एन्डी के कैफे में एक छोटी-सी मेज के सामने बैठा जौनी कॉफी पी रहा था। उसकी खोजपूर्ण निगाहें कैफे में उपस्थित भीड़ का अवलोकन कर रही थीं।
कैफे में इतना शोरगुल उठ रहा था कि किसी को किसी की बात सुनाई नहीं पड़ रही थी। ट्रक ड्राइवर हैमबरगर और कॉफी की चुस्कियों के बीच हंसी-मजाक करने में लगे हुए थे। आने-जाने वालों का तांता-सा लग रहा था। विभिन्न ग्रुपों में बंटे हुए वे एक-दूसरे का अभिवादन करके खुले दिल से स्वागत करते और उनके उन्मुक्त ठहाकों से कैफे का वतावरण
कोलाहलपूर्ण बना हुआ था।
दौलत आई मौत लाई नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- भाग-1
जौनी ने अपनी कलाई घड़ी पर नजरें डालीं। पांच बजकर पच्चीस मिनट हो चुके थे। अब जल्दी ही उसे यहां से चल देना चाहिए, परन्तु अभी तक वह किसी भी ट्रक ड्राइवर से संबंध स्थापित करने में कामयाब नहीं हो सका था। उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी।
हैम तथा अंडों के इंतजार में खड़े एक व्यक्ति से उसने संबंध स्थापित करने का प्रयत्न भी किया था, मगर उसने कम्पनी के सख्त नियमों की दुहाई देते हुए कि सवारी ले जाना वर्जित है, स्पष्ट इंकार कर दिया।
तभी एक विशालकाय शक्तिशाली व्यक्ति ने कैफे में प्रवेश किया। जौनी को देखकर हैरानी हुई कि उपस्थित ट्रक ड्राइवरों की भीड़ में से उसका न तो किसी ने अभिवादन ही किया और न ही उसके प्रति कोई उत्सुकता जाहिर की।
आगन्तुक ने बार में जाकर पैन केक्स, सीरप तथा कॉफी का आर्डर दिया। फिर उसने किसी खाली सीट की तलाश में चारों तरफ दृष्टि घुमाई। जौनी ने हाथ द्वारा उसे संकेत किया। वह अपने खाने के सामान सहित उसके सम्मुख आकर बैठ गया।
आगन्तुक पर खोजपूर्ण नजरें डालकर जौनी सोचने लगा‒यह व्यक्ति जरूर बॉक्सर रहा होगा। चपटी नाक तथा चेहरे की खरोंचें उसके बॉक्सर होने की पुष्टि कर रही थीं। चिन्तापूर्ण होने के बावजूद भी उसकी शक्ल बुरी नहीं थी।
‘हैलो।’ आगुन्तक बोला – ‘मुझे जोये डेविस कहते हैं।’
‘मैं एल व्यान्को हूं।’ जौनी ने उत्तर दिया।
डेविस मेज पर रखी खाने की वस्तुएं चट करने में लग गया और जौनी बार-बार अपनी घड़ी की ओर देखकर सोचने लगा – मसीनो ने जरूर माफिया ऑर्गनाइजेशन को सूचित कर दिया होगा मेरे बारे में।
‘साउथ जा रहे हो?’ जौनी ने पूछा।
डेविस ने दृष्टि उठाई और उसकी ओर देखकर पूछा-‘हां-तुम एक ट्रक ड्राइवर नहीं तो क्या?’
‘नहीं-मुझे तो किसी सवारी की तलाश है।’ जौनी ने कहा-‘और मैं अपनी यात्रा का उचित किराया भी दूंगा, क्या तुम जैक्सन विले के आसपास कहीं जाओगे?’
‘मैं विरोबीच जा रहा हूं।’ डेविस ने उसके चेहरे का निरीक्षण करते हुए कहा-‘तुम अगर चाहो तो मेरे साथ चल सकते हो। तुम्हें साथ ले जाने में मुझे खुशी हासिल होगी। किराये की कोई बात नहीं – किराये से ज्यादा मैं संग-साथ को अधिक महत्व देता हूं।’
‘धन्यवाद मिस्टर डेविस।’ जौनी ने राहत की सांस ली उसने कॉफी समाप्त की और फिर बोला – ‘कितनी देर बाद चलने का इरादा है?’
‘बस, ज्योंही यह मेज पर रखा खाना पेट में पहुंचा – चल पड़ूंगा।’
‘मैं बाहर इंतजार करता हूं।’ जौनी ने उठते हुए कहा – ‘मैं जरा मुंह-हाथ धोकर तरोताजा होना चाहता हूं।’
जौनी ने कॉफी का बिल अदा किया और साइड में बने टॉयलेट में जा घुसा। उसने मुंह-हाथ धोकर स्वयं को तरोताजा किया और बाहरी खुली हवा में आ गया।
आते-जाते ट्रकों को देखकर अनायास ही उसे मसीनो का ख्याल आ गया।
वह अच्छी तरह से जानता था कि संगठन के हाथ बहुत लम्बे हैं और कोई भी व्यक्ति आज तक उसकी पहुंच से दूर नहीं था। अचानक उसके होंठों पर कड़वी मुस्कान तैर गई। आखिर हर काम की शुरुआत कहीं न कहीं से तो होती ही है। कौन जाने वह स्वयं ऑर्गनाइजेशन के इतिहास में अपवाद सिद्ध हो जाये। माफिया को पराजय देने वाले प्रथम व्यक्ति के रूप में उसका ही नाम लिखा जाये, ठंडी हवा के सुखद स्पर्श से उसमें आत्मविश्वास बढ़ता हुआ-सा प्रतीत हुआ।
डेविस कैफे से बाहर आकर जौनी से मिला। दोनों साथ-साथ चल पड़े और एक पुराने से ट्रक के पास जा खड़े हुए, जो संतरों की पेटियों से लदा खड़ा था।
डेविस उस खस्ता हाल में दिखने वाले ट्रक की बड़ाइयां करता हुआ ड्राइविंग सीट पर आ जमा। साथ वाली पैसेंजर सीट पर ही जौनी को
मतली-सी आने लगी। पसीनों, तेल तथा पेट्रोल की मिली-जुली बदबू सीधे उसकी दिमाग में घुसी जा रही थी। नीचे से सीट फटी हुई थी, जिसकी स्प्रिंग उसे चुभ रही थी। जाहिर था कि यह यात्रा कष्टप्रद रहेगी।
डेविस ने ट्रक स्टार्ट किया – इंजन का भयंकर शोर जौनी को कान के पर्दे फाड़ता हुआ-सा महसूस होने लगा।
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‘इसकी आवाज की फिक्र मत करो – डेविस ने गियर डालते हुए कहा – ‘साउथ पहुंचने के लिए अभी इसमें बहुत दम-खम है।’
इंजन की तेज घरघराहट से जौनी अपने सारे शरीर में कम्पन-सा अनुभव कर रहा था। शोर इतना उठ रहा था कि बात करना नामुमकिन था। पर इन सब बातों के बावजूद भी वह खुश था, क्योंकि वह सुरक्षित स्थान की ओर रवाना हो चुका था।
‘पुराना होने के बावजूद भी ट्रक बहुत अच्छा है।’ डेविस ने मूर्खतापूर्ण हंसी हंसते हुए कहा। इंजिन के शोर से जौनी को उसकी आवाज साफ से सुनाई नहीं पड़ी, फिर भी उसने सहमति में सिर हिला दिया।
धीरे-धीरे मील-दर-मील गुजरते गये-दोनों खामोश बैठे सफर तय करते रहे। दूसरे ट्रक तथा कारें भी उनके बराबर से आगे गुजरते गये। तभी स्पीडोमीटर की सुई साठ के अंक पर थरथराई और इंजन एक अजीब-सी आवाज करते हुए बंद हो गया।
डेविस ने जौनी की तरफ देखा तथा बेवकूफों की तरह मुस्कुराने लगा। जौनी को अब उसका स्वर साफ सुनाई दे रहा था –
‘यात्रा आरंभ करने से ही इसे चिढ़ लगती है, मगर एक बार चल पड़े तो फिर बाखुशी सफर तय करती है।’
‘फिर बंद कैसे हो गया?’
‘इतनी दूर तय कर लेने के बाद यह ऐसा ही व्यवहार करती है।’ डेविस ने कहा – साथ ही एक ऐसी हरकत की, जिसे देखकर जौनी के हाथ-पांव फूल गये। डेविस जोर-जोर से अपने ही माथे पर मुक्के लगा रहा था – ऐसा उसने तीन बार किया। वे शक्तिशाली हाथ किसी भी व्यक्ति की खोपड़ी का कीमा बना देने के लिए पर्याप्त थे।
‘हे ईश्वर! यह तुम क्या कर रहे हो।’ जौनी ने लगभग चीखते हुए कहा- ‘क्या मारने की ठान रखी है?’
डेविस अपने चिर-परिचित ढंग से हंसा। बोला- ‘मेरे सिर में भयंकर दर्द उठता है-कई महीनों से ऐसा होता आ रहा है। मगर इसका एकमात्र इलाज यही है। दो-चार घूंसों के बाद वह बिल्कुल दुरुस्त हो जाता है। तुम इस तरफ कोई ध्यान मत दो एल।’
‘तुम्हें सिरदर्द की बीमारी रहती है।’
‘हां, अगर तुम ट्रक ड्राइवर का काम करते होते तो तुम भी इस बीमारी से नहीं बच सकते थे।’ डेविस ने एक्सीलेटर पर दबाव बढ़ाते हुए उत्तर दिया – ‘यकीन करो या न करो – किसी समय मैं भी हैवीवेट चैम्पियनशिप का प्रतियोगी था। यह बात दूसरी है कि मैं कभी उसे प्राप्त नहीं कर सका। हां, कैसियस क्ले मौहम्मद अली का पार्टनर जरूर रहा हूं। मगर अब सब कुछ समाप्त हो चुका है। मेरी जिन्दगी सिर्फ इस पुराने ट्रक और चिड़चिड़ी पत्नी तक ही सीमित होकर रह गई है।’
सहसा जौनी को लगा कि इस व्यक्ति के दिमाग में कुछ खराबी जरूर है। वह व्याकुल-सा हो गया। उसे याद हो आया कि रेडी के कैफे में किसी ड्राइवर ने इससे बात करना तो दरकिनार रहा, दुआ-सलाम तक नहीं की थी।
‘अब भी सिर में दर्द है?’ उसने पूछा।
‘नहीं, तीन-चार घूंसों में ही वह ठीक हो गया। अब सही है।’
जौनी ने सिगरेट जला ली। ‘सिगरेट पियोगे?’ उसने पूछा।
‘न ही मैंने कभी पी और न ही भविष्य में पीने का इरादा है। तुम रहने वाले कहां के हो एल?’ डेविस ने पूछा।
‘न्यूयार्क का।’ जौनी ने साफ झूठ बोला – ‘मैं कभी दक्षिण को नहीं गया था, अतः सोचा कि चलो उधर भी घूम आऊं।’
‘तुम शायद बगैर सामान के सफर करते हो?’
‘नहीं, सामान है मेरे पास-पर वह रेलगाड़ी द्वारा आ रहा है।’
‘सफर करने का तरीका तो अच्छा है।’ कुछ देर मौन रहकर डेविस ने पूछा-‘तुमने वह फ्री स्टाइल मैच देखा था। कितनी बुरी तरह से कपूर ने अली को मिट्टी चटाई थी।’
‘हां, टेलीविजन पर देखा था।’
‘मैं उस समय वहीं पर था-अच्छा, क्या तुम भी लंदन गए हो?’
‘नहीं।’
‘अली अपनी टीम के साथ मुझे भी वहां ले गया था। वह एक शानदार शहर है।’ डेविस हंसा-‘वहां की लड़कियां और उनके जांघों के ऊंचे स्कर्ट सचमुच देखने के काबिल हैं।’ उसने अपने मस्तिष्क पर फिर प्रहार करते हुए पूछा-‘फ्रेजियर ने अली को जिस ढंग से शिकस्त दी थी, वह देखी थी तुमने?’
‘हां, मगर टी.वी. पर।’
‘मैं उस समय भी वहीं मौजूद था। याद रखना, अली फिर मैदान में उतरेगा और उसे कोई नहीं हरा सकेगा।’
जौनी की नजरें धूल लगी विंडस्क्रीन पर लगी थीं। सड़क के दोनों ओर नींबू और संतरों के बगीचे थे। उसने अपनी कलाई पर बंधी घड़ी की ओर देखा – साढ़े सात बज चुके थे।
‘अभी जैक्सनविले और कितनी दूर है?’ उसने पूछा।
‘अगर ट्रक सही ढंग से चलता रहा तो दस घंटे और लगेंगे। तुम्हें शायद पहुंचने की जल्दी है।’
‘नहीं, मुझे कोई जल्दी नहीं है।’
‘तुम शादीशुदा हो, एल?’
‘नहीं।’
‘मैं भी यही सोचता था। शादीशुदा आदमी इस तरह से सैर-सपाटे नहीं किया करते। तुम जानते हो – आदमी अगर चाहे तो अच्छी या बुरी औरत प्राप्त कर सकता है मगर मैं इस मामले में बड़ा बदनसीब हूं।’
प्रत्युत्तर में जौनी खामोश ही रहा।
‘तुम खुशनसीब हो, क्योंकि बच्चों का झंझट तुम्हारे साथ नहीं है।’ डेविस कहता गया – ‘मेरी एक लड़की है। वह हमेशा केवल सैक्स के बारे में ही सोचती रहती है और उसकी मां बिल्कुल उसका ध्यान नहीं रखती।’ डेविस ने इस बार अपना सिर इतनी जोर से ठकठकाया कि जौनी बौखला गया – परन्तु जौनी की ओर से लापरवाह डेविस कह रहा था – ‘मेरी समझ में नहीं आता कि क्या करूं। अगर मैं उसके साथ मारपीट करूं तो डर है कि कहीं वह पुलिस में न जा पहुंचे। मेरे ख्याल में कोई भी बाप अपनी बेटी के बारे में, जो हमेशा काम-वासना में डूबी रहना चाहती हो, कुछ नहीं कर सकता।’
अनायास ही जौनी को मैलानी की याद आ गई – उस पर क्या बीत रही होगी – क्या मसीनो ने उसे …इस विचारमात्र से ही वह सिहर उठा और जबरन उसे अपने दिमाग से निकालने की चेष्टा करने लगा।
‘वासना का भूत’ डेविस ने हथेली के पृष्ठ भाग से अपने चेहरे को साफ किया – ‘बड़ा खतरनाक होता है।’ सत्तर मील की रफ्तार के कारण ट्रक बुरी तरह से खड़खड़ा रहा था। बगीचे धीरे-धीरे छूट चुके थे और जगह-जगह पानी भरा होने वाली जीमन आती जा रही थी।
‘मुझे इससे सख्त नफरत है।’ डेविस ने जानकारी दी – ‘ध्यान रखना यह सांपों वाला जंगल है। इससे गुजरने के बाद हम साउथ की जमीन पर पहुंच जाएंगे।’
स्टेयरिंग व्हील पर झुके इस विशालकाय व्यक्ति की आंखों में विशेष चमक देखकर जौनी किसी भावी आशंका की कल्पना से मन ही मन सहम रहा था।
‘स्पीड बहुत ज्यादा है डेविस – थोड़ी कम कर दो।’ वह चीखता हुआ बोला।
‘तुम इसे तेज समझते हो’ – डेविस ने सड़क पर से नजरें उठाकर उसकी ओर देखा और सम्पूर्ण बदन कांप उठा। डेविस की छोटी-छोटी आंखों में शून्यता थी – ‘मेरी तरह….वह भी वापिस आएगा।’
‘निगाहें सड़क पर ही रखो।’ जौनी चीखा।
डेविस ने बेवकूफों की तरह पलकें झपकाईं और स्टेयरिंग व्हील से दोनों हाथ अलग करके अपने सिर पर जोर-जोर से प्रहार करने लगा। जौनी ने हाथ बढ़ाकर स्टेयरिंग व्हील को पकड़ने की चेष्टा की, मगर तब तक देर हो चुकी थी। ट्रक सड़क छोड़कर खेतों में उतर चुका था। खेत जुते हुए थे, अतः उनकी मिट्टी नर्म थी। खिड़की के निकट बैठे जौनी को दरवाजा टूटता-सा प्रतीत हुआ। दूसरे ही क्षण वह बाहर गिर रहा था। वह पीठ के बल झाड़ियों में गिरा और फिर लुढ़कता चला गया।
वह स्तब्ध रह गया – जुते खेत में ट्रक मनचाही दिशा में बढ़ता रहा। सहसा इंजिन के शोर से भी ऊपर एक अन्य भयानक आवाज सुनाई पड़ी। यह ट्रक के एक पेड़ से टकराने की आवाज थी। जैसे ही जौनी ने उठने की चेष्टा की, भयंकर आवाज करते हुए ट्रक का पेट्रोल टैंक फटा तथा समूचा ट्रक आग की भयंकर लपटों में घिर गया।
जौनी ने उधर बढ़ने का प्रयास किया, किन्तु सफल न हो सका। उसकी आत्मरक्षा की भावना ने उसे खामोश पड़े रहने पर मजबूर कर दिया। अकस्मात् उसके मस्तिष्क में एक नई आशंका ने जन्म लिया। थोड़ी-बहुत देर में आती-जाती कारों की नजरें इस दृश्य पर पड़ जानी स्वाभाविक थीं, फिर पुलिस को यहां पहुंचते देर नहीं लगेगी। यदि पुलिस ने उसे यहां इस स्थिति में पा लिया तो वह जरूर मारा जाएगा। सवाल-जवाब के अलावा जब उन्हें उसकी तलाशी लेने पर तीन हजार डालर के दस-दस के नोट तथा पिस्तौल प्राप्त होगी तो वह वास्तव में फंस जाएगा।
वह उठा और धीरे-धीरे जंगल की ओर जाने वाली पगडंडी पर चल पड़ा।
उसके दाएं टखने में चोट आ जाने के कारण बहुत दर्द हो रहा था, परन्तु मजबूरी थी – वह जल्द से जल्द उस स्थान से जितना दूर पहुंच जाता उतना ही अच्छा था।
करीब पांच सौ गज की दूरी पर पहुंचते ही उसके कानों में सायरन का स्वर सुनाई पड़ा। वह चौंक गया। दूसरे ही क्षण वह टूटे टखने की परवाह किए बगैर भाग निकला, किन्तु अधिक दूर नहीं जा सका। एक पैर से दौड़ने के कारण उसका संतुलन बिगड़ जाता था। आखिर लड़खड़ाते हुए वह गिर ही पड़ा।

बेहद पीड़ा के कारण बार-बार होंठ काटते हुए वह पुनः उठा और अपने कष्ट की परवाह किये बगैर प्राणपण से आगे घिसटने लगा। वह मुश्किल से अभी सौ गज ही बढ़ पाया था कि उसकी ताकत ने जवाब दे दिया। उसका चेहरा पसीने से तरबतर हो चुका था। उसकी सांसें लुहार की धौंकनी की मानिंद चल रही थीं। एक पग आगे बढ़ना भी अब उसके लिए असंभव था। उसने असहाय भाव से अपने चारों ओर देखा। दायीं ओर नजदीक ही उसे एक छोटी-छोटी मगर घनी झाड़ियों का झुरमुट दिखाई दिया। किसी प्रकार घिसटते हुए वह वहां तक पहुंच गया पर अब तक इस प्रयास में उसके जिस्म की ताकत बिल्कुल खत्म हो चुकी थी। वह गीली जमीन पर गिर गया किन्तु एक बात से अब वह आश्वस्त हो चुका था कि पगडंडी से गुजरने वालों की नजरें अब उस पर नहीं पड़ सकती थीं। वह अपनी सांसों पर काबू पाने की चेष्टा करने लगा। कुछ देर बाद जब वह थोड़ा नॉर्मल हुआ तो उसने अपनी चोट लगी टांग को आगे की ओर फैला लिया और आगे क्या होगा-इसकी प्रतीक्षा करने लगा।

