Maut ke Deewane by James Headley Chase hindi novel - Grehlakshmi
Maut ke Deewane by James Headley Chase

जैक फ्लेचर को न्यू प्रोविडेन्स में अपने सी-गार्डन होटल का मैनेजर नियुक्त करने के पश्चात मैं उस होटल की ओर से निश्चिन्त हो गया था। मुझे वहां से लौटे चार दिन भी नहीं हुए थे कि जैक फ्लेचर का फोन आ पहुंचा।

‘मिस्टर मेगन, हम तो बहुत मुश्किल में फंस गए हैं। हमारे अतिथि होटल छोड़-छोड़कर भाग रहे हैं। हमारे एयरकंडीशंड प्लांट मैनेजर टोनी बासवर्थ को तो आंख झपकाने तक की फुर्सत नहीं है।’

मौत के दीवाने नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- भाग-1

‘अतिथि होटल क्यों छोड़ रहे हैं?’

‘टोनी ने एयरकंडीशंड प्लांट बन्द कर दिया है। मेरा विचार है कि हमारे होटल में वायरस वाली महामारी फैल गई है।’

‘कोई और बात होगी, जैक। उस बीमारी से हुए रोग का तो वातावरण तब्दील होने पर ही पता चलता है। तुम टोनी से मेरी बात कराओ।’

‘टोनी से तो बात नहीं हो सकती, वह तो सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से परामर्श करने गया हुआ है।’

‘मैं विमान से सीधा न्यू प्रोविडेन्स पहुंच रहा हूं। तुम एक कार हवाई अड्डे पर भेज दो।’

उड़ान के दौरान मुझे हैरानी हो रही थी कि इतनी सावधानी बरतने के बावजूद यह कैसे हो गया। हो सकता है टोनी को गलतफहमी हो गई हो तथा उसने डर के मारे एयर कंडीशंड प्लांट बन्द कर दिया हो।

जब मेरा विमान न्यू प्रोविडेन्स हवाई अड्डे पर उतरा तो जैक फ्लेचर पहले ही वहां उपस्थित था। वह स्वयं मुझे लेने आया था। होटल की ओर रवानगी होते हुए मैंने उससे पूछा‒‘कितने लोग बीमार हुए हैं?’

उसका उत्तर सुनकर मैं विस्मित रह गया‒‘एक सौ चार। मेरी अपनी तबियत भी काफी खराब है टॉम।’ जैक फ्लेचर ने खांसते हुए कहा।

‘तुमसे तो बोला भी नहीं जा रहा, जैक।’

‘मेरा तापमान एक सौ तीन है, मेरा सिर भन्ना रहा है…मेरा मन कर रहा है कि मैं आंख बन्द करके यहीं लेट जाऊं।

‘तुम्हारा फ्लैट तो होटल में है ना। तुम सीधे घर जाकर आराम करो। हमारे स्टाफ में और कितने लोग प्रभावित हुए हैं?’

‘मेरे समेत चार।’ कहने के साथ ही जैक को खांसी का दौरा पड़ गया।

जैक कार चला रहा था। मैंने उसे स्टेयरिंग ह्वील से हटाया और स्वयं कार चलाने लगा।

‘इस समय हमारे होटल में कितने लोग ठहरे हुए हैं?’ मैंने जैक से पूछा।

‘कोई तीन सौ के करीब। सही संख्या मैं होटल पहुंचकर ही बता पाऊंगा।’

‘कोई बात नहीं….मैं फिलिप्स से पूछ लूंगा। किसी की मृत्यु तो नहीं हुई?’

‘अभी तक तो नहीं।’

होटल पहुंचते ही मैंने फ्लेचर को तो उसके घर भेज दिया और फिलिप्स को खोजने लगा। वह कैशियर के पास बैठा उसकी सहायता कर रहा था। मेहमानों में हल्की-हल्की-सी अफरा-तफरी मची हुई थी। वे कैश काउंटर के आगे खड़े आपस में कानाफूसियां कर रहे थे।

मैंने फिलिप्स के निकट आते हुए कहा‒‘जैक बीमार पड़ गया। तुम यह काम किसी और के सुपुर्द करो और होटल का काम-काज देखो। मुझे यह बताओ कि टोनी बासवर्थ कहां है?’

‘वह ऊपर चक्कर लगा रहा है।’

‘उसके साथ कोई सहायता करने वाला भी है?’

‘नासाऊ के कई डॉक्टर और अस्पताल की अधिकांश नर्सें उसके साथ हैं।’

‘तुम उसे फ्लेचर के कमरे में बुला लाओ। मैं उससे बात करना चाहता हूं।’

कुछ देर के पश्चात जब टोनी, फ्लेचर के कमरे में दाखिल हुआ तो उसकी हालत देखते ही बनती थी, उसकी आंखें ऐसी लाल हो रही थीं, मानो कई रातों से न सोया हो। उससे खड़ा तक नहीं हुआ जा रहा था…वह झूल-सा रहा था।

‘तुम आराम से बैठ जाओ, टोनी और मुझे यह बताओ कि यह आफत हम पर कैसे नाजिल हुई?’

‘टॉम, जब तक टेस्टों का परिणाम न मिल जाये, मैं निश्चित रूप से कुछ नहीं कह सकता।’

‘तुम्हारा विचार क्या है?’ मैंने टोनी से पूछा।

‘यह एक संक्रामक रोग है….इसमें तो कोई सन्देह नहीं, पर जहां तक मैं समझ पाया हूं यह वह महामारी नहीं है जो पहले हमारे कुछ होटलों में फैली थी। उसमें तो लोग भले-चंगे होटल से जाते थे, पर अपने-अपने घरों पर पहुंचते ही मरने लगते थे। इस बीमारी का हमला अचानक और जोर का होता है और फिर दूसरों को भी लपेट लेता है।’

‘सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग वाले क्या कहते हैं?’

‘उन्होंने तो अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया, पर मेरा ख्याल है कि वह होटल बन्द करने के लिए कहेंगे।’

‘यह कैसे हो सकता है, टोनी। तुम भी जानते हो तथा वे लोग भी भली-भांति जानते हैं कि हम पूरी सावधानी बरतते हैं।’

‘मैं उनको समझाने का हर सम्भव प्रयास करूंगा और यदि वे वैसे नहीं माने तो उनकी मुट्ठी गर्म करनी पड़ेगी। खैर! वह तो देखा जाएगा। मुझे तो इस रोग के आक्रमण ने उलझन में डाल रखा है‒यह बीमारी जहां शुरू होती है वहां के पिचानवे प्रतिशत लोगों को प्रभावित करती है, जबकि यहां पर केवल पैंतीस प्रतिशत लोग ही इसका शिकार हुए हैं।’

‘यह महामारी क्या बला है। मुझे तो तुम्हारी यह फारसी बिल्कुल समझ नहीं आई।’

‘मैं आपको बताता हूं….यह एक संक्रामक रोग है, अतः यह होटल में ठहरे हुए सब लोगों में फैल जाना चाहिए था, पर ऐसा नहीं हुआ है….जिस ब्लॉक में सिर्फ इटेलियन ही ठहरे हुए हैं वे ही सारे के सारे इस बीमारी की जद में आ गए हैं। उससे अगले ब्लॉक में अंग्रेज लोग हैं…उन लोगों पर इस रोग का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा…केवल दस प्रतिशत लोगों में यह रोग हुआ है‒अंग्रेजों वाले ब्लॉक के अगले ब्लॉक में अमरीकन ठहरे हुए हैं….और उनमें से अस्सी-प्रतिशत रोगग्रस्त हैं। यही नहीं आप होटल के स्टाफ की ओर ध्यान दीजिये….हमारा समूचा स्टाफ बाहामियन है और दिन-रात इसी वातावरण में रहता है….उनमें से केवल चार व्यक्ति ही इस बीमारी की जद में आये हैं और वह भी केवल वे जो होटल के परिसर में रहते हैं।’

‘तुम्हारी इस बात में तो कोई दम नहीं है। तुम्हारे कहने का आशय है कि यह बीमारी राष्ट्रीयता देखकर आक्रान्त करती है?’

‘मेरी बात का बुरा मानते के बजाय’ टोनी ने मुझसे कहा‒‘आपने खूब याद दिलाया‒इसको यूरेका‒सिन्ड्रोम (लक्षण) कहते हैं।’ कहकर टोनी ने फोन उठाया और किसी नर्स से कहने लगा‒‘तुम ऐसा करो नर्स कि हर मरीज के पास जाओ और उससे यह पूछो कि तुम आम तौर पर किस तरह से स्नान करते हो टब. में बैठकर या शावर के नीचे खड़े होकर। तुम यह जानकारी प्राप्त करने के पश्चात इसकी सूची बनाकर नीचे मैनेजर के कमरे में ले आओ।’

‘यह सब क्या है, टोनी?’ मैंने रुखाई से उससे पूछा।

‘इसे आप जातीय स्वभाव या जातीय प्रकृति कह सकते हैं। आपको यह तो पता होगा ही कि रूसी लोग वाश-बेसिन का नलका हमेशा खुला रखते हैं, क्योंकि बन्द नलके में अपने आप पानी निश्चल रहता है तथा निश्चल पानी में रोगाणु उत्पन्न होने का खतरा होता है।’

‘रूसी लोग इस बात का बहुत ख्याल रखते हैं कि निश्चल पानी उनके शरीर पर न पड़े…अतः वह अपनी वाश-बेसिन का नलका खुला रखते हैं।’

मुझे ऐसा महसूस होने लगा मानो टोनी के नट-बोल्ट बिल्कुल ढीले हो गए हों। मैंने क्रोध से कहा‒‘रूसियों के वाश-बेसिन के नलकों का हमारी इस मुश्किल से क्या सम्बन्ध है…तुम्हारा दिमाग तो ठीक है?’

टोनी ने मेरी मेरी डांट को बिल्कुल नजरअन्दाज करते हुए कहा‒‘मुझे एक बार एक इटालियन डॉक्टर ने बताया था कि अधिकांश इटेलियन शावर के नीचे खड़े होकर स्नान करते हैं…अंग्रेजों के बारे में उसकी यह राय थी कि वे इतने गंदे होते हैं कि मल त्याग के पश्चात भी पानी का इस्तेमाल नहीं करते। अमरीकनों के बारे में भी उसकी राय थी कि वे काफी हद तक साफ-सुथरे होते हैं…अब आप देखिये कि हमारे होटल में ठहरे हुए सभी इटेलियन और अस्सी प्रतिशत अमरीकन इस संक्रामक बीमारी से प्रभावित हुए हैं, जबकि अंग्रेज मेहमानों पर इसका प्रभाव न के बराबर है…उनमें से केवल दस प्रतिशत इस रोगाणु का शिकार हुए हैं।

‘अतः अगर इस बीमारी का संक्रमण एयर कंडीशन प्लांट द्वारा फैला होता, तो सभी कमरे प्रभावित होते और कमरों में सभी ठहरने वाले रोगग्रस्त हो जाते पर ऐसा नहीं हुआ। इसका मतलब है कि एयर कंडीशन प्लांट में कोई गड़बड़ी नहीं है। यह रोगाणु पानी में उत्पन्न होता है और पानी में परवरिश पाता है। दूसरा यह कि इस रोगाणु से फेफड़ों पर असर पड़ता है। अब आप गौर कीजिए कि जब कोई शावर के नीचे खड़ा होकर स्नान करेगा तो स्वाभाविक है कि पानी की कुछ बूंदें नाक से होकर फेफड़ों में पहुंच जाएंगी और यदि पानी में यह जीवाणु होंगे तो स्नान करने वाला रोगग्रस्त हो जाएगा। यही कारण है कि हमारे इटालियन तथा अमरीकन मेहमान जिनको शावर के नीचे खड़ा होकर नहाने की आदत है, वे इस रोग का शिकार हुए हैं जबकि अंग्रेज तो नहतो ही नहीं, और अगर नहाते भी हैं तो टब में बैठकर…उन पर इस बीमारी का कोई प्रभाव नहीं पड़ा।’

‘इससे क्या परिणाम निकलता है।’ मैंने टोनी से पूछा।

‘इससे यह परिणाम निकलता है कि हमारे होटल की वाटर सप्लाई दूषित है।’

‘मैं तुमसे असहमत हूं। होटल में हर किसी ने पानी पिया होगा…और यदि वाटर सप्लाई दूषित होगी तो सभी बीमार पड़ गये होते।’

‘तुम समझने की कोशिश करो, टॉम! यह रोगाणु फेफड़ों पर असर करता है…और जब पानी पिया जाता है, तो फेफड़ों में नहीं जाता है…वह पेट में जाता है और पेशाब एवं पसीने के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है।’

तीन घंटे पश्चात टोनी की बात की पुष्टि हो गई। जब नर्स मरीजों की सूची लेकर आई तो उससे पता चला कि जो लोग रोगग्रस्त थे, उन सबने स्नान के लिए शावर का प्रयोग किया था। तत्पश्चात जब मैंने जैक फ्लेचर के घर फोन किया तो उसकी पत्नी ने भी यही बताया कि जैक को शावर के नीचे खड़ा होकर नहाने की आदत है।

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