बाई काम पर आती रहे, काम अच्छा करे और पैसे बढ़ाने की बात बिलकुल न करे। बस यही तो चाहते हैं हम और आप। मगर ऐसा होता कहां है। पहली दोनों बातों में भले ही संतुष्टि मिल जाए लेकिन पैसों वाले मामले में बाई कभी संतुष्ट होने ही नहीं देती है। बाई को मानो अपने वेतन से कभी संतुष्टि मिलती ही न हो। मगर अक्सर पैसे बढ़ाने की मांग करने वाली बाई को भी सुधारा जा सकता है। बस आपको थोड़ी सूझ-बूझ से काम लेना होगा। और फिर बाई कम से कम हर महीने तो पैसे बढ़ाने की बात नहीं करेगी। 

 

हर हफ्ते एक नया काम- बाई की वेतन बढ़ाने की बात सुन-सुन कर आप परेशान हो गई हैं तो उसे हर हफ्ते एक नया काम देना शुरू कर दीजिए। कम बढ़ता जाएगा तो उसे खराब लगने लगेगा। फिर जिस दिन वो इतने काम की शिकायत करे बस उसी दिन आप भी बार-बार पैसे बढ़ाने की बात उससे कर लीजिए। उससे बता दीजिए कि जैसे हर हफ्ते बढ़ता काम उसे खल रहा है तो हर हफ्ते ‘वेतन बढ़ा दो’ का जुमला कितना खराब लगता होगा। 

साल में एक बार- एक अच्छा तरीका ये है कि आप एक बात पर अटक जाएं कि पैसे साल में एक बार ही बढ़ाए जाएंगे फिर चाहे वो कितना भी बोल ले। ऐसा बाई को काम पर रखते हुए भी कहा जा सकता है। और इस बात से मामला डिगेगा नहीं ये भी बात पक्की कर ली जानी चाहिए। बाई को जब एक बार बता दिया जाएगा तो फिर वो कुछ नहीं बोलेगी। बाई को ये बात याद रखनी होगी। ये भी किया जा सकता है कि काम से हटा देने की बात भी आप नौकरी देने के समय ही कर लें। 

उनके यहां तो इत्ता देते हैं- अक्सर बाई पैसे बढ़ाने की बात करती है तो दूसरे के घर का हाल भी बता है कि ‘फलाने के यहां बाई को इत्ता पैसा देते हैं’। लेकिन इसी वक्त जब वो बाई के एंगल से चीजें बताएं तो आप उसे मालिक के एंगल से चीजें गिना दें। जैसे वहां पर मालकिन हर दूसरी बात पर डांट लगा देती है। या वहां पर बाई को पानी भी नहीं पूछा जाता है। या फिर बहुत जरूरत होने पर भी वहां बाई को छुट्टी नहीं मिलती है। मिलती भी है तो फिर पैसे कट्ते हैं। 

 

 

 

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