Wo Chudail Thi
Wo Chudail Thi

Horror Story in Hindi: बाहर जोरों की बारिश हो रही थी और मैं फुरसत में अखबार के पन्ने पलट रहा था अखबार में एक पृष्ठ पर भूत की कविता पढ़ रहा था साहित्यकार था इसलिए कविताएं पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है पढ़ते-पढ़ते जाने कब मैं अपनी स्मृतियों में खो गया।
10 साल पीछे एक आंखों देखी सत्य घटना दिमाग में घूमने लगी। रक्षाबंधन के 2 दिन पहले धर्मपत्नी जी बोली इस बार का रक्षाबंधन मेरे मायके में ही करेंगे और बच्चे भी जिद कर रहे हैं। मैंने सहमति में अपना सिर हिला दिया , रक्षाबंधन के दिन हम सब मेरी ससुराल मैं बस से सुबह रवाना हुए और 3 घंटे के सफर के बाद पहुंच गए। दिनभर की गपशप और शाम के समय रक्षाबंधन का त्योहार सभी परिवार जनों ने साथ मिलकर मनाया , रक्षाबंधन का त्यौहार था तो धर्मपत्नी जी की तीनों बहनें भी और उनके पति देव जी सब पहुंच चुके थे 10:00 बजे सब ने खाना खाया और हंसी मजाक का दौर चल पड़ा । बातों ही बातों में कब 12 बज गए और फिर सोने की तैयारी करने लगे। वह पूनम की रात थी । हम सब धीरे-धीरे नींद की आगोश में जा रहे थे, या यूं कहें सब सो चुके थे और मैं नींद की चादर ओढ़ कर सोया ही था की रात के 1:30 बजे के आसपास सामने वाले घर से बच्चे के रोने की आवाज और महिला के रोने की आवाज कानों में सिहरन पैदा कर रही थी। कच्ची नींद में था तो आंखें खुली और आवाज की तरफ ध्यान केंद्रित करने का प्रयास किया , यह आवाज और कर्कश होती जा रही थी। ऐसी डरावनी आवाज जिसमें धीरे-धीरे मेरे रोंगटे खड़े हो रहे थे और बेचैनी बढ़ती जा रही थी क्योंकि मुझे मालूम था सामने वाला घर 5 सालों से खाली पड़ा हुआ है। इसमें कोई नहीं रहता मगर यह आवाज उसी घर से आ रही थी और इसका एक किस्सा मैंने भी सुन रखा था। 5 साल पहले इसमें एक नव युगल दंपत्ति रहते थे और इन में अक्सर पुत्र के लिए लड़ाई झगड़े होते रहते थे जब उस महिला की डिलीवरी हुई तो उसने पुत्री को जन्म दिया एक दिन उसके पति ने उसको इतना पीटा कि वह बेहोश हो गई और उसका पति उसको मृत समझ कर रातो रात घर के पास में ही एक श्मशान है उस में चोरी छुपे उसको बेहोशी में जिंदा ही जला दिया । अभी भी उसी घर से डर पैदा करने वाली बच्चे के रोने की आवाज और कभी महिला के रोने की आवाज मेरे कानों में सिहरन पैदा कर रही थी।
कमरे की लाइट बंद थी और मैं जिस कमरे में सो रहा था वहां एक खिड़की है, जहां दूर एक खंबे में लाइट जल रही है जिससे हल्का-हल्का उजाला आ रहा था और सामने शमशान धुंधला दिखाई दे रहा था। यह आवाजें जब हद से पार हो गई तो मुझसे रहा नहीं गया और मैं उठा और खिड़की के पास आकर जब मैंने देखा तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। 100 फुट की दूरी रही होगी एक महिला जिसके बाल खुले हुए कपड़े के नाम पर सिर्फ एक ब्लाउज और पेटिकोट पहन रखा था । धीरे धीरे रोबोट की तरह सन्नाटे की चीरते हुए आगे बढ़ रही थी और मैं एकटक उसको देखा जा रहा था। जैसे मेरा दिमाग सुन्न हो गया हो , पैर जम गए हो और मुंह से कोई आवाज नहीं निकल रही हो , बस उसको धीरे-धीरे अपनी तरफ आते देखा जा रहा था मेरा ध्यान गया कि अब किसी महिला और बच्चे के रोने की आवाज नहीं आ रही थी। मगर वह साक्षात चुड़ैल के रूप में मेरी तरफ बढ़ रही थी कमरे की लाइट बंद थी मैं उसको देख सकता था मगर शायद वह मुझे नहीं देख सकती थी।
जैसे ही 10 फीट की दूरी रही होगी ।वह बिल्कुल खिड़की के पास आ ही गई थी इतने में मैंने जल्दी से दरवाजा खोला जैसे ही दरवाजा खुला मुझे अगल बगल में कोई नहीं दिखा और एकदम से बिल्लियों की आवाज आई और अचंभित करने वाली बात यह थी कि वहां अगल बगल में कोई बिल्ली भी मेरे को नजर नहीं आई। मैंने जल्दी से सभी को उठाया कुछ लोग छत पर गए कुछ लोग बाहर गए ना उस घर से अब कोई आवाज आ रही थी ना वह चुड़ैल आसपास थी, ना कोई कुत्ते बिल्ली वहां नजर आ रहे थे। 1 घंटे तक हम उस चुड़ैल पर परिचर्चा ही करते रहे । परिचर्चा के दौरान मुझे बताया यह चुड़ैल अक्सर अपने घर के आसपास मोहल्ले में रात को 1:30 2:00 बजे घूमती रहती है और ऐसा पूरे मोहल्ले में प्रचलित है। अगर कोई इसको रात में देख ले या ये देख ले तो कुछ महीनों में ही उसकी मृत्यु हो जाती है । इसके ताजा उदाहरण भी मेरे को बताए जिस जिस को यह मिली अभी तक उस मोहल्ले से 4 लोग मर चुके हैं सुबह जब में उठा तो पूरे मोहल्ले में उस चुड़ैल का ही चर्चा था जो शाम ढले तक चलता रहा वह पूनम की रात थी ऐसा कहते हैं कोई विशेष दिन यह नजर आते हैं मगर इसको मैंने ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया और रक्षाबंधन का त्यौहार मना कर हंसी खुशी हम सब वापस अपने घर को आ गए मगर जब भी अपनी ससुराल में जाता हूं और रात को उसी कमरे में सोता हूं तो वह किस्सा दिमाग में घूमने लगता है मगर डर नहीं लगता , अभी भी दिमाग में यह चलता है क्या वह चुड़ैल वही महिला थी। जिस को जिंदा जला दिया गया था। शायद उसकी इच्छा अधूरी रह गई जिससे वह भटक रही है और आज भी भटक रही है

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