‘फिर ले कर आ गई पूरी पलटन’ मिसेज शर्मा को आज फिर से अपनी बाई पर बहुत गुस्सा आ गया है. वो आज फिर से अपने किसी रिश्तेदार को काम पर साथ लेकर आई है. मिसेज शर्मा को बाई की ये आदत अब बिलकुल अच्छी नहीं लगती है. वो इस बात से बहुत परेशान हैं लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था. पहले बाई ऐसा नहीं करती थी या फिर साल में एक या दो बार ही ऐसा होता था. बाद में वो घर में पारिवारिक तौर पर जुड़ती गई और फिर उसने संकोच पूरी तरह छोड़ ही दिया है. और यही सब मिसेज शर्मा की परेशानी बन गया है. अब उन्हें बाई के साथ आए और गेट पर बैठे रिश्तेदार परेशानी लगते हैं. ये परेशानी क्यों है और इससे कैसे बच सकते हैं जान लीजिए-
परेशानी क्यों है?
आप हर किसी शख्स को अपने घर बुलाकर नही बैठा सकती हैं. सुरक्षा के नजरिए से बाई की ये आदत बिलकुल भी सही नहीं है. दूसरा आया शख्स कितना ईमानदार है और वो घर में आकर क्या देख रहा है, ये समझना मुश्किल है. हो सकता है वो घर में आने का जरिया तलाश रहा हो या लूट की प्लानिंग ही हो रही हो. हां, ये बहुत आगे की बातें हैं और ऐसा अक्सर होता भी नहीं है. लेकिन सम्भावना तो हर चीज की है ही. 
ऐतराज जताएं-
जरूरी है कि समय रहते ही बाई को उसकी इस आदत के लिए टोक दिया जाए. मन ही मन में सोचते रहने से अच्छा है कि आप बाई के सामने इस बात को लेकर ऐतराज जता दें. उससे कह दें कि वो किसी को भी साथ में काम पर नहीं ला सकती है. सुरक्षा के नजरिए से ये सही नहीं है और आप इसे बर्दाश्त नहीं करेंगी. 
तुम जिम्मेदार-
बाई को आप ऐसे भी समझा सकती हैं कि अगर परिवार में कुछ ऐसी गलत घटना हुई तो फिर वही इसके लिए जिम्मेदार होगी. देखिएगा वो ये बात सुनते ही खुद को जरूर बदल लेगी. कम से कम अगले कुछ दिन तो वो किसी रिश्तेदार को साथ नहीं लाएगी. 
क्रॉस क्वेश्चन हैं जरूरी-
अगर बाई अभी भी रिश्तेदारों को घर ला रही है तो आपको क्रॉस क्वेश्चन करने होंगे. बाई के साथ तो ऐसा कीजिए ही लेकिन उसके साथ आए रिश्तेदारों से भी क्रॉस क्वेश्चन करना जरूरी है. उनसे घुमाफिरा कर सवाल पूछिए ताकि कोई बात छुपी न रहे और झूठ भी न रहे. इस तरह बाई झूठ बोल भी नहीं पाएगी. वो जितनी बातें बताए उससे उतने ही सवाल पूछ लीजिए.