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Daulat Aai Maut Lai Hindi Novel | Grehlakshmi
daulat aai maut lai by james hadley chase दौलत आई मौत लाई (The World is in My Pocket)

जौनी यह सपने में भी नहीं सोच सकता था कि दुर्घटना उसके लिए एक वरदान सिद्ध होगी। वह बच गया था। यदि कहीं डेविस उसे जैक्सनविले पहुंचा देता तो वह निश्चित रूप से उस जाल में जा फंसता जो टोनी और अर्नी उसके लिए बिछाये बैठे थे।

उसे क्या पता था कि दोनों यमदूत उसके लिए मौत का फंदा लिए उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे। वह तो इस समय झाड़ियों के बीच पड़ा हुआ अपने भाग्य को कोस रहा था। उसे वहां पड़े-पड़े अब तक चार घंटे गुजर चुके थे।

एम्बुलेंस तथा पुलिस वहां आकर अब वापिस जा चुके थे। मौसम में ठंडक थी। जौनी सहमा हुआ जरूर था, मगर अब कुछ संतुष्ट था और इंतजार कर रहा था। उसके टखने पर लगी चोट से उसका टखना सूज गया था। जौनी ने टखने पर दृष्टि डाली और सोचने लगा – कोई हड्डी टूट गई है अथवा मोच ही बुरी तरह से आ गई है। पैर पर अपने जिस्म का भार डालकर उठने की कल्पना से ही उसके सम्पूर्ण शरीर में कंपकंपी दौड़ गई।

उसे प्यास लग रही थी, उसने अपनी घड़ी पर दृष्टि डाली तो देखा – एक बजकर पांच मिनट हो चुके थे। उसने सोचा-सड़क पर यातायात दौड़ रहा होगा, यदि किसी तरह से वह सड़क तक पहुंच जाए और भाग्यवश कोई ड्राइवर उसे लिफ्ट दे दे तो वह जैक्शन विले तक आसानी से पहुंच सकता था। वह धीरे-धीरे बाहर निकला और आहिस्ता-आहिस्ता रेंगता हुआ पगडंडी पर आ गया । जले हुए पेट्रोल की बू तथा ट्रक के साथ-साथ झाड़ियों के जलने की भी बदबू उसके नथुनों में घुसी जा रही थी। उसने एक टांग पर खड़े होकर फिर से अपने चोट लगे टखने पर मामूली भार डालने का प्रयास किया – परन्तु उसे लगा जैसे इस कोशिश में दर्द के मारे उसकी जान ही निकल जाएगी।

वह आहिस्ता से फिर बैठ गया। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। फिर कुछ देर बाद स्वयं पर काबू पाते हुए उसने अपनी वर्तमान अवस्था के बारे में सोचा। आखिर में उसे पुनः झाड़ियों के बीच पहुंचकर इंतजार करना ही ज्यादा उचित महसूस हुआ। कुछ देर आराम भी मिल जाएगा और हो सकता है वह टखने की चोट को सहने के काबिल भी हो जाए।

उसने वापिस झाड़ियों के झुरमुट की ओर रेंगना आरंभ कर दिया। तभी वह ठिठक गया – कठिनाई से आठ फुट की दूरी पर एक मोटा-सा काटन माउथ सर्प कुंडली मारे बैठा था। अपने हरे रंग के फन को उठाये वह जीभ लपलपाता हुआ उसी की ओर देख रहा था।

जौनी के समूचे जिस्म में बर्फ जैसी सर्द लहर दौड़ गई। टखने का दर्द न जाने कहां उड़न छू हो गया। सांपों के प्रति उसके मन में आरंभ से ही डर समाया हुआ था। वह वहीं जड़वत पड़ा रह गया – स्थिर बगैर पलकें झपकाये – ठीक किसी पत्थर के बुत के मानिंद।

धीमे-धीमे समय गुजरता रहा – अकस्मात् जौनी को अपनी पिस्तौल का ख्याल आया। क्या वह सांप को गोली मार दे – फिर तत्काल ही उसे खतरे का एहसास हो आया – फायर की आवाज सुनकर कोई छानबीन करने आ पहुंचा तो – फिर उसने सोचा – अगर वह यूं ही शांत पड़ा रहे तो हो सकता है सर्प स्वयं ही वापिस चला जाये। सर्पों के विषय में उसका ज्ञान शून्य ही था। वह नहीं जानता था कि काटन माउथ का विष प्राणघातक भी होता है या नहीं।

जौनी काफी देर तक भय से कांपता हुआ यूं ही पड़ा रहा -फिर उसके देखते-देखते ही सर्प ने अपनी कुंडली खोल दी और जहां जौनी पड़ा हुआ था उसके साथ की झाड़ियों में सरक गया। जौनी ने अपनी चेहरे से बहते पसीने को पोंछा-क्या यह यम का दूत उसी के पास बना रहेगा?

उसे तुरंत यहां से निकल जाना होगा।

ऊंचे-ऊंचे वृक्षों से छन-छनकर सूरज की तेज किरणें नीचे आनी आरंभ हो गई थीं। प्यास के मारे उसका गला बिल्कुल खुश्क हो चुका था। गले में कांटे से उग आये थे। प्यास बुझाने की तीव्र इच्छा के लिए वह अपना सब कुछ दे सकता था। जंगल न जाने कितने सर्पों से भरा पड़ा होगा – अतः इस जानलेवा जंगल से निकल जाना ही श्रेयस्कर था।

जौनी एक टांग पर भार डालकर खड़ा हो गया और उसी पैर के सहारे कूद-कूदकर आगे बढ़ने लगा – परन्तु वह कामयाब न हो सका। चौथी ही बार के प्रयत्न में उसका संतुलन बिगड़ गया। उसके जिस्म का सारा बोझ उसके चोट लगे टखने पर जा पड़ा। उसके तो प्राण ही निकल गये जैसे उसके मुंह से एक चीख निकली और वह धड़ाम से जमीन पर जा गिरा। उसका सिर एक पेड़ की जड़ से टकराया और उसके बाद वह अंधकार के एक विशाल सागर में डूबता चला गया।

जौनी बेहोश हो चुका था

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