एक बार की बात है, एथेंस में एक युवक ने कहीं जाने के लिए एक गधा किराए पर लिया। गधे का मालिक भी साथ-साथ गया। उस दिन बड़ी भीषण गरमी थी। युवक ने सोचा, थोड़ी देर गधे की छाया में लेटकर आराम करना चाहिए। उसने चादर बिछाई और जमीन पर जहाँ गधे की छाया पड़ रही थी, वहाँ लेटकर आराम करने लगा।

थोड़ी देर में गधे के मालिक ने आकर कहा, “इस छाया में तो मैं भी लेगा।” युवक ने ऐतराज करते हुए कहा, “लेकिन मैंने गधा किराए पर लिया है, तो छाया भी मेरी हुई। तुम यहाँ क्यों लेट रहे हो?”

मालिक ने कहा, “तुमने किराया गधे पर सवारी का दिया है, छाया का तो नहीं दिया इसलिए गधे की छाया पर मेरा हक है।”

इस बात पर दोनों जोर-जोर से लड़ने लगे। इससे घबराकर वह गधा न जाने कब वहाँ से भाग खड़ा हुआ।

थोड़ी देर बाद उन्होंने देखा कि गधा तो यहाँ है ही नहीं, जिसकी छाया को लेकर वे झगड़ रहे हैं। अब तो दोनों की हालत देखने लायक थी।

सीखः झगड़े से किसी को फायदा नहीं होता।

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