summary: जन्मदिन का सबसे अनमोल तोहफा
जन्मदिन पर नमन ने दिखाया कि खुशियाँ बाँटने से बढ़ती हैं, जब उसने अपनी नई साइकिल दोस्त को उपहार में दे दी। यह भावुक कहानी दोस्ती, दया और मानवीय मूल्यों का सुंदर संदेश देती है।
Short Story in Hindi: मम्मा, मेरी पुरानी साइकिल दुकान पर देकर उससे नयी साइकिल लेने में हमें पैसे भी देने पड़ते हैं क्या? नमन ने अचनाक ये बात पूछी तो माँ समझ गयी, उसका जन्मदिन आने में 10 दिन रह गए थे। तभी नमन इतना खुश हो कर ये बात पूछ रहा है। शाम को माँ ने पापा को बताया, लगता है इस बार नमन का मन नई साइकिल लेने का है। पापा ने कहा ठीक है कल मार्केट से ले आएंगे। मां ने उन्हें बताया की नमन को पास वाली दुकान पर कोई साइकिल पसंद आयी थी, उसके लिए वहीं से साइकिल लेंगे और पुरानी साइकिल किसी जरूरतमंद को दे देंगे।
पापा को ये आईडिया अच्छा लगा। अगले दिन तीनों साइकिल की दुकान पर पहुंचे तो नमन को सलेटी रंग की ब्लू हैंडल वाली साइकिल बहुत पसंद आई। लेकिन साइकिल घर लाने के बाद हर बार की तरह नमन ने उसकी पॉलिथीन और कवर कुछ भी नहीं हटाया। जब भी नमन कुछ नया सामान घर लेकर आता तो सबसे पहले घर आ कर उसकी पैकिंग खोलता और घंटों तक उस नए सामान के साथ खेलता रहता था।
आज नमन का जन्मदिन था, सुबह से वो जिद पर अड़ा था,आज घूमने जाना है और वो भी अपने स्कूल के सामने वाली सड़क पर। उसने मम्मी-पापा को बताया वहां कुछ ख़ास है जो उन्हें भी बहुत पसंद आएगा। कार में बैठने से पहले उसने पापा से अपनी नई साइकिल साथ ले जाने को कहा। स्कूल के सामने वाली रोड आते ही नमन ने कहा पापा दो मिनट मेरे स्कूल के सामने कार रोक लीजिएगा।

पापा ने जैसे ही स्कूल के सामने कार रोकी, नमन माँ का हाथ पकड़ के एक बच्चे के पास ले गया । वो बच्चा सड़क के किनारे खड़े होकर रंग-बिरंगे गुब्बारे बेच रहा था। नमन को देखते ही वो बच्चा ख़ुशी से उछल पड़ा, और बोलै भईया आप छुट्टी वाले दिन स्कूल के सामने आप क्या कर रहे हो। नमन ने उसके सवाल का जवाब देने की जगह उसे गले लगा कर हैप्पी बर्थ-डे कहा।
माँ-पापा कुछ पूछते उससे पहले ही नमन ने कहा ये मेरा प्यारा दोस्त गुल्लू है। रोज़ जब हम स्कूल से बाहर आते हैं तो ये हमें मिलता था। एक दिन मैंने इससे दोस्ती करने के लिए कहा और ये बहुत खुश हो कर मान गया। जब मैंने इससे इसका बर्थडे पुछा तो इसे उसका मतलब ही नहीं पता था। तब मैंने इसे समझाया और कहा की अब से हम दोनों एक ही दिन अपना जन्मदिन मनाएंगे। मैंने कुछ दिनों में ही जान लिया की इसे सलेटी और नीला रंग बहुत पसंद है, नमन के इतना कहते ही पापा कार की तरफ गए और साइकिल निकाल लाए और गुल्लू के सामने ला कर रख दी।

साइकिल देख कर गुल्लू की आँखों में आँसुंओं से भरी चमक आ गयी। उसने कहा भईया आपको कैसे पता मुझे एक साइकिल लेने का बहुत समय से मन था , लेकिन मै कभी इतने पैसे नहीं जोड़ सकता की पुरानी साइकिल भी ले पाता । नमन ने कहा, जब भी मै स्कूल से बाहर आता था, मै देखता था तुम मुझसे बात करते हुए, हर बच्चे की साइकिल को ध्यान से देखते थे, तभी मुझे समझ आ गया था तुम्हे साइकिल बहुत पसंद है। तुम्हे इसकी जरुरत भी थी, हर रोज़ तुम इतनी दूर से पैदल यहाँ आते हो।
आज से तुम आराम से साइकिल पर आना। उन्होंने गुल्लू के घर जा कर उसके मम्मी-पापा से उसे घूमने ले जाने की परमिशन ली और साथ में उसकी मम्मी को भी अपने साथ घुमाने ले गए। आज मम्मी-पापा को नमन पर बहुत गर्व हो रहा था।
