‘आज फिर से बगल वालों की सारी बातें बता रही थी वो।हमारे घर की बातें भी वहां जरूर बताती होगी।’ मेघा अपनी बाई की बातें कर रही हैं। वो ना चाहते हुए भी बिल्डिंग की पॉलिटिक्स से जुड़ गईं हैं तो वजह ये बाई ही है। अब तो मेघा को लगता है कि बाई लगवानी ही नहीं चाहिए। क्योंकि ये तो एक घर की बात दूसरे घर में कहेंगी ही। मेघा अकेली नहीं हैं, जो बाई के गॉसिप करने की आदत से परेशान हैं, बल्कि ये तकरीबन हर घर की परेशानी है। मगर इस परेशानी का हल भी है। थोड़ी चतुराई और समझदारी आपको बाई की इन आदतों से बचा सकती हैं। मतलब बाई को कुछ टिप्स के सहारे सुधारा जा सकता है। कौन से हैं ये टिप्स जान लीजिए-
उसकी आदत है-
बातें इधर से उधर करने की आदत हर बाई की होती ही है। कह सकते हैं कि ये सर्वविदित है कि बाई एक घर की बातें दूसरे घर में करेगी ही। हालांकि अपवाद भी होते हैं। अब क्योंकि वो आपके परिवार का हिस्सा नहीं है इसलिए उनको सुधारने की जिम्मेदारी आप नहीं ले सकती हैं। आपको उनकी इस आदत को हैंडल करना ही पड़ेगा। ये बात सही है कि उनको टोका जा सकता है और कह सकते हैं कि कम से कम मेरे घर की बातें कहीं मत कहना। लेकिन अगर आप सोच रही हैं कि ऐसा करके आप उसे बदल लेंगी तो ये गलत है। बाई जिस भी घर में काम करती हैं, वो उसका घर नहीं होता है इसलिए उससे उस घर की छवि बना कर रखने की अपेक्षा की भी नहीं जानी चाहिए। 
हटाना नहीं है विकल्प-
बाई को टोका जाना विकल्प है लेकिन उसे नौकरी से निकाल देना बिलकुल भी विकल्प नहीं है। क्योंकि नई बाई ये काम नहीं करेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसलिए उसको बार-बार अपनी बातें कहीं न बताने का कहना ही ठीक रहेगा। उन्हें इंसानियत समझाइए, हो सकता है कि वो आपकी बात समझें। 
उसके सामने सब चुप-
बाई जब घर में हो तो कोशिश करें कि घर की बातें उसके सामने बिलकुल न कहें। ये बात पूरे परिवार को समझा दी जाएं ये भी जरूरी है। पूरा परिवार कोशिश करे कि बाई के आते ही बस जरूरत भर की बातें की जाएं। हालांकि ये बात भी सही है कि बाई को अगर गॉसिप करना है तो वो इन हल्की-फुलकी बातों को भी गॉसिप का ही हिस्सा बना देगी। लेकिन फिर भी परिवार की बड़ी बातें तो किसी बाहर वाले के कानों में नहीं पड़ेगी। 
भावनात्मक हो लें-
बाई हो सकता है आपके घर में लंबे समय से काम कर रही हो। ऐसा कई घरों में होता है कि बाई 2 पीढ़ियों को तो देख ही लेती है। अब ऐसी बाई अगर आपके घर की बातें दूसरे के यहां बता रही है तो आप उसे भावनाओं के एंगल से भी समझाइए। उसे कहिए कि अगर इतने दिन बाद भी तुम ऐसा करोगी तो फिर हम तो किसी पर भरोसा कर ही नहीं पाएंगे।