Summary:नंबरों से परे सोच, बच्चों को बनाती है आत्मविश्वासी और मजबूत
जनवरी का मौसम बच्चों के लिए एग्ज़ाम स्ट्रेस लेकर आता है। ऐसे में अगर पेरेंट्स लाइफ स्किल्स सिखाएं, तो बच्चे परीक्षा ही नहीं, ज़िंदगी के हर दबाव से बेहतर तरीके से डील करना सीख सकते हैं।
Childhood Pressure Handle: जिंदगी किसी की भी आसान नहीं होती। अगर हम इस समय बच्चों की बात करें तो जनवरी का यह मौसम अपने साथ साथ एग्जाम के तनाव को भी लाते है। बच्चों को एग्जाम और नंबर लाने का एक अजीब तरह का स्ट्रेस रहता है। वे एक किस्म का प्रेशर खुद में फील करते हैं। लेकिन अगर हम कुछ बेसिक स्किल बच्चों को सिखाएंगे तो वह एग्जाम क्या किसी भी प्रेशर को आसानी से डील कर का हुनर स्वयं में डवलप कर लेंगे। एक पेरेंट होने के नाते जानते हैं वो स्किल्स क्या हैं जो बच्चे को जीवन का सामना करने के लिए जरुरी हैं।
अपनी इज्जत करना
उन्हें बताएं कि ना तो वो ना हर किसी के फेवरेट हो सकते हैं और ना ही हर किसी को खुश कर सकते हैं। इसका अर्थ कतई यह नहीं है कि आप उन्हें सेल्फ सेंटर्ड बना रहे हैं। उन्हें बताएं कि अपने पेरेंट्स के लिए जवाबदेह और ईमानदार रहना उनकी जिम्मेदारी है। हम अक्सर अपने बच्चों को दूसरों की इज्जत करना सिखाते हैं। आप उन्हें अपनी इज्जत करना भी सिखाएं। उन्हें बताएं कि हर कोई उन्हें समझे, उनका यह मान करे यह जरुरी नहीं है।
असहजता को डील करना
यह बात सच है कि जीवन में हमें हमेशा अपने मन का नहीं मिलता। अगर सभी कुछ आपकी मर्जी के हिसाब से होने लगे तो हर किसी को अच्छा ही लगेगा। लेकिन आपको अपने बड़े होते बच्चों को यह बात सिखानी होगी कि अगर चीजें उनके मन के अनुसार नहीं हो रही है तो भी उन्हें उसे स्वीकार करना होगा। चाहे वो उसमें असहज हों। असहज होने की यह स्वीकार्यता उन्हें जीवन में बहुत कुछ सिखाएगी।
फीलिंग को एक्सप्रेस करना

कुछ बच्चे अपनी फीलिंग को बहुत अच्छे से एक्सप्रेस कर पाते हैं। वहीं कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो व्यक्त करना तो बहुत दूर की बात है अपनी भावनाओं को खुद ही समझ नहीं पाते। ऐसे में पेरेंट होने के नाते यह जिम्मेदारी आपकी है कि वे अपनी भावनाओं को समझ कर उन्हें व्यक्त कर पाएं। जब इंसान स्वयं को व्यक्त करना सीखता है तो कहीं ना कहीं वह खुद को दुनिया के साथ डील करना भी सीखता है।
मदद मांगना
जिंदगी में ऐसा कोई इंसान नहीं है जो हर काम अपने दम पर कर सकता है। हर किसी को किसी ना किसी की जरुरत होती है। अपने बच्चे को संस्कारी और विनम्र होना तो हम सिखाते ही हैं। उसे यह भी सिखाएं कि एक टीम की क्या अहमियत है। उसे समझाएं कि दूसरों की मदद करना और दूसरों से मदद मांगना कोई बुराई की बात नहीं है।
सेल्फ वर्थ मार्क्स के बिना

हर इंसान की अपनी एक अहमियत होती है। लेकिन जब आपके बच्चे स्कूल या कॉलेज में होते हैं। अक्सर उनसे मार्क्स के बारे में ही लोग बात करते हैं। लेकिन अपने बच्चे को बताएं कि उनके मार्क्स के बिना उनकी अपनी एक सेल्फ वर्थ है। मार्क्स के कम या ज्यादा होने से उनकी सेल्फ वर्थ में कोई कमी नहीं आएगी। जब मार्क्स के इतर वो पर्सनालिटी को देखेंगे तो वह जानेंगे कि वो क्या हैं।
यह बातें आपके बच्चों के लिए बहुत जरुरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि जैसे जैसे उनकी उम्र बढ़ती जाएगी वो अपन अंदर समाज का एक दबाव महसूस करने लगते हैं। बस इस दबाव को जीने की कला उन्हें आनी चाहिए। याद रखिए यह सभी बातें स्कूल कभी नहीं सिखाएगा।
