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आप इस तकनीक के नाम पर न जाएं, असल में यह आपकी प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने की एक तकनीक है। यह विधि मनोवैज्ञानिक रूप से काम करती है और आपके मानसिक प्रतिरोध को कम करती है। इस विधि को माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के सह संस्थापक और अध्यक्ष बिल गेट्स की देन माना जाता है।
Eat the Frog Concept: आज के समय में हर कोई खुद को काम के बोझ तले दबा हुआ महसूस करता है। महिलाएं भी इससे अछूती नहीं हैं। वहीं वर्किंग वूमन के सामने ता दोहरी जिम्मेदारियों का पहाड़ होता है। काम के ढेर के बीच महिलाएं यह निर्णय ही नहीं कर पाती कि उन्हें क्या काम पहले करना है और क्या बाद में। ऐसे में न तो कोई काम ठीक से हो पाता है और न ही सभी काम पूरे हो पाते हैं। कुल मिलाकर यह कंफ्यूजन आपकी जिंदगी को और उलझा देते हैं। कई बार यह विफलता का कारण भी बन जाते हैं। अगर आप भी इन्हीं उलझनों में फंसी हुई हैं और समय पर कुछ भी नहीं कर पाती तो आप अपना सकती हैं ‘ईट द फ्रॉग’ विधि। क्या है यह विधि और कैसे हुआ इसका आविष्कार आइए जानते हैं।
जानिए क्या है ‘ईट द फ्रॉग’ विधि

आप इस तकनीक के नाम पर न जाएं, असल में यह आपकी प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने की एक तकनीक है। यह विधि मनोवैज्ञानिक रूप से काम करती है और आपके मानसिक प्रतिरोध को कम करती है। इस विधि को माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के सह संस्थापक और अध्यक्ष बिल गेट्स की देन माना जाता है। यह तकनीक आपको आजादी देती है कि आप कैसे कम समय में अपने आप को सही साबित करें और अपने काम को पूरा करें। इसमें आप दिन के सबसे जरूरी काम को सबसे पहले पूरा करने का लक्ष्य बनाएं। क्योंकि इसके पूरे होने की उम्मीद, संभावनाएं और जरूरत सबसे ज्यादा होती है। वहीं जो काम कम जरूरी हैं, उन्हें आप समय लेकर पूरा करें। यह तकनीक मुख्य रूप से आपको टालमटोल और असमंजस से बचाती है। इससे आप अपने समय का सही इस्तेमाल कर पाते हैं। इतना ही नहीं आप अपने सभी काम समय पर पूरे कर लेते हैं।
ऐसी महिलाओं के लिए जरूरी है यह तकनीक
ईट द फ्रॉग विधि कुछ महिलाओं के लिए बहुत काम की है। खासतौर पर ऐसी महिलाओं के लिए जिन्हें काम को टालने की आदत होती है। वे कोई भी काम समय पर पूरा नहीं कर पाती और उसे आगे टालती रहती हैं। कई बार महिलाएं सब कुछ कर लेने के चक्कर में काम तो ढेर सारे कर लेती हैं, लेकिन सबसे जरूरी काम को करना भूल जाती हैं। वहीं कई महिलाएं अपने टारगेट और प्रोडक्टिविटी को समझ नहीं पातीं। ईट द फ्रॉग तकनीक उन्हें काम का सटीक एहसास करवाती है। कुछ महिलाएं समय और काम के बीच तालमेल नहीं बैठा पाती और इस चक्कर में कई परेशानियों का भी सामना करती हैं। ऐसी महिलाओं के लिए भी यह तकनीक बहुत काम आती है। एक टू-डू लिस्ट यानी काम की सूची आपके कार्य को आसान बनाती है। इससे आपका काम पर फोकस बढ़ पाता है।
क्यों जरूरी है इस तकनीक को अपनाना
यह विधि आपके लिए घर और ऑफिस दोनों जगह मददगार होगी। ‘ईट द फ्रॉग’ विधि को लोगों तक पहुंचाने में प्रोडक्टिविटी कंसल्टेंट ब्रायन ट्रेसी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अपनी बुक ‘ईट द फ्रॉग!: 21 ग्रेट वेज टू स्टॉप प्रोक्रेस्टिनेटिंग एंड गेट मोर डन इन लेस टाइम’ में इसे लेकर कई अहम बातें बताई हैं। यह विधि अपनाकर आप टालमटोल के रवैए को हरा सकती हैं, जिससे आपके जरूरी काम पहले पूरे हो पाते हैं। इससे आप पॉजिटिव फील करती हैं। और आपके काम जल्दी पूरे होने लगते हैं।
सबसे पहले ‘बड़े मेढ़क’ को पकड़ें
यह विधि आपको बताती है कि अगर आपके पास कई फ्रॉग यानी काम हैं तो आप सभी को पकड़ने की दौड़ में शामिल न हों, सबसे पहले बड़े मेढ़क यानी काम को पकड़ें और उसे पूरा करें। हालांकि आमतौर पर लोगों के पास दो से कहीं ज्यादा टास्क होते हैं। ऐसे में आप असंख्य कामों के पीछे न भागें। बल्कि सबसे पहले वो काम चुनें जिसके लिए आपको ज्यादा फोकस और एनर्जी की जरूरत है। इसके बाद अपने दूसरे काम पूरे करें। ऐसा करने से आप अपने सारे टारगेट पूरे कर पाएंगे।
इसलिए काम करता है ईट द फ्रॉग

आप में से बहुत सारी महिलाओं को लगेगा कि ये सभी बातें आप पहले से जानती हैं। यह बात काफी हद तक सही भी है, लेकिन ज्यादातर महिलाएं जानते हुए भी इसे अपनाती नहीं हैं। वहीं ईट द फ्रॉग विधि आपको बहुत सी अन्य बातें भी सिखाती है।
परफेक्शन से होता है काम
हर काम को फोकस के साथ करना जरूरी है। लेकिन आज के दौर में कभी ईमेल, तो कभी मीटिंग, मैसेज जैसी कई बातें आपको फोकस से हटा देती हैं। वहीं घर में भी कभी फोन तो कभी टीवी और सोशल मीडिया में ध्यान जाता है। ईट द फ्रॉग विधि कहती है कि जब तक काम पूरा न हो जाए, ऐसी किसी भी बात पर ध्यान न दें, अपना फोकस न हटाएं। इससे आप समय पर पूरी ईमानदारी से काम कर पाएंगे।
आपको अच्छा फील होगा
काम करने का यह शानदार कॉन्सेप्ट आपको सिखाता है कि कैसे आप तय किए गए कामों को समय पर पूरी क्षमता के साथ कर सकती हैं। दरअसल, जब आप अपना सबसे मुश्किल, महत्वपूर्ण और एनर्जी वाला काम सबसे पहले कर लेती हैं तो इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और आप बाकी सारे काम भी जल्दी खत्म कर पाती हैं। इससे आपको अच्छा फील होगा।
बचाता है इस बड़ी गलती से
जब भी आप काम शुरू करते हैं तो शुरुआती घंटों में आप में उत्साह और ऊर्जा ज्यादा होती है। वहीं दोपहर के भोजन के बाद इसमें कुछ कमी आ जाती है। अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि पहले छोटे काम पूरे कर लेते हैं और बाद में बड़ा काम करेंगे। लेकिन असल में दिन के अंतिम समय में वे अपनी शारीरिक और मानसिक शक्ति पहले ही समाप्त कर चुकी होती हैं। ईट द फ्रॉग उन्हें ये बताता है कि आप पहले मुश्किल काम करें, जिससे आपकी एनर्जी बर्बाद न हो और काम जल्दी पूरा हो सकते।
आखिर कैसे चुनें अपना ‘मेंढक’
ईट द फ्रॉग विधि को अपनाने से पहले सही मेंढक यानी काम को चुनना सबसे जरूरी है। इसलिए सबसे पहले आप कामों की एक लिस्ट बनाएं और सबसे जरूरी व जटिल कार्य को पहले नंबर पर रखें। कोशिश करें कि एक रात पहले ही आप इस लिस्ट को तैयार कर लें, जिससे अगले दिन के लिए आप मानसिक रूप से तैयार रहे। इसके बाद जरूरी है इस काम के लिए समय तय करना। आप एक से चार घंटे का टारगेट रखें। अगर काम बहुत मुश्किल है तब भी इसे आधे दिन से पहले पूरा करने की कोशिश करें। काम को अच्छे से करने के लिए हमेशा इसे छोटे-छोटे स्टेप्स में करें।
