सूरज क्षितिज से मुलाकात के लिए चल पड़ा है। पवन भी उसके साथ है। पंछी की आवाजें कुछ मदधिम पड़ने लगी है। सांझ फैलने लगी है। बच्चे मैदान में खेल रहे हैं। महिलाएं टोलियों में सैर कर रही हैं। इतनी सारी गतिविधियों के बीच बांसुरी की तान वातावरण में सुगंध की तरह तिर रही है। […]
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गृहलक्ष्मी की कहानियां : अपनी- अपनी सोच
रितु से मोबाइल से सम्बंधित ढेर सारी जानकारी हासिल करते हुए ना तो उन्हें किसी कमतरी का अहसास हुआ और ना ही उनका अहं आहत हुआ…
हौसले की उड़ान
बिहार के वैशाली जिले के उस छोटे से कस्बे में आज जश्न का माहौल है। हर कोई उमंग में डुबा हुआ है, और हो भी क्यों नए आखिर एक स्कूल मास्टर की बेटी का भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन जो हुआ है। दीनदयाल सिंंह जी की इकलौती बेटी प्रतिभा ने अपनी अटूट मेहनत और लगन […]
नैना फिर से जी उठी…
नैना परिवार में दूसरी बेटी थी। उसकी बड़ी बहन सीमा उससे उम्र में पांच साल बड़ी थी। वह बहुत ही सुंदर और होशियार थी। उसके जन्म पर उसकी मां को कोई ख़ुशी नहीं हुई थी बल्कि वह एक और बेटी आ जाने से बहुत निराश हो गयी थी। यही कारण था कि बचपन से ही उसे […]
एक नया संकल्प – गृहलक्ष्मी कहानियां
लाख कोशिशों के बाद भी माधवी स्वयं को संयत नहीं कर पा रही थी, मन की उद्विग्नता चरम पर थी। जाते हुए जेठ की प्रचण्ड तपन लहुलुहान मन की पीड़ा से एकाकार होकर जैसे आज जीते जी उसे जला देना चाहते थे। शाम के सात बजने वाले थे, पर दिशाओं में हल्की उजास अब तक कायम थी, यह उजास जैसे माधवी की आंखों में, तन बदन में शोलों की तरह चुभने लगा। वह छुप जाना चाहती थी, अंधेरे में कहीं गुम हो जाना चाहती थी, घर परिवार समाज सबकी नज़रों से दूर, यहां तक कि अपने आप से भी दूर .. बहुत दूर कहीं ओझल हो जाना चाहती थी।
गृहलक्ष्मी की कहानियां : सन्धि वार्ता
गृहलक्ष्मी की कहानियां : टिफिन बन गया कि नहीं ? मुझे देर हो रही है।” राजाराम ने चिल्लाकर राजरानी से कहा। उधर से कोई जवाब नहीं आया। राजाराम अंदर देखने गया राजरानी बिस्तर पर लेटी थी। इसका मतलब था, आज भी खाना नहीं बनेगा। महाभारत की रचना शुरू हो चुकी थी। महारानी लेटी पड़ी है […]
कपूत – गृहलक्ष्मी कहानियां
‘‘सर यहां पर झांसी से कोई वर्मा सर हैं क्या? उनके घर से अर्जेंन्ट फोन आया है कोई सीरियस है, कह दें अविलम्ब घर से सम्पर्क करें। एक व्यक्ति मैसेज देकर चला गया। फाइवर ग्लास वर्किंग पर एक वर्कशाप का आयोजन केन्द्रीय विद्यालय नं. 1 कैन्ट नई दिल्ली में किया गया था।
गृहलक्ष्मी की कहानियां – दिल की जीत
श्रेया का बार-बार शादी करने को लेकर इंकार करना, उसके मम्मी-पापा को परेशान कर रहा था, वो श्रेया की नहीं का कारण जानना चाहते थे लेकिन जान नहीं पा रहे थे।
आकांक्षाएं और अनुभूति
राधिका भीगी आवाज में कहती है- लो मां, फीता खोलो………. उद्घाटन करो। आज आपका व अंकल का स्वप्न पूरा होने जा रहा है। मां नम आखों से फीता खोलकर अनुभूति अस्पताल का उद्घाटन करती है। पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज जाता है। पूरे गांव में अपार हर्ष है। अब अपने गांव में कोई गरीब बिना दवा […]
रिश्तों का ताना-बाना
क्या मां आपको तो मेरी हर बात बकवास ही लगती है, शोभित ने नाराज़गी के साथ शोभा से कहा। बकवास नहीं तो क्या। कहने से पहले सोचा तो करो कि क्या कह रहे हो और क्यों, उसने बेटे से कहा। आप कब समझोगी कि मैं बच्चा नहीं रहा, शोभित ने जवाब दिया। बच्चे नहीं हो, […]
