Shirdi: ‘शिरडी की पावन भूमि पर पाँव रखेगा जो भी कोई, तत्क्षण मिट जाएँगे कष्ट उसके,हो जो भी कोई’। शिरडी के साई बाबा का मंदिर विश्वभर में प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। सांई बाबा ने अपनी जिंदगी में समाज को दो अहम संदेश दिए हैं- ‘सबका मालिक एक’ और ‘श्रद्धा और सबूरी’। यदि बाबा के तमाम चमत्कारों […]
Tag: Sai baba
Sai baba shirdi साईं बाबा की समाधि से जुड़ी विशेष बातें, दशहरे के दिन ही क्यों ली समाधि
Sai baba shirdi साईं बाबा के अनमोल वचन लोगों के लिए एक मार्गदर्शन है। दरअसल, साईं बाबा किसी धर्म का नहीं बल्कि अनमोल विचारों का प्रचार करते थे। उनकी महिमा का गुणगान हर ओर है। वे जीवनभर अच्छाई के राह पर चलने के लिए प्रेरित करते रहे और सबका मालिक एक जैसे वचन से लोगों […]
Sai Baba of Shirdi : अपनी मृत्यु को भी पहचान गए थे साईं बाबा
Sai Baba of Shirdi : साईं बाबा का नाम कौन नहीं जानता है? ऐसे इंसान, जिनको भगवान का दर्जा मिला, जीते-जी भी और मृत्यु के बाद भी। उनकी मृत्यु के अब करीब 90 साल से भी ज्यादा हो चुके हैं लेकिन पीढ़ी दर पीढ़ी लोग उनको पूजते आ रहे हैं। लोगों के दिल से आस्था […]
साईं के बारे में ये चार बातें,आपको बना देंगी उनका भक्त
ये तीन बातें ऐसी हैं जो इंसान को इंसान बने रहने देती हैं। और यही बातें साईं में आस्था भी बढ़ा देती हैं।
साईं ने किए हैं ढेरों चमत्कार, यूं ही नहीं मानते लोग उनको भगवान
साईं के भक्तों की तादाद यूंहीं अनगिनत नहीं है, उनके चमत्कारों को जानने के बाद कोई भी उनका भक्त बन ही जाएगा।
सबका मालिक एक है, कब कहा था साईं बाबा ने
सबका मालिक एक है कहने वाले साईं बाबा ने ऐसा क्यों कहा था जान लीजिए-
क्रांति के असल मायने बताएं हैं साईं बाबा ने
क्रांति के असल मायने बताएं हैं साईं बाबा ने
साईं बाबा ने बताया है ईश्वर के करीब जाने का रास्ता
साईं खुद एक दिशा की तरह हैं, जो हमेशा बेहतरीन मंजिल तक ले जाती है। उन्होंने ईश्वर के करीब जाने का रास्ता भी सुझाया है।
साईं बाबा खुद हैं भगवान राम की भक्ति में लीन
श्रीराम के चरणों पर बैठी हुई साईं बाबा की मूर्ति देखनी हो तो आपको इंदौर आना होगा। ये अनोखा मंदिर 30 साल पहले बनवाया गया था।
90 साल पहले लिखी गई थी साईं सत्चरित्र, दर्ज है साईं बाबा की हर बात
साईं सत्चरित्र एक ऐसी किताब है, जो साईं बाबा से जुड़े असल किस्से और कहानी बयां करती है। इस किताब को उनके एक भक्त गोविंद रघुनाथ दाभोलकर उर्फ हेमाद्पंत ने लिखा था।
