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आज के पेरेंट्स भले ही अपने आप को बहुत ही मॉर्डन और खुले विचारों का मानें। लेकिन जब बात टीनएज बच्चों के रिलेशनशिप की आती है तो सारी आधुनिकता गायब हो जाती है। यही कारण है कि बच्चे पेरेंट्स से रिलेशनशिप की बातें छिपाते हैं।
Parenting Tips for Teenage Relations: हाल ही में आई फिल्म ‘सैयारा’ ने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं। यह फिल्म खासतौर पर यूथ को बेहद पसंद आई। फिल्म की स्टोरी से लेकर इमोशन तक आज की जेन जी के दिल को छू गया। दरअसल, चीन में कदम रख चुके अधिकांश जेन जी इस समय अपने खास दौर से गुजर रहे हैं। इस दौरान टीनएजर्स का लिंकअप, हुकअप और ब्रेकअप होना बहुत ही स्वाभाविक बात है। लेकिन इस समय हर पेरेंट की जिम्मेदारी थोड़ी और बढ़ जाती है।
बच्चे से करें इमोशनल फ्रेंडशिप

आज के पेरेंट्स भले ही अपने आप को बहुत ही मॉर्डन और खुले विचारों का मानें। लेकिन जब बात टीनएज बच्चों के रिलेशनशिप की आती है तो सारी आधुनिकता गायब हो जाती है। यही कारण है कि बच्चे पेरेंट्स से रिलेशनशिप की बातें छिपाते हैं। अधिकांश भारतीय परिवार आज भी इन बातों पर बच्चों से खुलकर बात नहीं करते हैं। बच्चे यही सोचते हैं कि पेरेंट्स उनकी बात समझ नहीं पाएंगे। इसलिए पेरेंट्स का बच्चों के साथ इमोशनल फ्रेंडशिप करना जरूरी है। एक ऐसी फ्रेंडशिप जहां बच्चे खुल कर आपको अपने दिल की बात बता सकें। उन्हें एक सुरक्षित माहौल दें।
इमोशनल ट्रोमा में दें साथ
मनोचिकित्सक डॉ.अनीता गौतम के अनुसार टीनएज में बच्चों का एक दूसरे के प्रति आकर्षित हो जाना और रिलेशनशिप शुरू करना बहुत ही स्वाभाविक है। लेकिन ये पेरेंट्स की जिम्मेदारी है कि टीनएज में बच्चों की पढ़ाई, करियर के साथ ही उनकी दोस्ती और रिलेशनशिप पर भी नजर रखें। हालांकि इस दौरान उनकी प्राइवेसी में दखल न दें। अगर बच्चे का ब्रेकअप होता है तो वह इमोशनल ट्रोमा फील कर सकता है। इस ट्रोमा से उबरने में पेरेंट्स को बच्चों की हर संभव मदद करनी चाहिए।
सलाहकार नहीं, सहारा बनें
टीन एज में पेरेंट्स को बच्चों की इमोशनल हेल्थ पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए। अगर बच्चा अचानक से परेशान, दुखी रहने लगा है तो उससे कारण जरूर पूछें। यदि आपको उसके ब्रेकअप का पता चलता है तो उसका सहारा बनें, सलाहकार नहीं। बच्चे को कभी भी जज न करें। शांत मन से बच्चे की भावनाओं का ध्यान रखें। उसे कंफर्टेबल फील करवाएं, जिससे वह आपसे अपना दुख बांट सके। बच्चे को कभी ये न बोलें कि ‘हमने ऐसा कभी नहीं किया’, ‘हमारे जमाने में ऐसा नहीं होता था’,’ऐसे चक्करों में रहोगे तो यही होगा’। ये बातें बच्चों का दुख कहीं ज्यादा बढ़ा सकती हैं।
बनें बच्चे की हीलिंग पावर
मनोचिकित्सक डॉ.अनीता गौतम के अनुसार अगर बच्चा लगातार चुप, गुमसुम, उदास है तो उसे अकेला न छोड़ें। उसे पर्सनल स्पेस दें। वो एक्टिविटी करवाएं, जो उसे अच्छी लगती हैं। आप उसकी स्थिति को समझने की कोशिश करें। क्योंकि जब टीन एज बच्चा ब्रेकअप के दौर से गुजरता है तो उसका दिल ही नहीं भरोसा और कॉन्फिडेंस भी टूट जाता है। आपको उसके लिए एक हीलिंग पावर के रूप में काम करना होगा। इससे वह इस परेशानी का आसानी से सामना कर पाएगा।
पहल करके दें सेक्सुअल एजुकेशन
एक उम्र के बाद बच्चे को सेक्सुअल एजुकेशन देना भी बहुत जरूरी है। आज के दौर में सभी बच्चों के हाथ में मोबाइल और इंटरनेट की आसान एक्सेस है। ऐसे में कुछ जानना उनके लिए मुश्किल नहीं है। लेकिन वह कुछ गलत सीखें, इससे पहले ही आप उन्हें सही बातों की जानकारी दें। सेक्सुअल एजुकेशन के बारे में बच्चे से खुलकर बात करें।
