काम वाली बाई…मतलब पूरे घर का इंजन। जिसके बिना घर की गाड़ी आगे बढ़ना बहुत मुश्किल होता है। यकीन नहीं होता तो उस दिन की कल्पना भर कीजिए, जब बाई कहती है कि ‘कल नहीं आउंगी’। याद है कैसे दिल मानो बैठ ही जाता है। लगता है बाई के बिना तो काम चलेगा ही नहीं। लेकिन यही बाई जब आपसे हर बात पर या हर कुछ दिन में पैसे मांगती है तो बुरी भी खूब लगती है। लगता है क्यों नहीं ये सुधर जाती। इसको जरूर सिर्फ हमारे पैसों से मतलब है। आपको ऐसा लगता जरूर होगा। अगर ऐसा लगता है तो सोच-सोच कर अपनी सेहत खराब करने से अच्छा है कि बाई की ये आदत ही सुधार ली जाए। इसके लिए आपको क्या-क्या करना होगा, आइए जानें-
बात करना है हल-
सबसे पहला तरीका तो यही है कि बाई से उसकी इस आदत को लेकर बात कर ली जाए। उससे कहा जाए जब तक बहुत जरूरी न हो इस तरह बात-बात पर पैसे मांगना सही नहीं है। अपनी तनख्वाह का इंतजार करने में कोई खराबी नहीं है। उसी तनख़्वाह में काम चला लेना भी अच्छी बात है। जैसे तुम महीने में एक बार मिलने वाली तनख़्वाह में घर चलाती हो, ठीक वैसे ही मैं भी चलाती हूं। अचानक से पैसे मांगना सारी प्लानिंग खराब करता है और अच्छा महसूस भी नहीं होता है। 
परिवार का बजट-
हर परिवार एक बजट में काम करता है। ठीक वैसे ही आपका परिवार भी एक बजट में काम करता है। आप बाई से बताइए कि हर परिवार की तरह आपके यहां भी महीने का बजट तय होता है। और इसी बजट में काम चलाना तब मुश्किल होता है, जब बाई कभी भी पैसे मांग लेती हैं या इस तरह के दूसरे खर्चे अचानक आ जाते हैं। ये खर्चे आपके परिवार के बजट गड़बड़ कर देते हैं। और ये गड़बड़ पूरे महीने चलती है। 
जरूरत है तो-
अगर जरूरत है तो बाई को पैसे देने में कोई खराबी नहीं है। मगर मामला वास्तविक और असल जरूरत से जुड़ा होना चाहिए। जैसे बच्चों की पढ़ाई या परिवार में किसी की बीमारी। ऐसे मुद्दों में तो बाई को पैसे देने में कोई खराब नहीं है। इस वक्त आपको अपने खर्चे कम करने पड़ें तो भी कीजिए लेकिन मामले का निर्णय आपको लेना है। आपको तय करना है कि जरूरत असल है या मामला बहुत हल्का-फुल्का है। 
गुस्सा नहीं-
कभी भी बाई को पैसे देने का निर्णय ले लें तो नाराज होकर पैसे न दें। उसे फिर लगने लगेगा कि थोड़ा डांटती ही तो हैं। फिर पैसे दे ही देती हैं। उसको इस डांट की आदत हो जाएगी और इसका फर्क भी नहीं पड़ेगा। इसलिए अगर पैसे दीजिए तो खुश होकर और सही-गलत का निर्णय लेने के बाद।