sampad ki kalam se editorial review
sampad ki kalam se editorial review

Editorial Review: गर्मियों की शुरुआत के साथ ही धार्मिक यात्राओं, त्यौहारों और स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने का समय भी आ जाता है। इस माह चार धाम यात्रा आरंभ हो रही है, जो न केवल उत्तराखंड की पवित्र धरा से जुड़ी है, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक भी है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यह यात्रा न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को मजबूती देती है, बल्कि आत्मिक शांति का अनुभव भी कराती है। इस यात्रा का महत्व जगदुरु शंकराचार्य ने भी स्पष्ट किया था कि यह केवल तीर्थ नहीं, बल्कि सनातन धर्म के सिद्धांतों को आत्मसात करने का अवसर है। उन्होंने सनातन धर्म को पुनर्जीवित करने और उसके प्रचार-प्रसार के लिए भारत के चार कोनों में चार मठों (पीठों) की स्थापना की, जिन्हें चार धाम के नाम से जाना जाता है, जो हैं- बद्रीनाथ (उत्तर), द्वारका (पश्चिम), पुरी (पूर्व) और रामेश्वरम (दक्षिण) । किन्तु आप यदि इन चार धामों की यात्रा नहीं कर पाते हैं तो केवल उत्तराखंड के चार धाम की यात्रा करने से सभी कष्ट दूर हो सकते हैं।

इसी महीने वैसाखी का पावन पर्व भी हमें नई ऊर्जा और समृद्धि की सीख देता है। यह सिर्फ फसलों की कटाई का उत्सर्ज नहीं, बल्कि सिख धर्म के दर्शन और सेवा की परंपरा का प्रतीक भी है। अप्रैल का महीना जहां व्रत-त्यौहारों की श्रृंखला लेकर आता है, वहीं बदलते मौसम के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। आयुर्वेद के अनुसार, इस दौरान पित्त दोष बढ़ता है, जिससे एलर्जी, त्वचा रोग और पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। गर्मियों में शरीर को शीतलता प्रदान करने वाली चीजों का सेवन करें जैसे तरबूज, खरबूजा इत्यादि। इन दिनों सत्तू और बेल का शरबत आपके लिए अति उत्तम है। विशेषकर अपने बच्चों का ध्यान रखें क्योंकि तेज धूप के कारण कई बच्चे स्कूल में बेहोश हो जाते हैं। इससे बचने के लिए उन्हें भर पेट नाश्ता खिलाकर भेजें, अधिक जानकारी के लिए लेख जरूर पढ़ें। अतः संतुलित आहार और सही दिनचर्या अपनाना आवश्यक है।

इस अंक में हम चार धाम यात्रा, वैसाखी, स्वास्थ्य, व्रत और शंकराचार्य जी के विचारों पर विस्तृत चर्चा कर रहे हैं। हमें विश्वास है कि ‘साधनापथ’ का यह विशेष अंक आपको व्यवहारिक ज्ञान और सकारात्मकता से समृद्ध करेगा।

स्वस्थ रहें और आशावादी बने रहें।

धन्यवाद।

आपका…
नरेन्द्र कुमार वर्मा
nk@dpb.in