बाई

बाई का होना किसी भी महिला के लिए कितना जरूरी है, ये तो वही जानती है। लेकिन यही बाई अगर समय पर न आए तो क्या-क्या दिक्कतें होती हैं ये भी घर की महिलाओं से ज्यादा कोई नहीं समझ सकता है। पर अब हमेशा उनके आने और न आने को लेकर परेशान रहने से अच्छा है कि इस समस्या में सुधार किया जाए। बाई की दिक्कत समझी जाए और उसको भी समझाया जाए कि समय पर आने के सिर्फ फायदे हैं। कभी भी किसी भी वक्त काम पर आने या फिर न आने के सिर्फ नुकसान होते हैं। ये सब समझ लेने से उसके लिए और घरों के काम करना भी आसान होगा। बाई अगर समय पर काम पर नहीं आती है तो उसके साथ कैसा हो आपका व्यवहार जान लीजिए, ताकि आप भी समय रहते अपनी बाई की ये आदत सुधार सकें-

 

निश्चित समय पर काम

इस दुनिया में किया जाने वाला कोई भी काम हमेशा समय पर ही किया जाना चाहिए। तब ही उस काम की वैल्यू रह जाती है। अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो उस काम को करने की अहमियत ही नहीं रह जाती है। ठीक यही नियम बाई के काम में भी लागू होता है। अगर बर्तन समय पर नहीं धुलेंगे, अगर खाना समय पर नहीं बनेगा तो फिर इन दोनों कामों को ही करने की कोई अहमियत नहीं है। बाई के कानों में ये बात डाल दीजिए कि आपके लिए काम को समय पर किए जाने की अपनी अलग ही अहमियत है। और आप इसी तरह से काम किया जाना पसंद करती हैं। आप सिर्फ इसी तरह से काम कराएंगी वरना आपको इस उनसे काम कराने में कोई भी रुचि बिलकुल नहीं है। हर काम का सही समय होता है और इसकी अहमियत बाई को समझनी होगी तब ही काम चल पाएगा। 

 

हमें परेशानी

बाई अपने आराम के लिए रखी जाती है ये तो सभी जानते हैं लेकिन इसी वक्त अगर बाई वो आराम नहीं दे रही है तो फिर उसको रखने का क्या मतलब है। यही बात आप बाई से भी कहिए और बता दीजिए कि हमें आराम नहीं मिलेगा तो फिर बाई हटा कर खुद ही काम करेंगे और पूरा परिवार मिलकर काम कर लेगा। समय रहते बाई को इस बात को समझना ही होगा, तब ही बात बनेगी वरना उसकी छुट्टी। 


3
बार, सिर्फ

अपनी बात कहने के बाद आप कब तक बाई के सुधरने का इंतजार करेंगी। सिर्फ 3 बार। जी हां, आपको दिक्कत बताने के बाद 3 बार ही इंतजार करना है और हर बार वार्निंग भी देनी है। फिर इसके बाद बाई को निकलने का अल्टिमेट्म देना है और उसकी छुट्टी करनी है। इसके बाद न आप उसकी सुने ना ही उसके कोई भी बहाने। 

 

रियायत पर हो बात

आपको बाई से रियायत पर भी बात करनी होगी। दरअसल किसी वजह से बाई का देर से आना भी बनता है। मतलब कभी कोई इमर्जेंसी हो सकती है। इसलिए आप उन्हें महीने में कुछ दिन दे सकती हैं। या इसमें भी बारी तय कीजिए कि वो कम से कम कितनी बार ऐसा कर सकती हैं। ये भी सही ना बैठे तो सबसे अच्छा तरीका है कि जब भी देर से आने का मामला बने तो बाई आपको किसी न किसी साधन से बता जरूर दें। इस तरह से आपका खुद काम करना भी आसान हो जाएगा। आप खुद मानसिकतौर पर अपना काम करने के लिए तैयार रहेंगी। 

 

प्रैन्क भी करना होगा

जी हां, प्रैन्क आपको बाई के साथ प्रैन्क भी करना पड़ सकता है। प्रैन्क ऐसा कि उसको करने के बाद बाई को काम हाथ से जाता ही नजर आएगा। आपको करना ये है कि जिस दिन भी बाई देर से आए और आप उसकी आदत से पूरी तरह से परेशान हो चुकी हों तो उसे वापस जाने के लिए कहें। उससे कह दें कि आपने नई बाई लगवा ली है। और अब उसकी आपको कोई जरूरत नहीं है। देखिएगा कैसे बाई को अपनी गलती का एहसास हो जाएगा। यहीं पर वो अगर गलत नहीं होगी तो दुखी होकर आपके घर से जाएगी। आपको उसके हावभाव से असलियत समझनी होगी। और उसी हिसाब से निर्णय भी लेना होगा। बाई के साथ आप क्या निर्णय लेंगी ये इसी पर निर्भर होगा। 

 

समझती हूं दिक्कत

बाई को सिर्फ सख्ती से समय पर आने की बात नहीं बताई जा सकती है। इसके लिए आपको उसकी बातें भी समझनी होंगी और उसे ये बात बतानी भी होंगी कि आप परेशानी समझती हैं। उससे कहिए कि ‘तुम्हें समय पर आने में क्या दिक्कत है बताओ…मैं इसका हल जरूर निकालूंगी’। जब बाई आपके साथ भावनात्मक जुड़ाव महसूस करेगी तो वो आपको आपने दिल का हाल भी बताएगी और कुछ भी हो जाए पर आपके घर का काम नहीं छोड़ेगी। वो कुछ देर से आना तो दूर छुट्टी लेने के बारे में भी शायद ही सोचे। इसकी वजह उसका आपमें सहारा ढूंढ लेना है। वो आपको अपनी हर जरूरत का सहारा मान लेगी, फिर आपको अपना परिवार मानेगी और घर के काम को अपना काम। इस तरह से आपकी समस्या का हल निकल आएगा। 

 

 

ये भी पढ़ें-

किन कारणों से हरिद्वार एक पवित्र नगरी है