कान उल्टे ढोलों की आवाज से सुन्न पड़ गए थे। वो ऑंखें हमेशा के लिए बंद हो चुकी थी। सारा दोष तो आखिर इन्हीं ऑंखों का था। अब खुली ऑंखों के अन्दर बन्द ऑंखें समा गई थी।
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दुखिया सब संसार
पुजारी जी भले ही अपनी कालोनी में सम्मानित वृद्ध थे, पर उनके घर में उनसे भी यही उम्मीद की जाती थी कि वे अपनी शक्ल ज्यादातर बाहर वालों को दिखाएं और धर्मशाला की भांति सिर्फ रात्रि-शयन के लिए घर पर आएं।
अधूरा इंसाफ
वे प्रेमी -प्रेमिका थे। उनमें वादे थे, इच्छाएं थीं, बरसों से एकत्रित वाष्प थी। अगर यह चरित्र हीनता है तो इस चरित्रहीनता के एक पहलू पर सीमा थी और दूसरे पर रामेन्द्र। भाभी अगर यह कहती कि मेरे घर ना तुम आना और न सीमा को लाना, मगर भाभी ने सिर्फ सीमा को दोषी ठहरा कर फैसला सुनाया। उसे लगा कि यह अधूरा इंसाफ है।
गृहलक्ष्मी की कहानियां : सच्ची सगाई
जिन शिखा दीदी को खुशी बरसों से यादों में बसाए हुए थी, उनकी आवाज सुनते ही खुशी की खुशी का पारावार नहीं रहा…उसे लगा कि आज हुई है उसकी सच्ची सगाई ।
बहुरूपिया
शैलजा के प्यार में बेइंतहा पागल आकाश, शैलजा से शादी करना चाहता था। पर शैलजा ने उसके प्यार को हर मोड़ पर इस तरह इस्तेमाल किया कि उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा था और आखिरकार उसे बनना पड़ा बहुरूपिया…
रकीब
सज्जाद अली के दिमाग पर से जैसे पिछले पैंतीस सालों की यादों की गर्द साफ हो गई और उन्हें सब कुछ समझ आ गया।
प्रेम गली अति सांकरी
उनके बीच सिर्फ प्यार ही सच था। पिछले घंटों के मान-अभिमान पानी के बुलबुलों की तरह बुझ गए थे। प्रेम गली अति सांकरी जामें दुई न समाएं। इसका अर्थ केवल अध्यात्म या रहस्यवाद तक ही सीमित नहीं, लौकिक जगत में भी उतना ही है। अहं के साथ प्रेम नहीं होता। प्रेम के लिए अहं की तिलांजलि देनी पड़ती है।
गृहलक्ष्मी की कहानियां – इंगेजमेन्ट-रिंग
प्रमदा तो शांतनु के साथ अपनी इंगेजमेंट रिंग पसंद करने गई थी। उसे क्या पता था कि इंगेजमेंट रिंग के बहाने इतने पुराने रिश्ते-नातों के साथ-साथ उसे अपनी एक छोटी बहन भी मिल जाएगी।
जज़्बा
राधिका को क्या पता था कि एक दिन यह नौबत आ जाएगी। जिस बेटी को पद्मा ने बोझ मानकर पैदा होते ही त्याग दिया था, आज एक मुकाम पर पहुंच चुकी थी। जिया ने उन्हें अपना रोल मॉडल माना था, वो उन्हीं से ट्राफी लेना चाहती
थी। क्या अपनी मां से अनजान बेटी उन्हें माफ कर सकेगी?
दो चिडिय़ा – गृहलक्ष्मी कहानियां
इस स्तंभ के अंतर्गत 12 वर्ष तक की उम्र के बच्चे अपनी कोई भी कविता, कहानी, पेंटिंग व बचपन की रचनात्मक फोटो या अपने मन की कोई और बात अभिव्यक्त करना चाहते हैं तो हमें लिख भेजें, नाम, उम्र, पता व फोटो के साथ। आपकी कृति कहीं से नकल की गई ना हो, इस बात का खास ख्याल रखें। चुनी गई तीन प्रविष्ठियों को मिलेगा आकर्षक उपहार।
