विवेक अपनी बस्ती से निकला। बस्ती से बाहर खड़ी कार देखकर वह कार के पास आया जिसमें महेश बैठा हुआ था।
“अरे…महेश…तू!”
“तूने तो मुझे भुला ही दिया…मैंने सोचा स्वयं ही मिल आऊं।”
कच्चे धागे नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- भाग-1
“क्या बात करेेला है…अपन तो समझा था तेरे को तेरे पापा ने इलाज के लिए बाहर भेज दियाला है…एक महीने से तू कॉलेज में भी नहीं आया।”
“आ बैठ।”
“मां से नहीं मिलेगा?”
“फिर मिल लूंगा।” और विवेक महेश को ध्यान से देखता हुआ बैठ गया।
“क्या बात है?” उसने पूछा‒”बड़ा सीरियस नजर आ रहा है।”
“कुछ नहीं…बस ऐसे ही।”
महेश कार स्टार्ट करता हुआ बोला। कार चल पड़ी तो महेश ने पूछा‒
“तेरा लव अफेयर किस स्टेज पर है?”
“यार! बड़ा सीरियस मोड़ आएला है…वैसे तो हम दोनों इतना प्यार करते हैं कि एक-दूसरे को देखे बगैर जी नहीं सकते।”
“कैसा सीरियस मोड़?”
“एक ज्योतिषी ने हाथ देखकर भविष्यवाणी की है कि अंजला का पहला पति मर जाएगा…उसके जीवन में दो ‘मर्द’ लिखे हैं।”
“तुझे ज्योतिषियों पर विश्वास है?”
“हां…बचपन से आज तक तो वही होता रहा है जो वे लोग कहते हैं, वही हुआ है…अपन को बचपन में अनाथ होना था…अपन को खोली भी आसानी से नहीं मिल सकती…इत्यादि…ऐसी ही और अनेक बातें।”
“और तू अंजला से शादी करने से इसलिए इन्कार कर रहा है कि कहीं तू न मर जाए।”
“अरे! अपन नहीं डरता…पर अंजला नहीं मानती…वह कहती है कि वह विधवा होते ही आत्महत्या कर लेगी।”
“फिर उसकी शादी किसी दूसरे से करा दे।”
“व्हाट! कोई साला उसकी ओर देखे तो…अपन उसे मार डालेगा।”
“फिर अंजला विधवा हो जाएगी तो तू उससे शादी कर लेना।”
विवेक के मस्तिष्क को एक जोरदार झटका-सा लगा…उसने कुछ सोचा, फिर महेश की ओर देखकर बोला‒
“अबे यार, तेरे को डाक्टर लोग ने क्या बताया‒तू अमरीका काहे को नहीं गया?”
“क्योंकि मेरे पास जीवन के छः महीने बाकी हैं।”
“क्या?” विवेक उछल पड़ा।
‘एक बहुत बड़ा अमरीकन स्पेशलिस्ट इधर ही आ गया था। उससे चैकअप कराया तो उसने बताया कि चाहे मैं कितना ही इलाज करा लूं…छः महीने से ज्यादा नहीं जी सकता।’’
विवेक घबराया हुआ बोला‒”सच बोल रहा है तू?”
“इसीलिए तो मेरा दिल पढ़ाई से उचट गया है‒क्या करूंगा डिग्री लेकर…डैडी भी सख्त परेशान हैं…डॉक्टर के सामने गिड़गिड़ा रहे थे कि मेरा सारा धन ले लो मगर मेरे बेटे को बचा लो।”
“ओहो…बाप हो तो ऐसा…एक अपन का बाप था कि छोटी उमर में ही छोड़ कर मर गया…खैर! अगर तेरे को मरना ही है तो तू मेरे लिए भलाई का एक काम कर सकता है।”
“अब तो कुछ भी करवा लो।”
“क्या कुछ भी कर देंगा।”
“अधिक से अधिक बिल्डिंग पर से छलांग लगाने को कहोगे…मरना तो है ही छः महीने पहले या बाद में।”
“अरे नहीं यार…अपन को तो तेरी छः महीने की जिन्दगी ही से लाभ हो सकता है।”
“कहो तो डैडी से कहकर अपनी सारी दौलत तुम्हारे नाम करा दूं।”
“छोड़ यार! ऐसी दौलत का क्या करना जो तेरी जान भी नहीं बचा सकती…वैसे भी अपन को पांच लाख रुपये इनाम मिलने को है।”
“पांच लाख रुपये इनाम?”
“हां यार…अपन के हाथों एक इनामी खतरनाक उग्रवादी मारा गया था।”
“यार! तू ऐसे खतरनाक लोगों से पंगा मत लिया कर…जीवन कितना सुन्दर और कितना बहुमूल्य है…उसका अनुमान तो वही लगा सकता है जिसके सामने मौत खड़ी हो।”
“यार, कौन गधा जान-बूझकर मौत के मुंह में कूदेगा…इधर तो मामला अपनी प्रेमिका का था जिसकी जान खतरे में थी।”
फिर उसने विस्तार से ज्योतिषी की भविष्यवाणी बता दी और एक बदमाश को अंजला को ढाल बनाकर ले भागने की बात भी।”
“उस घटना के बाद अंजला को भी भाग्य पर विश्वास हो गएला।”
“अब उसका घाव कैसा है?”
“घाव तो भर गएला है…पर हम दोनों इसी समस्या का समाधान सोच रहे थे‒वह जिससे पहली शादी करेंगी वह मर जाएंगा…उसका दूसरा हसबैंड जिन्दा रहेंगा।”
“और तू चाहता है कि मैं उससे शादी कर लूं।”
“यार तेरे को तो मरना है ही…फिर तेरे जैसा भरोसे का आदमी कौन मिलेंगा? अंजला इतनी सुन्दर है कि अगर कोई दूसरा उससे शादी कर लेंगा तो भले ही बाद में मर जाए‒मगर उसके साथ सुहागरात तो मना लेंगा।”
“तुझे मुझ पर भरोसा है कि मैं शादी के बाद सुहागरात नहीं मनाऊंगा।”
“एकदम पक्का भरोसा…तू दोस्त के माल पर हाथ थोड़े ही डालेगा…वैसे भी तेरे डैडी ने तो तेरी शादी उसी के साथ तय लगाई है।”
“ठीक है।” महेश ठंडी सांस लेकर बोला‒”अब क्या तेरे जैसे दोस्त के लिए इतना भी नहीं कर सकता कि मरने से पहले…।”
“जियो मेरे यार!” खुशी से भरे उत्साह के साथ विवेक ने कहा। साथ ही उसने महेश का गाल चूम लिया।
“अगर मैं जी गया तो तेरी समस्या कैसे हल होगी।” महेश ने कहा।

“इतने बड़े स्पेशलिस्ट अमरीकी डॉक्टर की सलाह क्या गलत होगी?”
“मगर तेरी पहली पत्नी भी तो मर जाएगी।”
“हां, ज्योतिषी ने यह भी बोला था।”
“तो तूने मारने के लिए कोई लड़की चुनी है?”
“हां‒देवयानी।”
“तो तू देवयानी से शादी करेगा?”
“तो क्या हुआ? वह लड़की तो झट अपन से शादी करने को तैयारी हो जाएंगी…वैसे भी उसने बहुत सारे लड़कों को गलत रास्ते पर डाला है…उसने तो धोखे से शराब पिलाकर अपना चरित्र ही दागदार बना लिया है। अपन भी अंजला को काबू करने के चक्कर में उसके जाल में फंस गएला था।”
फिर उसने महेश को ‘उस रात’ वाली घटना के बारे में बता कर कहा‒”लेकिन जब अपना कैरेक्टर अंजला को मालूम हुआ तो अपन से प्यार करने लगी। वह लड़की अपन की शराफत से प्रभावित हो गई। अपन को वह साली देवयानी मिस गाइड कियेला भी…इसीलिए अपन उसको मारने का फैसला किया।”
“जब तू देवयानी को मार डालेगा तो शादी किससे करेगा?”
“यह तो ज्योतिषी ने कहा है कि जिससे पहली शादी करोगे वह अपने आप ही मर जाएगी।” विवेक ने कहा, फिर अपने आप ही हंसने लगा।
“ठीक है यार!” महेश ने कहा‒”डैडी भी तो रोकर कह रहे थे कि शादी कर ले तो कम से कम तुम्हारी निशानी तो बनी रहेगी।”
“क्या बोला? शादी करके अपने डैडी के लिए अपनी निशानी पैदा करेगा?”
“यार डैडी कह रहे थे‒अब उनसे तो यही कहूंगा न मैं कि इसलिए शादी कर रहा हूं कि उनके लिए निशानी छोड़ सकूं।”

“पर एक बात और भी है…अंजला का बाप क्या ऐसे आदमी को दामाद बनाने को तैयार हो जाएंगा, जिससे शादी करके छः महीने बाद ही उसकी लड़की विधवा हो जाए?”
“डैडी ने यह बात किसी को नहीं बताई‒मुझे भी सौगंध दे रखी है, केवल इसलिए कि वह बहू लाना चाहते हैं।”
“तब तो अंजला का बाप राजी हो जाएंगा।”
“बिल्कुल।”
“तो फिर बात पक्की?”
“एकदम पक्की।”
“तेरे जैसा यार हर आदमी को मिले।”
“जो छः महीने में मरने वाला हो।”
“नहीं यार…मैं तो इसलिए कह रहा हूं, तू मेरे लिए इतनी बड़ी कुर्बानी देने को तैयार है।”
“अब अगर दोस्त ही दोस्त के लिए कुर्बानी नहीं करेगा तो कौन करेगा।”
“तू सच कहता है तो आज जश्न हो जाए।”
और कार का मुंह एक फाइव स्टार होटल की ओर मुड़ गया।
