कथा-कहानी

अजय का दूसरे ही नम्बर पर नाम था।नाम देखते ही माता पिता जी झूमने लगे, नाचने लगे, मेरा बेटा डॉक्टर बनेगा, मेरा अजय डॉक्टर बन गया, पिताजी को तो मानो ऐसा लगने लगा जैसे अजय डॉ अजय आज ही बन गया है पर कहते हैं न कि विधि का विधान कोई नहीं पलट सकता है और अगले दिन ही अजय के पिताजी को  अजीब सी घबराहट होने लगी और अचानक अस्पताल जाकर पता चला कि कैंसर लास्ट स्टेज पर है। उस बात से  पूरा घर हिल सा गया कि अचानक खुशी के माहौल में ये क्या हो गया ,अजय के पिताजी पंद्रह दिन तक हॉस्पिटल में भर्ती रहे और सोलहवें दिन सबको छोड़ कर दुनिया से अलविदा कर गए ।

अजय के पिताजी एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। जितना पैसा उन्होंने अजय को डॉक्टर बनाने के लिए जोड़ा था वो सारा पैसा तो अजय ने खुद ही अपने पिताजी को ठीक करने के लिए डॉक्टरों को दे दिया। जिंदगी ने ये क्या दिन दिखाना शुरू किया , दोनों की समझ से परे था। अचानक क्या होने वाला था और क्या हो गया! अजय को अपने डॉक्टर बनने की उम्मीद एकदम शून्य सी लगने लगी थी पर एक दिन उसकी मां ने उससे कहा कि अजय तुम्हारे पिताजी की अंतिम इच्छा को पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता है । जब तक हम नहीं चाहेंगे दुनिया में कोई हमें रोक नहीं सकता बेटा ।हां ये परिस्थितियां जरुर  विपरीत हैं  लेकिन मैं और तुम एक दूसरे से ये वादा करेंगे आज कि हम दोनों ही कभी हार नही  मानेंगे। अगर किस्मत से और ऊपर वाले से हार गए तब बात कुछ और है लेकिन हम इतनी मेहनत करेंगे कि किस्मत को भी हराने की पूरी कोशिश करेंगे,जीवन में उतार चढ़ाव तो आते रहेंगे लेकिन हार मान कर बैठ जाना कायरता है, इसलिए मैं और तुम हार नहीं मानेंगे ।अजय की मां ने कहा,’ बेटा पास में एक सोसाइटी है। वहां मुझे कुछ घरों में खाना बनाने की नौकरी मिल गयी है ।कल से मै काम पर जाउंगी और तुम्हारे एडमिशन में अभी तीन से चार महीने बाकी है, पैसा जोड़ लूँगी ।तभी अजय गुस्से में बोला,’ माँ आप ये काम नहीं करोगी, बिल्कुल भी नहींला’ पर माँ ने कहा ,’अजय मैं कोई जिंदगी भर ये काम नहीं करूंगी ।जैसे ही तुम किसी अच्छे हॉस्पिटल में डॉक्टर बन जाओगे मैं एक डॉक्टर की माँ बनकर अपना रुतबा दिखाउंगी और कुछ साल की बात है, तुम मुझे रोकोगे नहीं।’

अजय ने भी तीन महीने के लिए एक जगह नौकरी कर ली और घर पर कोचिंग लेने लगा। कुछ रिश्तेदारों की मदद से लोन भी मिल गया और  टॉप मेें नाम होने से स्कॉलरशिप  भी मिल गयी । उसका मेडिकल में एडमिशन हो गया।  अजय  की मांं एक डॉक्टर के यहां भी खाना बनाती हैंं। वो डॉक्टर भी अजय के लिये भगवान का रूप लेकर आये थे और उन्होंने पढ़ाई और किताबों से लेकर हर संभव मदद की अजय की और इस तरह दोनों की मेहनत और हिम्मत रंग लाई और उन्हें कोई भी कहीं रोक नहीं पाया । दोंनो बढ़ते ही चले गए। आज एक बहुत बड़ा फंक्शन है जहां सभी अच्छे डॉक्टर्स को सम्मानित किया जा रहा है और वही डॉक्टर साहब जिनके यहां अजय की मां कभी कुक हुआ करती थीं वो सम्मानित कर रहे हैं अजय और उसकी मां को क्योंकि वो खुद एक बहुत बड़े डॉक्टर थे, इसलिए सम्मान पत्र उनके द्वारा ही दिलाये जा रहे थे । इतेफाक से उन्होंने दोनों मां बेटे के हौंसले को देखा था और आज डॉक्टर साहब ने अजय के साथ – साथ उसकी माँ को भी स्टेज पर बुलाया औऱ सम्मानित किया क्योंकि हर इंसान इतना मजबूत नहीं हो पाता जब वो बुरे दौर से गुजर रहा होता है, पर अजय की माँ न खुद झुकी और न बेटे को कभी झुकने दिया ।ईमानदारी के साथ पैसा कमाया और बेटे को डॉक्टर बनाया।आज अजय डॉक्टर है और माँ अब डॉक्टर की माँ के रुतबे के साथ जीती है

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