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और प्यार हो गया – गृहलक्ष्मी कहानियां

सुनीता पिछले कुछ दिनों से कुछ अलग सा महसूस कर रही थी।कुछ अजीब सा जो उसे आज तक नहीं हुआ। बत्तीस साल की शादी शुदा ज़िन्दगी में आज तक ऐसा कभी महसूस नहीं किया उसने। अगर कभी दिल में ऐसा कोई एक तरफा ज्वार उठा भी तो उसने उसको अपने अंदर ही दबा दिया।

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हां, यही प्यार है – गृहलक्ष्मी कहानियां

बहुत दिनों बाद अपने चाचा को घर आया देखकर शुभिका की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। उन्हें पानी का गिलास हाथ में पकड़ाते हुए वो बोली एक ही शहर में रहते हुए भी इतने महीने में आ रहे हैं आप और आज भी चाचीजी को अपने साथ नहीं लाये। यह सुनकर उसके चाचाजी बोले मैं तो तेरी चाची से कह-कहकर थक गया पर वह यहां आने को तैयार ही नहीं हुई। अब वह बिल्कुल बदल गई है। मैं तो बहुत परेशान आ गया हूं।कितने ही डाॅक्टर्स को दिखा चुका हूं।

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मोक्ष – गृहलक्ष्मी लघुकथा

21.09.2017 आज न जाने ऐसा क्या हुआ जब से उसे पढ़ाने बैठा तो पढ़ाने में मन नहीं लग रहा था। हर क्षण यही मन होता उसके रूप-सौंदर्य का पान करता रहूँ… मेरी यह स्थिति देखकर उसने मुझे टोका, – ‘सर! लगता है आज आपका मूड ठीक नहीं है… तो आज छोड़ दीजिए..,’

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सोने के अंडे देने वाली हंसिनी – ईसप की प्रेरक कहानियाँ

एक किसान के खेत के पास ही एक हंसिनी भी रहती थी। एक बार वह किसान घूमता-घूमता हंसिनी का घोंसला देखने गया, तो उसे वहाँ एक अंडा दिखाई दिया, पर वह कोई मामूली अंडा न होकर सोने का था। यह देखकर किसान की खुशी का ठिकाना न रहा। अब तो किसान अक्सर उस हंसिनी के […]

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झगड़ा गधे की छाया का – ईसप की रोचक कहानियाँ

एक बार की बात है, एथेंस में एक युवक ने कहीं जाने के लिए एक गधा किराए पर लिया। गधे का मालिक भी साथ-साथ गया। उस दिन बड़ी भीषण गरमी थी। युवक ने सोचा, थोड़ी देर गधे की छाया में लेटकर आराम करना चाहिए। उसने चादर बिछाई और जमीन पर जहाँ गधे की छाया पड़ […]

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बुलंद हौंसले – गृहलक्ष्मी कहानियां

अजय के बारहवीं का रिजल्ट आया था ,उसने टॉप किया था, अच्छे कॉलेज की भागमभाग में घुस गया था अजय। उसकी माँ पिताजी का बस एक ही सपना था , मेरा अजय, मेरा लाल डॉक्टर बनेगा।मेडिकल एंट्रेंस के रिजल्ट की घोषित होने की बारी आई आज ।

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किराए की कोख – गृहलक्ष्मी कहानियां

अस्पताल का गलियारा गर्भवती महिलाओं से भरा था।ब्लीच की पूरी गंध मुझे असहज महसूस करा रही थी।

डॉ अनीता वर्मा ने अपने केबिन में प्रवेश किया।मैं एक नियमित जांच के लिए उनके पीछे कैबिन मे गई।

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उम्मीद की एक नई सुबह – गृहलक्ष्मी कहानियां

मुझे एहसास हुआ कि मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई है। मैंने अंजलि को अनब्लॉक किया और मैसेज कर बात करने की कोशिश की। पर कोई रेस्पॉन्स न पा कर उसे फोन करने की हिम्मत नहीं हुई। मैं समझ गया कि देर हो चुकी है। मैं माथा पकड़ कर बैठ गया। मेरी उम्मीद का सूरज डूब चुका था।

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पिघलते बर्फ – गृहलक्ष्मी कहानियां

जिम्मेदारियों ने कब शैली की जिंदगी को बर्फ सा बेजान बना दिया, उसे पता ही नहीं चला। लेकिन अचानक उसकी जिंदगी का मौसम बदला और मन पर जमी बर्फ की परतें पिघलने लगी।

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एक नई शुरुआत – गृहलक्ष्मी कहानियां

पापा का स्वेटर और शाल उसकी ताकत बन गए थे। पापा के पास होने का अहसास उसके मन में अजीब सी शक्ति और जीवन भर गया था और वो धीमे से मुस्कुराते हुए भीगी पलकें लेकर ना जाने कब सो गया। आनेवाली सुबह निश्चिन्त ही उसके लिए नयी सुबह होने वाली थी…

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