एक किसान के खेत के पास ही एक हंसिनी भी रहती थी। एक बार वह किसान घूमता-घूमता हंसिनी का घोंसला देखने गया, तो उसे वहाँ एक अंडा दिखाई दिया, पर वह कोई मामूली अंडा न होकर सोने का था। यह देखकर किसान की खुशी का ठिकाना न रहा।

अब तो किसान अक्सर उस हंसिनी के घोंसले के पास जाता और हर बार उसे वहाँ एक सोने का अंडा रखा हुआ मिलता। किसान उसे लेकर घर आ जाता। होते-होते उसके पास बहुत से सोने के अंडे हो गए। उन्हें बेचने से बहुत धन मिला और किसान खासा अमीर हो गया। उसने अच्छा घर बनवा लिया और बड़े ठाट से रहने लगा, लेकिन जैसे-जैसे पैसा बढ़ा, किसान लालची होता गया। उसने सोचा, “यह हंसिनी रोज मुझे सोने का अंडा देती है। अगर मैं इसे मार दूँ तो मुझे बहुत सारे सोने के अंडे एक साथ मिल जाएँगे। बस, फिर तो मेरे जैसा अमीर आदमी आस-पास कोई न होगा।”

किसान ने ऐसा ही किया। उसने उस हंसिनी को मार डाला, लेकिन उसे मारने पर एक भी सोने का अंडा नहीं मिला। उलटा सोने का अंडे देने वाली वह हंसिनी अब हमेशा के लिए उसके हाथ से निकल गई थी। 

सीख : ज्यादा लालच आदमी को अंधा कर देता है।

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