज्ञ अनुष्ठान जैसे शुभ कार्यों को विधि विधान से करना चाहिए।
विधि विधान से की गई पूजा अर्चना से देवता जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं। यदि पूजा पाठ करते समय नियमों का ध्यान नहीं रखा जाए तो देवताओं के क्रोध का सामना भी करना पड़ सकता है। पूजा में की गई भूल के कारण देवताओं के आशीर्वाद की जगह अशुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। व्यक्ति के सभी कार्यों में बाधा उत्पन्न होने लगती है। तो चलिए जानते हैं कि भगवान की आराधना करते समय किन नियमों का पालन करना आवश्यक है, जिससे देवताओं की कृपा दृष्टि प्राप्त हो और व्यक्ति के सभी काम बिना किसी रुकावट के पूरे हो सकें।
इन विशेष बातों का रखें ध्यान

पंडित इंद्रमणि घनस्याल के अनुसार, हिंदू धर्म शास्त्रों में यह वर्णन मिलता है कि भगवान की पूजा अर्चना करने से पहले जरूर से नहाना चाहिए। नहाकर के देवताओं की पूजा का काम करने से देवताओं का आशीर्वाद घर के सभी सदस्यों पर बना रहता है। देवताओं के पूजन की सामग्री को नहाकर ही छूना चाहिए। बिना नहाए पूजा की सामग्री को छूने से सामग्री अशुद्ध हो जाती है और देवताओं को अर्पित करने योग्य नहीं रहती। पूजा करते समय हमेशा सिर को ढककर रखना चाहिए। भगवान से जुड़ी वस्तुओं को कभी भी सीधे जमीन से नहीं लगाना चाहिए। मंदिर की सभी चीजों को साफ सुथरे कपड़े के ऊपर रखना चाहिए।
घर के ईशान कोण में मंदिर बनाना चाहिए। एक बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि मंदिर के ऊपर किसी भी तरह का कचरा, कबाड़ और भारी भरकम सामान नहीं रखना चाहिए। यदि पूजा अर्थ के ऊपर कोई कबाड़ या सामान रखा है तो इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश बढ़ता है। किसी भी तरह की बासी सामग्री या भोग भगवान को अर्पित नहीं करना चाहिए। इससे देवता क्रोधित होते है और घर की लक्ष्मी रूठ जाती है।
भगवान को हमेशा अनामिका उंगली से तिलक करना चाहिए क्योंकि अनामिका उंगली का संबंध हमारे हृदय से होता है इसलिए जब हम अनामिका उंगली से भगवान को तिलक करते हैं तो हमारे हृदय में भगवान के प्रति आस्था बढ़ती है। हिंदू धर्म में पूजा करते समय भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा दिखाने के लिए दीपक जलाने की परंपरा है। इसलिए जब भी घी का दीपक जलाएं तो उसे भगवान की मूर्ति के बायीं ओर रखना चाहिए और तेल के दीपक को दायीं ओर रखना चाहिए। भगवान को भोग लगाकर ही पूजा खत्म करनी चाहिए। इस तरह से पूजा करने से धन धान्य में बरकत होती है।
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