Hindi Motivational Story: प्रो० विनय जीवन भर लेक्चर और कॉलेज इसी में जीवन के उस दौर पे आ गए थे जब बुढ़ापा उनके शरीर से ज्यादा उनके चेहरे पर दिखने लगा था पत्नी के जाने के बाद इकलौते लड़के को अकेले ही पाला। घर ,बच्चा ,नौकरी इनमें ही जीवन को बस जिम्मेदारी मान कर काट रहे थे । कॉलेज के बच्चे प्रो० विनय को बहुत प्यार करते थे विनय ने अपना जीवन बेटे में ही लगा दिया था अपने इकलौते लड़के के प्रेम प्रसंग को जब साथ के प्रोफेसर के मुंह सुने तो जैसे अंदर से टूट गए आंखों में अपने और पत्नी के सपने आंसू के रूप में गालों से नीचे आ रहे थे । शाम जब विनय घर आए तो बेटा राज और एक लड़की जीन्स और टी शर्ट में सोफे पे बैठे थे। प्रो० विनय जैसे ही आए तो लड़की ने आकर हैलो अंकल कहा। मैंने भी प्रत्युत्तर में हैलो ही कहा। तभी लड़की की माँ बोली, अंकल के पैर छुओ बेटा। हमारी इकलौती बेटी है भाई साहब, जब पीहू ने आपके बेटे राज के विषय में बताया तो मैं और इसके पापा तुरंत तैयार हो गए हमारी बेटी खुश रहे और हमको क्या चाहिए। इतने में विनय के पैर छूने पीहू उठी तो ,”रहने दो बेटा, उसकी कोई जरूरत नहीं है। पीहू बातों से एकदम बिंदास, खिलखिलाकर हँसने वाली, अपनी माँ से हर बात पर तर्क वितर्क करती पीहू मेरे बेटे “राज” की पसंद ही नहीं प्यार भी है।
राज आज एक कॉफी भी बिना पूछे नहीं पीता था, आज एक लड़की को लाकर बैठा दिया था प्रो० विनय का दिल पत्थर का हो चुका था जैसे लोगों को उन्होंने देखा के लव मैरिज वाली शादी घर बर्बाद कर देती है बेटे को लेकर अलग हो जाएगी। यही डर विनय सता रहा था। बहुत जल्दी पत्नी के जाने के बाद सबने कहा दूसरी शादी को विनय ने यही सोच कर जीवन अकेले काट दिया के दूसरी मां बेटे राज को उतना प्यार नहीं देगी बेटा का जीवन खराब हो जाएगा। तभी से एक बहू की जो छवि विनय ने बना ली थी कि संस्कारी बहू लाऊंगा जो पूरा घर मंदिर के जैसे कर देगी ,लेकिन पीहू उसकी बिल्कुल उल्टा थी। बिल्कुल लड़कों की तरह वेश भूषा, हँसना, बोलना,अकड़ना भरा हुआ था उसमें, न देखने में उतनी खास न लजाती न शर्माती न जाने राज को क्या दिखा था इसमें !
बेटे की पसंद के बाद विनय कुछ बोलते भी तो क्या , चुपचाप दिल पर पत्थर रख कर शादी की रस्मों को पूरा करके पीहू अब घर आ गयी, लेकिन विनय का मन उसे लेकर हमेशा सशंकित रहता था। कहां साथ पढ़ा रहे प्रो० की बेटी मासूम गुड़िया सी बहू लाना चाहते थे विनय। अब कहां ये बहू कम आवारा लड़की ज्यादा लग रही थी।
अगले दिन सुबह से विनय को कॉलेज जाना था। सोचा था बहू आ जायेगी तो उसके हाथों की चाय पीकर अपने सुबह की शुरुआत करूँगा। लेकिन पीहू को देख कर मैंने अपना ये सपना भुला दिया था सुबह पूजा की घंटियाँ सुन कर मेरी नींद खुली, अभी छः भी नहीं बजे थे। बाहर निकल कर देखा, पीहू आरती की थाल लिए, पूरे घर में घूम रही थी। मुझे लगा मैं सपना देख रहा हूँ, तब तक वो पास आकर बोली डैडी जी प्रसाद लीजिये । आंखों को भरोसा तो नहीं हो रहा था पर!!
फ्रेश होकर बाथरूम से बाहर निकला तो मैडम चाय का कप लिए हाजिर थीं। चाय पीने के बाद बोली डैडी जी मुझे नाश्ते में रोटी और चीला बनाना ही आता है। आप लोग नाश्ते में क्या खाते हैं? पीछे से राज आकर बोला, जो भी तुम बनाओ हम वही खा लेंगे।
राज ने मेरा हैरान चेहरा देख कर पूछा,” क्या हुआ डैडी जी, चाय पसन्द नहीं आयी !
नहीं , बहुत अच्छी है!”
मैं मन ही मन भले ही डर रहा था लेकिन उसके दो दिन के व्यवहार से उसके जैसी बहू पाकर बहुत खुश भी था, पर खुशियों को भी कभी-कभी नजर लग जाती है ! सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था बेटे बहू के साथ विनय भी अपना मन लगा चुके थे , लेकिन दो दिन से विनय बहुत परेशान थे पीहू पूछती डैडी जी क्या हुआ ,कुछ नहीं बहू बस बोलकर रूम में चले जाते एक दिन कॉलेज में साथ के प्रोफेसर जिनकी बेटी के साथ राज का रिश्ता करना था किसी बात को लेकर बहस हो गई और टेंशन में विनय को हार्ट अटैक आ गया ! हॉस्पिटल ले जाया गया देखा आई सी यू के बाहर से देख रही पीहू घंटों तक रोती रही थी। जब भी अंदर आती तो कहती डैडी जी आप एकदम ठीक हो जायेंगे हॉस्पिटल के बिल, दवाइयों का खर्चा इस तरह से देती जैसे उसके अपने पापा का इलाज हो रहा हो ।
मैंने आई सी यू के बाहर खड़ी पीहू और राज को नम आँखों में ही देखा था। राज और पीहू मेरे सामने मजबूत चट्टान बनकर खड़े थे। घर आने के बाद भी पूरा ख्याल रखती । अपनी नई नवेली शादी के बावजूद देर रात तक मेरे साथ बैठी रहती ।
मासूम गुड़िया सी बहू का सपना देखने वाली ससुर को एक मजबूत बेटी मिल गयी थी। जिसका चोला पाश्चात्य था पर दिल एकदम देशी था ।हाँ मेरी पीहू साड़ी सूट बहुत कम पहनती है, वो हर रोज मेरे पैर भी नहीं छूती, उसकी आवाज भी धीमी नहीं है, उसे घर के काम भी नहीं आते, रोटी तो भारत के नक्शे जैसी बनाती है,और जब गुस्साती है तो….इतना के पूछिए मत ! वो एक आदर्श बहू की छवि से बिल्कुल जुदा है वो पर मेरी लाडली है|।
