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Parenting Tips for Dad
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बच्चों के साथ अगर पिता समय न बिताएं, तो यह बात थोड़ी चिंताजनक हो सकती है

आप चाहती हैं कि बच्चों के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताए पति, तो ये टिप्स अपनाएं।

Parenting Tips for Dad: आप इस बात से परेशान हैं कि आपके पति बच्चों के साथ समय नहीं बिताते हैं? आपको आश्चर्य हो सकता है कि जहाँ आप पावरहाउस बनकर बच्चों की हर गतिविधि में शामिल रहती हैं, पति ज़रा भी उस पर ध्यान नहीं देते हैं और उनके लिए समय नहीं निकालते हैं। अगर आपको लगता है कि यह केवल आपके साथ हो रहा है तो ऐसा नहीं है। आप अकेली इस परिस्थिति का सामना नहीं कर रही हैं। यह दुनियाभर की कई महिलाओं की तकलीफ है। यह जानने के लिए कि इस दिल दुखाने वाले पेरेंटिंग पैटर्न से कैसे बाहर आएं, आपको यह समझना होगा कि आखिर आपके पति बच्चों के साथ समय क्यों नहीं बिता रहे हैं।

काम की थकान

हम में से कई लोग काम से थक चूर होकर घर पहुँचते हैं। यदि आपका पति दिन भर काम करता है तो हो सकता है कि उनके पास अपने परिवार के साथ समय बिताने की एनर्जी न बची हो। अगर काम की थकान इसका कारण है तो आपको क्या करना चाहिए, यह समझना ज़रूरी है। अपने पति से बात करें। यदि आप दोनों काम करते हैं, तो घर और पेरेंटिंग के कर्तव्यों को समान रूप से एक-दूसरे के साथ बाँटे करें। चर्चा करें कि आप भी कितनी थकी हुई हैं और आप बच्चों को लेकर समान रूप से जिम्मेदार हैं।

आलोचना के शिकार

पेरेंटिंग की रोजाना की ज़िम्मेदारियाँ पति पर नहीं होती है तो वे एक सब्स्टिट्यूट के तौर पर खुद को महसूस करते हैं। जब बच्चे उनकी इस तरह से आलोचना करते हैं कि “मम्मी इस तरह से नहीं करती है”, “आप रहने दो मम्मी अच्छे से कर देगी ये काम” या फिर “क्या पापा आपसे ये भी नहीं होता”, ऐसी बातों का नकारात्मक असर पति पर होता है। जब उन्हें लगता है कि वह अच्छे से चीज़ें नहीं कर पा रहे हैं, तो उससे बचने लगते हैं।

आपको इस मामले में पति को “उनके” तरीके से चीज़ें करने देनी चाहिए। अधिकांश चीज़ों को करने का केवल एक तरीका नहीं होता है। फ्लेग्जिबल रहें और उन्हें उनके तरीके से काम करने दें। अपने बच्चों को समझाएं कि मम्मी और पापा अलग तरीके से चीज़ें करते हैं, तो उसमें कोई बात नहीं है। इससे बच्चे भी फ्लेग्ज़िबल होना सीखेंगे और पिता और बच्चों की बॉन्डिंग भी बनेगी।

पिता से खुले नहीं हैं बच्चे

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Good father Qualities

अक्सर बच्चे अपनी मां के ज़्यादा करीब रहते हैं। इससे पिता को यह महसूस होता है कि वह कम महत्वपूर्ण हैं। कुछ लोग इस तरह के रिजेक्शन को हैंडल करने के लिए दूर रहना और बच्चों के साथ कम समय बिताना पसंद करते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए आपको ही आगे आना होगा क्योंकि बच्चे पिता से खुले नहीं है। यह उनका भी दोष नहीं है कि वे हर चीज़ में माँ का साथ चाहते हैं। इसके लिए आपको जानबूझकर सप्ताह में एक दिन किसी न किसी तरीके से बच्चों को पति के सुपुर्द करना होगा। इससे दोनों को एक-दूसरे से बात करने, एक-दूसरे के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा।

मोबाइल है दुश्मन

रिश्तों में आ रही दूरियों का एक बड़ा कारण मोबाइल का हद से ज़्यादा इस्तेमाल है। पति घर पहुँचते ही फिर से मोबाइल में लग जाते हैं, यहाँ तक कि खाने की टेबल पर भी मोबाइल नहीं छूट रहा है तो फिर घरवालों के लिए समय कैसे निकलेगा। वहीं बच्चे भी मोबाइल की लत का शिकार है, तो फिर उनके आसपास क्या चल रहा है, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। यहाँ तक कि मोबाइल माता-पिता की कमी भी पूरी कर रहे हैं। बच्चों तक को पेरेट्स के साथ समय बिताने की जगह मोबाइल में ज़्यादा सुकुन मिल रहा है। इसलिए घर में अनुशासन की ज़िम्मेदारी आप पर आ जाती है। पहले से ही नियम बना दें कि पति घर पर आकर मोबाइल को हाथ नहीं लगाएंगे और बच्चे भी मोबाइल से दूर रहेंगे। जब मोबाइल, टीवी जैसे गैजेट्स को आप शाम के समय अनुमति नहीं करेंगी तो अपने आप फैमिली टाइम होने लगेगा।

डिप्रेशन का शिकार

कई बार बच्चों के साथ समय न बिताने का एक कारण पति का डिप्रेशन का शिकार होना भी है। तनाव, चिंता और अवसाद के कारण व्यक्ति वैसे भी लोगों से बातचीत से बचता है। अगर आपके पति कटे-कटे रहते हैं, किसी भी चीज़ में रूचि नहीं ले रहे हैं और ऊपर बताए किसी भी कारण से प्रभावित नहीं है, तो हो सकता है कि वे डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। ऐसी स्थिति में आपको बहुत ही संभलकर चीज़ों को हैंडल करना होगा। आपको पति के साथ नरम रवैया अपनाना होगा। बच्चों के साथ समय बिताने की बात तो बाद में आएगी, पहले आपको पति से इस स्थिति से निकालने में उनकी मदद करनी होगी। हालाँकि पति को इस सिचुएशन से निकालने में बच्चे भी मदद कर सकते हैं। यहाँ बच्चों को आप कहें कि वे पापा के साथ थोड़ी बातचीत करें, उनसे कुछ न कुछ अपनी पढ़ाई, हॉबी या एक्टिविटी के बारे में पूछे। उनके जवाब देने पर उनकी सराहना करें ताकि डिप्रेशन के कारण आत्मविश्वास में आई कमी से वे उबर सकें।

कोई कारण नहीं

ऐसे पति भी मिल जाएंगे जो कि न तो व्यस्त हैं, न डिप्रेशन के शिकार हैं और न ही उन्हें बच्चों या पत्नी की किसी तरह की आलोचना से दुख होता है, फिर भी बच्चों के साथ समय नहीं बिताते हैं। यानी ऐसे लोगों के पास कम या न के बराबर समय बिताने का कोई विशेष कारण नहीं होता है। बस यह होता है कि बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम के बारे में सोच ही नहीं पाते हैं या उन्हें ऐसी कोई ज़रूरत ही महसूस नहीं होती है।

ऐसे पतियों से डील करने के लिए आपको थोड़ा दबाव तो डालना होगा। आपको उन्हें स्पष्ट शब्दों में इस बात को रखना होगा कि वे बच्चों को नज़रअंदाज कर रहे हैं और पेरेंटिग में सहयोग नहीं दे रहे हैं। ऐसे लोगों के साथ यही दिक्कत है कि वे सोचते हैं कि पत्नी बच्चों के लिए सब कर तो रही है, उनकी क्या ज़रूरत है लेकिन उन्हें यह एहसास दिलाना ज़रूरी है कि आप बच्चों के लिए पिता की भूमिका नहीं निभा सकती हैं।

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