रवीन्द्रनाथ टैगोर की विरासत है शांति निकेतन, जानिए यहां की खासियत: Shantiniketan Speciality
Shantiniketan Speciality

Shantiniketan Speciality: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित शांति निकेतन को हाल ही में यूनेस्को ने विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया है। ये देश के लिए एक गर्व का पल है, और हो भी क्यों न, आखिर नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रवीन्द्रनाथ टैगोर की विरासत को विश्व धरोहर घोषित किया गया है। शांति निकेतन ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा योगदान दिया है। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपने जीवन का एक लम्बा समय यहीं बिताया था।

कब हुई थी शांति निकेतन की स्थापना

शांति निकेतन की स्थापना 1901 में एक छोटे से स्कूल के तौर पर कोलकाता से लगभग 180 किलोमीटर दूर बीरभूम में हुई थी। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 1919 में शांति निकेतन में ‘कला भवन’ की नींव रखी, जो 1921 में स्थापित विश्वभारती विश्वविद्यालय का हिस्सा बन गया। ये जगह कला प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां का शांत वातावरण देश और विदेश से आने वाले टूरिस्टों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

क्या है खास

Shantiniketan Speciality
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शांति निकेतन अपने विश्वभारती विश्वविद्यालय के लिए मशहूर है लेकिन यहां बने टैगोर हाउस और कला भवन की भी अपनी ही खासियत है। टैगोर हाउस वो जगह है, जहां रवीन्द्रनाथ टैगोर अपना सबसे अधिक समय बिताया करते थे। बंगाली परंपरा को दर्शाते इस हाउस का निर्माण टैगोर के पिता ने कराया था, जो बेहद आकर्षक है। यहां विभिन्न कलाओं से सुसज्जित कमरे हैं, जो कला प्रेमियों के दिल को सुकून देने वाले हैं।

छातीमताला को भी शांतिनिकेतन की अहम जगह माना जाता है। इस जगह को टैगोर द्वारा कला और ध्यान जैसी गतिविधियों के लिए बनाया गया था। ये जगह हरियाली से भरी हुई है, जहां पक्षियों की मधुर आवाज मन को शान्ति देने वाली है। इन्हीं खूबसूरत जगह में है अमर कुटीर, जहां पारंपरिक शैली से बने उत्पादों को बेचा जाता है। यहां एक संग्रहालय भी है, जहां शिल्पकलाओं को प्रदर्शित किया जाता है। इस म्यूजियम में टैगोर से जुड़ी कला-रचनाओं का बड़ा संग्रह मौजूद है।

अगर इस बार आप पश्चिम बंगाल घूमने जा रहे है तो शांति निकेतन जाना न भूलें। यहां आकर आप रवीन्द्रनाथ टैगोर के बारे में बेहद करीब से जान सकते हैं। टैगोर को प्रकृति से बेहद प्रेम था, इसलिए उनका मानना था कि छात्रों को प्रकृति के सानिध्य में रहकर ही शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए रवीन्द्रनाथ टैगोर ने शांति निकेतन की स्थापना की।

वर्तमान में गृहलक्ष्मी पत्रिका में सब एडिटर और एंकर पत्रकारिता में 7 वर्ष का अनुभव. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी दैनिक अखबार में इंटर्न के तौर पर की. पंजाब केसरी की न्यूज़ वेबसाइट में बतौर न्यूज़ राइटर 5 सालों तक काम किया. किताबों की शौक़ीन...