sharenting side effects
sharenting side effects

Overview:

अपने बच्चों की उपलब्धियां हर माता-पिता के लिए अहम होती हैं, लेकिन ध्यान रखें इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि उनकी फोटोज और जानकारियां सोशल मीडिया पर पोस्ट करें। दरअसल, पिछले कुछ सालों में 'शेयरेंटिंग' का काफी चल आ गया है।

Sharenting Side Effects: हर माता-पिता की जिंदगी में ऐसे कई पल आते हैं, जब उन्हें अपने बच्चों की उपलब्धियों पर बहुत गर्व महसूस होता है। माता-पिता अपने बच्चों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करना नहीं भूलते। अपने बच्चों की उपलब्धियां, खुशियों के पल हर माता-पिता के लिए अहम होती हैं, लेकिन ध्यान रखें इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि उनकी फोटोज और जानकारियां सोशल मीडिया पर पोस्ट करें। दरअसल, पिछले कुछ सालों में ‘शेयरेंटिंग’ का काफी चल आ गया है। लेकिन यह कहीं न कहीं बच्चों पर गलत असर भी डालती है। क्या है शेयरेंटिंग और क्यों है ये नुकसानदायक यह जानना हर पेरेंट्स के लिए जरूरी है।

सोशल मीडिया के इस दौर में शेयरेंटिग काफी चल में है।
In this era of social media sharenting is quite popular.

सोशल मीडिया के इस दौर में शेयरेंटिग काफी चल में है। इसका मतलब है पेरेंट्स की ओर से अपने बच्चों के बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर करना। इस जानकारी में फोटो, वीडियो, रिजल्ट, उनकी फ्यूचर प्लानिंग, एडमिशन से जुड़ी बातें शामिल हो सकती हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार ‘शेयरेंटिंग’ एक तरह से डिजिटल ओवर शेयरिंग है। जिसमें माता-पिता बच्चों के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर कर देते हैं।  आमतौर पर हर पेरेंट्स को यह बात बहुत ही सामान्य लगती है, लेकिन असल में इसके कई दूरगामी परिणाम बच्चे और पेरेंट्स दोनों को भुगतने पड़ सकते हैं। क्योंकि एक तरह से शेयरेंटिंग से बच्चे की निजता और सुरक्षा के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक संबंधों और भविष्य की संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह माता-पिता और बच्चों के बीच दूरी का कारण भी बन सकती है।  

आज के समय में बच्चे अपनी सोशल इमेज को लेकर काफी सजग हैं। उन्हें एक स्पेस चाहिए और वह अपनी छवि को खुद गढ़ना चाहते हैं। लेकिन अगर पेरेंट्स शेयरेंटिंग के आदी हैं तो इससे बच्चे पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। कई बार पेरेंट्स जो फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर डालते हैं, हो सकता है कि बच्चा उसमें अपने कपड़ों, हाव-भाव या चेहरे को लेकर सहज न हो। ऐसे में वह एक अनकहे तनाव में आ जाता है, इसका असर उसकी मानसिक सेहत पर पड़ता है। इसलिए पेरेंट्स को सोशल मीडिया पर बच्चों से संबंधित जानकारी शेयर करने से पहले इस बात पर विचार करना चाहिए। या फिर पहले बच्चे को फोटो, वीडियो या जानकारी दिखाकर उससे सहमति लेनी चाहिए। इससे बच्चे सहज भी रहेंगे और उन्हें यह महसूस भी होगा कि पेरेंट्स उन्हें अहमियत देते हैं।

कई बार अति उत्साह में पेरेंट्स बच्चों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करने के साथ ही ‘नेक्स्ट गोल’, ‘अगली उपलब्धि’, ‘कभी और पड़ाव पार करेंगे’,’रुकना नहीं है, दूर तक जाना है’ जैसी बातें लिख देते हैं। यहां पेरेंट्स का उद्देश्य बच्चों को मोटिवेट करना होता है, लेकिन कभी-कभी यही मानक बच्चों के लिए दबाव बन जाते हैं। इससे बच्चे तनाव में आ सकते हैं। अगर बच्चा माता-पिता के सेट गोल को प्राप्त नहीं कर पाता तो उसे सैकड़ों-हजारों लोगों के सामने शर्मिंदा होने का डर रहता है। इससे उसका कॉन्फिडेंस टूट सकता है। क्योंकि जो बातें घर की चारदीवारी में होनी चाहिए थीं, उन्हें पेरेंट्स ने सोशल मीडिया पर शेयर कर सार्वजनिक कर दिया। इसलिए अपने बच्चों को अपनी इच्छाएं या गोल आप निजी तौर पर बताएं, न ही सोशल मीडिया पर।

शेयरेंटिंग आपके बच्चों की सुरक्षा के बड़ा खतरा भी बन सकती है। क्योंकि सोशल मीडिया के माध्यम से आप अपने बच्चे की सभी जानकारी, जैसे-उम्र, स्कूल, बर्थडे, शौक, फ्रेंड सर्कल, रूटीन शेयर कर देते हैं। ऐसे में यह अपराधियों को न्योता देने जैसा हो सकता है। डिजिटल ठगी, फ्रॉड के इस दौर में ऐसी जानकारियां शेयर करना बच्चों के भविष्य के लिए खतरनाक हो सकता है। कोशिश करें कि अपने बच्चों की फोटोज आप उसी सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर करें, जिसमें आपके परिवार के सदस्य और करीबी दोस्त हों। इससे आप जोखिम को कुछ हद तक कम कर सकते हैं।  

कई बच्चों को चिंता होती है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई फोटो के कारण वे ​बुलिंग का शिकार होंगे।
Many children worry that they will become victims of bullying due to the photos posted on social media.

फेयरलेघ डिकिंसन यूनिवर्सिटी में संचार की एसोसिएट प्रोफेसर कारा अलाइमो ने अपनी किताब ‘ओवर द इनफ्लुएंस: व्हाई सोशल मीडिया इज टॉक्सिक फॉर वीमेन एंड गर्ल्स – एंड हाउ वी कैन टेक इट बैक’ में शेयरेंटिंग को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं। कारा के अनुसार कई बच्चे इस चिंता में रहते हैं कि उनके माता—पिता उनकी कैसी तस्वीरें या जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट करेंगे। जिनके कारण बाद में उन्हें बुलिंग का शिकार होना पड़ सकता है। लोग उनका मजाक बना सकते हैं। कभी-कभी मोबाइल पर बनें ग्रुप्स में ये फोटोज शेयर कर मजाक बनाया जाता है। ऐसे में बच्चों को बहुत ही शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ता है और वे अपमानित महसूस करते हैं।  

आज के समय में सोशल मीडिया के जरिए किसी की छवि बनाना और बिगाड़ना दोनों ही बहुत आसान है। ऐसे कई उदाहरण भी हम आए दिन देखते रहते हैं। दरअसल, सोशल मीडिया पर पोस्ट की गईं जानकारियां सालों साल तक मौजूद रहती हैं। ऐसे में पेरेंट्स की ओर से पोस्ट की गई फोटो, वीडियो या जानकारी का दुरुपयोग भविष्य में बच्चे के खिलाफ करने की भी आशंका रहती है। जैसे – बच्चा किसी महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हो और उसकी बचपन की कोई मजाकिया तस्वीर सोशल मीडिया पर मौजूद हो।  प्रतिद्वंद्वी इसका उपयोग उसकी छवि खराब करने के लिए कर सकते हैं। इसलिए यह हर माता—पिता की जिम्मेदारी है कि वह सोशल मीडिया की गंभीरता को समझे और संयम के साथ इसका उपयोग करे।

कुछ बच्चों पर शेयरेंटिंग का गहरा असर पड़ सकता है, इससे उनका बचपन तक छिन सकता है। जब बच्चा यह बात जानने लगता है कि पेरेंट्स सोशल मीडिया पर उसकी फोटो या वीडियो शेयर करते हैं तो वह खुद को ज्यादा आकर्षित दिखाने की कोशिश करता है। बच्चे हमेशा सबकी तारीफ चाहते हैं। ऐसे में वे खुद पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने लगते हैं। धीरे-धीरे यह उनकी आदत बन जाता है। ऐसे में उनका बचपन कहीं खो जाता है। छुट्टियों में किसी हिल स्टेशन पर गए हो या त्योहारों का सेलिब्रेशन हो, कुछ बच्चों का पूरा फोकस आस-पास का माहौल महसूस करने की जगह फोटो खिंचवाने में ही रहता है। यह इस बात का इशारा है कि बच्चा सोशल मीडिया से अत्यधिक प्रभावित है। कई बार पोस्ट की फोटो पर लाइक्स और कमेंट कम आने पर बच्चे डिप्रेशन में भी आ सकते हैं।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...