Child Care: बच्चे को एक बेहतर इंसान बनाने की ख्वाहिश तो हर पैरेंट की होती है। लेकिन ऐसा केवल तभी होता है, जब बच्चे अपने पैरेंट की बातों को सुनें और समझें। हालांकि, अधिकतर घरों में ऐसा होता ही नहीं है। अमूमन हर पैरेंट की यही शिकायत होती है कि उनका बच्चा उनकी बात नहीं सुनते। ऐसे में कभी-कभी पैरेंट्स को गुस्सा भी आ जाता है और वे बच्चों पर गुस्सा भी हो जाते हैं। हालांकि, गुस्सा होने से किसी बात का हल नहीं निकलता है। हो सकता है कि उस वक्त के लिए तो बच्चा शांत हो जाए, लेकिन वह फिर से आपकी बात नहीं सुनेगा। इसलिए, यह जरूरी है कि आप बच्चे के स्वभाव में परिवर्तन लाने के लिए कुछ आसान तरीकों को अपनाएं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपके साथ कुछ ऐसे ही टिप्स शेयर कर रहे हैं-
छोटी रखें बात

बच्चों का स्वभाव यह होता है कि वह लंबे समय तक एक जगह टिककर नहीं बैठते हैं। ऐसे में अगर आप उन्हें कोई बात बताना या समझाना चाहते हैं तो हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि आप अपनी बात छोटी ही रखें। अगर आप अपनी बात बहुत लंबी रखेंगे तो उनका इंटरस्ट ही चला जाएगा। ऐसे में वे फिर आपकी बातों पर ध्यान नहीं देंगे।
सीधी हो बात

कई बार पैरेंट्स बच्चों के सामने घुमा-फिराकर बात करते हैं, जिससे वे अपने पैरेंट्स की बातों का वास्तविक अर्थ नहीं समझ पाते हैं। ऐसे में जब उन्हें बात का अर्थ ही समझ नहीं आता है तो ऐसे में वे उनकी बात भी नहीं सुनना चाहते हैं। इसलिए, अगर आप चाहते हैं कि बच्चा आपकी बात सुने तो आप सीधे तौर पर अपनी बात उनके सामने रखें। जिससे वे बेहतर तरीके से उसे समझ पाएं और फॉलो कर सकें।
मानें उनकी बात

अगर आप बच्चे से कुछ करने के लिए कहते हैं और वह मना कर देता है तो यकीनन आपको काफी बुरा लगता है। लेकिन क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है कि उसमें यह आदत कहां से आई। कहीं इसके जिम्मेदार खुद आप ही तो नहीं। कई बार पैरेंट्स अपने बच्चे की हर बात को मना कर देते हैं। जिससे बच्चों को काफी बुरा लगता है। ऐसे में फिर वे भी अपने पैरेंट्स की बातों को अनसुना करना शुरू कर देते हैं। इसलिए, बच्चे की हर बात पर ना नहीं कहें। अगर उनकी कोई डिमांड सही नहीं है तो उन्हें एक सॉलिड रीजन देते हुए ही मना करें। इससे बच्चे को यह समझ में आएगा कि आप उसकी भलाई के लिए ही उसे ना कह रहे हैं।
ना दिखाएं गुस्सा

यह पैरेंट्स की सबसे बड़ी गलती होती है। अक्सर बच्चे अपने पैरेंट्स की बात नहीं सुनते हैं तो ऐसे में पैरेंट्स बच्चों पर गुस्सा हो जाते हैं और कभी-कभी तो उन पर चिल्लाने भी लगते हैं। उस समय तो बच्चा डरकर चुप हो जाता है, लेकिन उसके वास्तविक स्वभाव में परिवर्तन नहीं आता है। बार-बार ऐसा होने की स्थिति में वह और भी अधिक जिद्दी बन जाता है।
