हम सभी देवी दुर्गा,लक्ष्मी,भगवान शिव और गणेश के मंदिरों के दर्शन अक्सर ही करने जाते हैं लेकिन भगवान सूर्य के मंदिरों के बारे में ज़्यादातर बार तो हमें पता ही नहीं होता है।जब पता नहीं  होता तो उन तक चलकर जाने की बात तो भूल ही जाइए।मगर देश का मानचित्र थोड़ा सा समझें तो हमें सूर्य भगवान के मंदिर भी नजर आ जाएंगे। इन मंदिरों की भी अपनी अलग अहमियत है। इनमें आने वाले भक्त इन मंदिरों में पूरी आस्था रखते हैं।सूर्य देवता के आशिर्वाद के लिए अक्सर ही लोग इन मंदिरों में आते हैं।ये मंदिर घुमक्कड़ी के नजरिए से भी खास हैं,क्योंकि इनकी बनावट और बनने से जुड़ी कहानियां कम रोचक नहीं हैं। इन सूर्य मंदिरों को पहचान लीजिए और कोरोना से मुक्ति के बाद इन्हें देखने भी जरूर आएं

कटारमल मंदिर,उत्तराखंड

 

44अन्य छोटे मंदिरों से घिरा ये मंदिर9वीं शताब्दी में बनवाया गया था।इस मंदिर की खासियत इसकी वास्तुकला है जो उत्तराखंड की खास कत्यूरी वास्तुकला शैली है। अल्मोड़ा जिले कटारमल गांव में ये मंदिर बना है और काफी प्रसिद्ध है। ये मंदिर उत्तराखंड के कुछ सबसे ऊंचाई पर बने मंदिरों में से एक है। समुद्र सतह से लगभग2116मीटर कीऊंचाईपर एक पहाड़ पर बना ये मंदिर अपनी सुंदरता से सभी आकर्षित कर लेता है।यहां आने के लिए आपको अल्मोड़ा से 14 किलोमीटर चलने के बाद 3 किलोमीटर पैदल भी चलना पड़ेगा।

कोणार्क सूर्य मंदिर,ओडिशा

 

इस मंदिर की खासियत52टनचुंबक भी है। विश्व धरोहर माने गए इस मंदिर के बारे में माना जाता है कि भगवान के असल में दर्शन होते हैं। मंदिर अनोखा इसलिए भी है क्योंकि ये रथ के आकार में बना है। मंदिर की बात सिर्फ इतनी सी नहीं है बल्कि यहां आना आपको इसलिए भी अच्छा लगेगा क्योंकि इसके द्वार पर ही सूर्य की पहली किरण पड़ती है। पूरी से35किलोमीटर दूर इस मंदिर को13वीं शताब्दी में बनवाया गया था।

सूर्य मंदिर,ग्वालियर-

 

ये मंदिर ऐतिहासिक नहीं है लेकिन फिर भी बेहद सुंदर बनाया गया है। इसकोकोणार्क सूर्य मंदिरकी तरह ही बनाने की कोशिश की गई है। बिजनेसमैन जीडी बिड़ला ने इस मंदिर का निर्माण 1977 में करवाया था। इस मंदिर का निर्माण ऐसे किया गया है कि सूर्य की पहली किरण मंदिर के द्वार पर ही पड़े। मंदिर ग्वालियर के प्रसिद्ध शनि मंदिर के करीब है। ऐसा इसलिए है क्योंकि शनि देव सूर्य के ही पुत्र है।

 

सूर्यनारायण मंदिर,आंध्र प्रदेश-

 

ये मंदिर बहुत ही पुराना है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि साल में बार यहां बिलकुल अनोखा अनुभव हो सकता है। दरअसल यहां साल में 2 बार सूरज की किरणें मूर्ति के पैर छूती हैं। ये बिलकुल अलग अनुभव हो सकता है। ऐसा एक बार मार्च के महीने में तब होता है जब सूर्यउत्तरायण से दक्षिणायन की ओर बढ़ने लगता है। दूसरी बार ऐसा अक्तूबर महीने में होता है जबसूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर बढ़ता है। इसे 7वीं शताब्दी में बनवाया गया था। इस मंदिर में ग्रेनाइट के टुकड़े परभगवान सूर्यनारायण स्वामीकी आकृति बनी हुई है। जो बहुत अद्भुत है और एक बार देखने पर ही मोहित कर लेती है।

मोढेरा मंदिर,गुजरात

 

1026में बनेइस मंदिर का सभा मंडप52खंभों परबना है जो साल के52हफ्तों को दिखाता है।पुष्पवती नदी के किनारे बने मोढेरा मंदिर के तीन भाग हैं गुधा मंडप,सभा मंडप और कुंड। मंदिर में आपको सूर्या भगवान से जुड़ी कई आकृतियां मिल जाएंगी।इनकी बनावट भी आपको जरूर अच्छी लगेगी,ये आपको हैरान भी जरूर करेगी।

मार्तंड मंदिर,कश्मीर

 

अपनी नेचुरल ब्यूटी,फाड़,बर्फ और डल झील के लिए पसंद किए जाने वाले कश्मीर में भी एक सूर्य मंदिर है। मंदिर को 8 वीं सदी में कश्मीरी वास्तुशिल्प के आधार पर बनाया गया है। लेकिन इसको 15वीं शताब्दी में नष्ट भी किया गया है। शासक सिकंदर बुतशिकन ने हमला करके इसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया था। जबकि इसे बनवाया था कर्कोटा वंश के राजा ललितादित्य मुक्तापिदा ने।

देव सूर्य मंदिर,बिहार-बिहार में भी एक सूर्य मंदिर का है,जहां भक्तों का सैलाब सा आता है। माना जाता है कि इस मंदिर को सिर्फ एक रात में बनाया गया था। भगवान विश्वकर्मा ने ऐसा किया था। इस मंदिर का नाम देवयानी के नाम पर रखा गया था जो शुक्राचर्या की बेटी थीं। मंदिर बिहार के ऑरंगाबाद किले में बना हुआ है। इसका वास्तु गुप्तकालीन है।

ओसियां का सूर्य मंदिर,राजस्थान-

 

राजस्थान की जगहओसियांको इस राज्य का खजुराहो भी कहा जाता है। इस मंदिर में अब मूर्ति नहीं है लेकिन फिर भी इसकी अहमियत बहुत है। अपनी अनोखी बनावट और शैली के लिए भी इस मंदिर को खूब पसंद किया जाता है। मंदिर का निर्माणप्रतिहार वंश के राजपूत राजा राजपूत उत्तपलीदोव नेकिया था।

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