Hindi Funny Story: हाय दईया…, पत्रिका की ओर से आये पार्सल को खोलते ही जोर की चीख के साथ धानी ‘खुदरंग यानी कि हमारी कहानी की नायिका बेहोश होकर गिर पड़ीं। कमरे के अंदर दफ्तर जाने को तैयार हो रहे उनके नाज-नखरे उठाने वाले कुछ महीनों के नए नवेले पति ने कोरियर वाले का फोन रिसीव करने के बाद अपनी पत्नी को सरप्राइज देने का सोचा था। इसलिये दस्तक की आवाज सुन कर अपनी धन्नो यानी धानी ‘खुदरंग से ही दरवाजे को खोलने को कहा था।पर उनकी खुशखबरी तब दु:ख में बदल गयी जब प्रीतम सिंह जी को आंगन में हाय दईया के आर्तस्वर के साथ दरवाजे पर जोर से धड़ाम की आवाज सुनाई पड़ी।
हड़बड़ाहट में बाहर आये तो पाया कि उनकी प्यारी सजनिया ही आंगन में बेहोश पड़ी हुई थीं, कोरियर बॉय ईनाम के पचास रुपये हाथ में थामे थर-थर कांप रहा था। घबराहट में वो उन्हें लेकर अस्पताल भागे, प्रेम विवाह था तो फिक्र में दुबले हुए जा रहे थे। नई बहू की बेहोशी से पहले तो सबका शक नन्ही किलकारी की खबर पर गया। अस्पताल का प्राइवेट वार्ड का कमरा यूं भी धन्नो के घरवालों से भरा हुआ था। अच्छी खासी रकम दोपहर से शाम तक बीमारी जांच में लग चुकी थी डॉक्टर भी ऐसी अजीब बेहोशी की बीमारी से परेशान थे।
कोई सुराग नहीं लग रहा था बेहोश होने का, सारी रिपोर्ट नार्मल थी, पर धानी उर्फ धन्नो ने चूं चां भी न की थी तबसे। प्रीतम को अपने सामने लेटी हुई उनकी धान पान धन्नो की हंसती हुई शक्ल याद करके बड़ा रोना आ रहा था। उधर सदमें की मारी धन्नो की बन्द आंखें अपनी बर्बादी की पूरी फिल्म देख रही थी, कान भी सब सुन रहे थे, वो उस दिन को भर-भर कर कोस रही थी, जब उसे अपने करवाचौथ व्रत के एवज में जब पतिदेव से मोबाइल मिला था। उसमें कवि सम्मेलन देखकर उसके सपनों में नई जान आ गयी, जब से वो फेसबुक पर आई थी, कितने ग्रुप की सदस्यता ले चुकीं थी।
रोज उनके शायराना कमेन्ट्स को खूब लाइक और कमेन्ट्स मिलते धन्नो तो निहाल हो जातीं और प्रीतम उन्हें हंसता देख निहाल। रोज-रोज बहुत सारी कहानी और कविताओं को चाट-चाट कर पढ़ने वाली गांव की गोरी धन्नो देवी के मन में भी छपास की जिज्ञासा जगी। यूं तो उन्हें शौक था शेरो शायरी का, गांव भर में उन्हें यूं भी हाजिरजवाबी में महारत हासिल थी और वो भी शायरी में जवाब देने में। जब उनके पति ने उनसे अपनी तारीफ करने को कहा तो उन्होंने पूरे आत्मविश्वास से उन्हें लजाते हुए शेर सुनाया था, ‘आपका प्यार मेरे दिल में ऐसे समाया, जैसे पुरानी हवेली में किसी भूत का साया। जब से आप मेरे दिल के अंदर आये, तब से न कोई यहां से गया और न कभी कोई आया।और हाय-हाय…, उन्होंने निहाल होकर कितनी तारीफ की थी। मर ही मिटे थे उनकी शायरी की अदा और भोली सूरत पर।
बस बेचारे गांव वाले तो कभी जान ही न पाए कि वो बड़े-बड़े शायरों और गजल गायकों की रचनाओं को भी बड़ी उदारता से उड़ा कर चिपका देती हैं और मुफ्त की वाह बटोर लेती हैं। वो भी स्वयं को महिला गुलजार या गालिब से कम में न गिनतीं, इसी शायरी के शिकार हुए थे उनके भूतपूर्व प्रेमी और वर्तमान पति प्रीतम जी। उनका पंगा भी शायरी में ही हुआ करता एक बार तो टेलिफोन पर उन्होंने अपनी भैंस ‘चांदी को पति देव द्वारा भैंस कहे जाने पर गुस्सा होकर खरी खोटी भी सुनाई थी। वो भी शायरी में-
भरी धूप में चमचम चमके,
दूध दही की ऐश, वो ‘चांदी हैं,
भैंस कहा तो फाइन लूंगी कैश।
तब से बेचारे की हिम्मत न पड़ी भैंस को भैंस कहने की।
बस ये शायरी का हुनर ही उन्हें अपने पतिदेव की दुलहिन बना गया और वो मोबाइल में खाली समय में बड़े-बड़े कवि सम्मेलन देखती और कल्पना करती। खुद को स्टेज पर खड़े होकर कविता पढ़ने की और उन्हें देखकर सामने बैठी ताली बजाती भीड़ की। कभी-कभी उनके पतिदेव किसी छोटे से अखबार में पैसे देकर उनकी ऊलजलूल कविता को छपवा भी देते। अब उन पर अंतरराष्ट्रीय कवियत्री बनने का भूत सवार हो गया। इधर-उधर की कविताओं-कहानियों को जोड़कर कभी प्रसिद्ध लोगों की कुछ पंक्तियों को मिला-जुलाकर उन्होंने अपना लेखन आरम्भ किया।
अब गांव की सहेलियों और उनके देवरों, जीजाओं के नाता खत्म कर देने के डर से कमेन्ट्स भी आने लगे। अब धन्नो को सुझाव मिला कि आगे बढ़ो और थोड़ा बहुत कवियित्री की तरह रहा करो वीडियो शिडियो बनाओ और अपना कुछ तड़कता- भड़कता सा नाम रखो, लेखिका वाला। उन्होंने उस पर भी काम शुरू किया धन्नो से धानी बन गई और साहित्यिक नाम रखा खुदरंग क्योंकि अपने ही रंग में डूबी हुई थीं। अब अपनी सहेलियों के सुझाव पर वीडियो बनाने लगीं।
अब उनके पास बहुत कमेन्ट्स की बाढ़ आने लगी पर आमदनी के लिए उन्हें वायरल होने के साथ अच्छे वीडियो का सुझाव मिला मोहल्ले के एडिटर से, ताकि उनका लिखा प्रसिद्ध हो। पर…, भाभी जी खर्चा करो सुन्दर चेहरे फेमस और वायरल होते हैं। तब आपको शॉल और लाखों रुपये के लिफाफे मिलेंगे। याद रखिये पहले लगाने पड़ते हैं पैसे तब कुछ मिलता है।
अब धन्नो का सारा ध्यान साहित्य से हट कर वीडियो पर केंद्रित हो गया। उन्होंने शादी में मिले पैसों को बैंक से निकालकर करियर की सोची। वायरल होने लायक होने के लिए खुद पर खर्च करना जरूरी है ये सोच पहले, उसके स्टैंडर्ड के कपड़े खरीदे फिर उनके सुझाव पर ब्यूटी पार्लर भी गयी सजने के लिए। सबसे पहले तो ब्यूटीशियन द्वारा उनकी बुराई हुई अपने प्रति इतनी ज्यादा लापरवाही बरतने के लिए। फिर उनका नख-शिख की केयर की लिस्ट बनी थोड़े खर्चे की सोच कर गयीं थी पर अपनी बुराई सुन जोश में भर गयीं। वायरल होने के वीडियो की सफलता के लिए उन्हें बड़े से बड़ा त्याग मंजूर था। सो सबसे पहले उनकी ब्यूटीशियन ने उनके बालों की कुर्बानी ली, वो चीत्कार कर उठीं।
‘हाय दईया, हमारी चांदी की पूंछ और हमारे चोटी एक सी थी लम्बाई और मोटाई में, तुमने हमाये बालन को ऐसे कुतर डारो, जैसे बकरियां की पूंछ। अब उसने उन्हें ढांढस बंधाते हुए एक्सटेंशन का सुझाव दिया तब कुछ चुप हुईं। फिर बारी आई मेकअप की, बिल देखकर उन्हें चक्कर आने लगे, किसी तरह रिकॉडग स्टूडियो तक पहुंची और रिकॉॄडग भी हो गयी। खूब वीडियो पोस्ट किए गए प्रतियोगिता में। उन्हें एक ग्रुप से भाग लेने का न्योता भी मिला।
इतने खर्च और कुर्बानी के बाद उन्हें बड़ी आस थी ईनाम और पत्र पत्रिकाओं में अपने नाम की पर जब कोरियर वाले ने पैकेट दिया तो उन्होंने उसे ईनाम दिया और पैकेट खोलने तक रुकने को कहा। जब उन्हें उसमें मात्र सहभागिता का प्रमाणपत्र और एक सौ एक रुपये की चेक मिली। तो खर्चे की लिस्ट और ईनाम के सदमें से उनकी चीख ही निकल गयी। क्या कहूंगी, क्या जवाब दूंगी प्रीतम जी को और जो गिरीं तो जुबां न खुली तब से। तब तक गैलरी में कुछ शोर सुनाई पड़ा एक घायल आदमी दूसरे को चिल्लाकर अपने संपादक होने और उसके कारनामे अखबार में छापने की धमकी दे रहा था।
संपादक, अखबार और छापने ये तीन शब्द उनके कानों में ऐसे पड़े जैसे मुर्दे के मुंह में संजीवनी बूटी और वो जोर से चीखीं नहीं…। प्रीतम खुशी से उनकी आवाज सुन कर झूम उठे और धन्नो अपनी बर्बादी की दास्तान सुना रोने लगीं। चक्कर तो प्रीतम को भी आया, फिर समझा कर बोले, ‘ऐ लो हमारी धन्नो जी को छपास का रोग लग गया था। और हम इतना खर्चा कर डाले। तुम ठीक रहो पैसे की कोई बात नहीं करो, पर बात हमारी भी सुन लो वायरल होने के लिए अपने काम में मन लगायो अगर इतना ध्यान खर्चे के बजाय लिखने देतीं तो दु:ख न पातीं।
हां प्रीतम जी, हम समझ गए हैं कि वायरल होने की सनक में हमने आपको कितना चूना लगाया।
धन्नो तुम्हारी तारीफ सब जन कर तो रहे थे, तुम काहे इधर-उधर की बातों में पड़ गयी, प्रीतम ने कहा। धन्नो अपने पैर के अंगूठे की तरफ देखती रहीं, फिर प्रीतम को कुछ याद आया उसने अपने बैग से सुबह वाला पैकेट निकाल कर जैसे ही दिखाया। धन्नो फिर से गश खा कर बिस्तर पर गिर पड़ीं। प्रीतम की चीख सुन नर्स ने जैसे ही डॉक्टर को इंजेक्शन देने को बुलाया। डॉक्टर ने धन्नो का हाल सुन जैसे ही रोग की जड़ जानने को सीटी स्कैन की सलाह दी। प्रीतम दु:खी स्वर में बोले डिस्चार्ज कीजिये इसे वायरल होने की ललक है और कुछ नहीं।
