अगर आप चाहती हैं कि आपका लाडला अन्य सब्जेक्ट्स की तरह की मैथ्स में भी आगे रहे तो इसके लिए आपको पहली कोशिश करनी होगी। अपने रोजाना की चीजों में मैथ्स के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और उसे छोटी- छोटी चीजों में हिसाब करने देने की आजादी के साथ आप मैथ्स से उसे प्यार करने में मदद कर सकती हैं। आप यह सोचें कि जब इंग्लिश या अन्य सब्जेक्ट को आप स्कूल के बाहर भी पढ़ते और समझते हैं तो मैथ्स पढ़ने के लिए सिर्फ स्कूल का एक पीरियड ही क्यों!

मनीषा के 7 वर्षीय बेटा प्राकृतिक को रिजल्ट में हमेशा बी प्लस ही मिलता है। मनीषा लाख चाहती है कि उसके बेटे को भी ए प्लस मिले लेकिन मैथ्स में कमजोर होने की वजह से प्राकृतिक को ए ही मिल पाता है। मनीषा समझ नहीं पाती है कि आखिर वह अपने बेटे को मैथ्स में मजबूत कैसे बनाए। यह समस्या कई बच्चों की है और उनकी मांओं को इससे निकलने  का रास्ता नजर नहीं आता। जबकि सचाई तो यह है कि रोजाना के अधिकतर काम करते समय आप मैथ्स का इस्तेमाल करती हैं। फिर चाहे धोबी को कपड़े देती हों या जूते खरीदती हों। समय देखती हों या रास्ता मापती हों। मैथ्स आपकी दिनचर्या में रचा- बसा है। इसके बावजूद आप में से अधिकतर मांएं यही कहती फिरती हैं कि मेरा बच्चा मैथ्स में कमजोर है। क्या आपने कभी यह जानने की कोशिश की है कि आपका बच्चा मैथ्स में क्यों कमजोर है और उसे किस तरह मजबूत किया जा सकता है। दरअसल मैथ्स के लिए प्रैक्टिस की आवश्यकता पड़ती है और यह शुरुआत आप उसके बचपन से ही कर सकती हैं।

खुद बनें उदाहरण

कई सर्वेक्षण और रिसर्च बताते हैं कि अधिकतर बड़े यही कहते हैं कि स्कूल में उन्हें मैथ्स पढ़ना बिल्कुल पसंद नहीं था। यदि आप ऐसे ही लोगों में से एक हैं तो इस बात की जानकारी कभी अपने बच्चे को न होने दें। बल्कि उसके गणित को मजबूत करने के लिए हमेशा आगे बढ़ें और उसकी मदद करें। उसे जताएं कि मैथ्स से जुड़े हर काम को करने में आप आत्मविश्वासी हैं। फिर चाहे आप अपने चेकबुक के बैलेंस का ध्यान रखती हैं या रुपये गिनती हैं। आप विभिन्न प्रोफेशन में मैथ्स की महत्ता को रेखांकित भी कर सकती हैं। उसे यह बताएं कि वह आगे चल कर बड़े होने पर चाहे जिस प्रोफेशन को भी चुनेगा, उसमें मैथ्स की जरूरत पड़ेगी ही। आर्किटेक्ट, मेडिसिन, फैशन डिजाइनिंग, रेस्टोरेंट मैनेजमेंट से लेकर कंप्यूटर प्रोग्रामिंग तक के प्रोफेशन में मैथ्स की अहमियत है।

रोजाना करें इस्तेमाल

स्कूल के बाहर मैथ्स से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने में अपने बच्चे को प्रोत्साहित करें। राशन की दुकान पर उसे बिस्कुट के चार पैकेट की कीमत जोड़ने को कहें। कर या बाइक में उसे कहें कि वह स्पीड को ध्यान में रखकर गंतव्य तक पहुंचने में लगने वाले समय को जोड़े। डिस्काउंट पर मिलने वाले सामान की कीमत लगाने को कहें। खेल- खेल में ऐसे कई काम हैं, जिनमें मैथ्स की जरूरत पड़ती है और रोजाना ऐसे जोड़ते- घटाते वह कब मैथ्स की बारीकियों को सीख लेगा, आपको खुद भी पता नहीं चलेगा।

खुद भी रहें जागरुक

आपके लिए यह जानना आवश्यक है कि आपके बच्चे को क्लास में किस तरह का मैथ्स पढ़ना है। इसके लिए आप वेबसाइट की मदद ले सकती हैं या उसके शिक्षक से इस बारे में पूछें। आपके बच्चे को क्या पढ़ना है, यह जानने के बाद आप घर पर उसे इससे जुड़े मैथ्स के खेल से जोड़ सकती हैं।

मैथ्स होमवर्क

क्या आपका बच्चा मैथ्स के होमवर्क आसानी से कर लेता है या उसे समस्या होती है।, यदि आपको इस सवाल का जवाब पता है तो आपका काम आसान हो जाएगा। यदि उसे समस्या होती है तो आप इसमें उसकी मदद करें। अपने बच्चे के टीचर से मिलकर स्कूल में पढ़ाए जाने वाले तरीके की जानकारी लें। कहीं ऐसा न हो कि आप उसे घर में अलग तरीके से समझाएं और स्कूल में वह अलग तरीने से मैथ्स सीख रहा हो। ऐसे में बच्चे का विकसित होता दिमाग उलझकर रह जाएगा।

छोटी- छोटी बातों पर ध्यान

अपने बच्चे के रोजाना के होमवर्क करने के दौरान आवश्यक है कि आप उसकी छोटी- छोटी बातों पर भी ध्यान दें। उसने सही जवाब लिखा है या नहीं, उसका अंकगणित तो ठीक है, इन मुद्दों पर अपनी नजर रखें। बेहतर होगा कि मैथ्स का होमवर्क करने का समय फिक्स कर दें। खुद भी उस समय पर फ्री रहें तो अच्छा रहेगा। इस तरह से उसे भी पता होगा कि उसे किस समय पर मैथ्स पढ़ना है और कब आप उसकी मदद कर सकती हैं।

मैथ्स आधारित खेल

कई खेलों में मैथ्स का उपयोग होता है जो आपके बच्चे के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। शतरंज, लूडो, कैरम, व्यापारी जैसे खेल सहायक हो सकते हैं। इससे आपके बच्चे को गिनने, घटाने, जोड़ने में महारत हासिल हो जाएगी।

मैथ्स आधारित किताबें

अधिकतर स्कूल में स्टूडेंट्स को रिझाने के लिए खेल आधारित पढ़ाई की शुरुआत की गई है। लेकिन इंग्लिश या हिस्ट्री में मैथ्स घुसाना भला कहां संभव है। इसलिए ऐसी किताबें पढ़ी जा सकती हैं जिसमें चरित्र किसी समस्या को मैथ्स या लॉजिक के आधार पर सुलझाते हैं। एलिनियर जे पिंसेज की “वन हंड्रेड एंग्री एंट्स’, एलीन फीडमैन की “द किंग्स कमिनर्स’ और टूयोसी की “सोक्रेट्स एंड द थ्री लिटिल पिग्स’ इसके बेहतरीन उदाहरण हैं।

अंतिम लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य

हम अपने बच्चों को लिखने, पढ़ने और बोलने की आजादी स्कूल के बाहर भी देते हैं लेकिन मैथ्स के लिए सिर्फ कक्षा का 30 या 45 मिनट ही क्यों? बाकी विषयों की तरह ही बच्चों को मैथ्स के लिए भी स्कूल से बाहर समय मिलना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि आप रुटीन में भी मैथ्स के इस्तेमाल को बढ़ावा दें।

 

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