Cervical Screening Guidelines
Cervical Screening Guidelines

Overview:किस उम्र में कितनी बार करानी चाहिए सर्वाइकल स्क्रीनिंग -गायनेकोलॉजिस्ट से जानें पूरी गाइडलाइन

सर्वाइकल स्क्रीनिंग महिलाओं के लिए एक जरूरी बचाव जांच है, जो सर्वाइकल कैंसर से बचाने में मदद करती है। सही उम्र पर नियमित पैप स्मीयर और HPV जांच से शुरुआती बदलाव समय रहते पकड़ में आ जाते हैं। गायनेकोलॉजिस्ट की सलाह के अनुसार 21 साल से स्क्रीनिंग शुरू करनी चाहिए। लक्षणों का इंतजार किए बिना समय पर जांच कराना महिलाओं की सेहत के लिए बेहद जरूरी है।

Cervical Screening Guidelines: सर्वाइकल स्क्रीनिंग, सर्वाइकल कैंसर से बचाव के सबसे असरदार तरीकों में से एक है, लेकिन जानकारी की कमी और गलत धारणाओं के कारण इसे अक्सर टाल दिया जाता है या नजरअंदाज कर दिया जाता है। कई महिलाएँ मानती हैं कि जांच तभी जरूरी होती है जब कोई लक्षण दिखें, जबकि सर्वाइकल कैंसर अक्सर बिना किसी संकेत के धीरे-धीरे बढ़ता है। सही उम्र पर नियमित जांच कराने से कोशिकाओं में होने वाले शुरुआती बदलाव समय रहते पकड़ में आ जाते हैं, जिससे समय पर इलाज संभव हो पाता है।

डॉ. श्वेता वज़ीर, सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्स्टेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट, मदरहुड हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम के अनुसार, उम्र और रिस्क फ़ैक्टर्स के आधार पर सही स्क्रीनिंग शेड्यूल का पालन करना लंबे समय तक महिलाओं की सेहत और ओवर ऑल हेल्थ के लिए बेहद जरूरी है। वह बताती हैं कि सर्वाइकल स्क्रीनिंग का मुख्य उद्देश्य सर्विक्स में होने वाले असामान्य बदलावों की पहचान करना होता है, जो ज्यादातर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के हाई-रिस्क स्ट्रेन्स के लगातार संक्रमण के कारण होते हैं।

महिलाओं के लिए सर्वाइकल स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है

Regular Pap smear tests are key to preventing cervical cancer.
Cervical screening helps detect early cell changes before cancer develops.

सर्वाइकल स्क्रीनिंग एक बचाव से जुड़ी स्वास्थ्य जांच है, न कि कैंसर की पुष्टि करने वाला टेस्ट। यह प्री-कैंसर से जुड़े बदलावों को शुरुआती चरण में पहचानने में मदद करती है, जब इलाज आसान और काफी असरदार होता है। भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामले अब भी बड़ी संख्या में सामने आते हैं, ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग बीमारी और मौत के खतरे को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

21 से 29 वर्ष की उम्र के लिए सर्वाइकल स्क्रीनिंग गाइडलाइन

Age-wise screening guidelines improve long-term women’s health.
HPV infection is a major cause of cervical cancer in women.

महिलाओं को 21 साल की उम्र से सर्वाइकल स्क्रीनिंग शुरू कर देनी चाहिए, चाहे उनकी यौन गतिविधि कुछ भी हो। इस उम्र में हर तीन साल में एक बार पैप स्मीयर टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। इस जांच में सर्वाइकल सेल्स को देखा जाता है, ताकि किसी भी असामान्यता की पहचान हो सके और जरूरत पड़ने पर आगे की जांच की जा सके। कम उम्र की महिलाओं में HPV इन्फेक्शन आम होता है और कई बार यह अपने आप ठीक हो जाता है, इसलिए इस चरण में आमतौर पर नियमित HPV टेस्ट की सलाह नहीं दी जाती, जब तक डॉक्टर इसकी जरूरत न समझें।

30 से 49 वर्ष की उम्र के लिए सर्वाइकल स्क्रीनिंग गाइडलाइन

Cervical screening guidelines for women aged 30 to 49
Cervical screening guidelines

30 साल की उम्र के बाद सर्वाइकल स्क्रीनिंग और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है। इस उम्र की महिलाएँ डॉक्टर की सलाह और उपलब्धता के अनुसार हर तीन साल में एक बार पैप स्मीयर टेस्ट या हर पांच साल में केवल HPV टेस्ट का ऑप्शन चुन सकती हैं। कुछ मामलों में को-टेस्टिंग की भी सलाह दी जाती है, जिसमें पैप स्मीयर और HPV दोनों जांच एक साथ की जाती हैं। यह तरीका सर्वाइकल कैंसर से जुड़े हाई-रिस्क HPV स्ट्रेन्स की समय रहते पहचान करने में मदद करता है।

50 से 65 वर्ष की उम्र के लिए सर्वाइकल स्क्रीनिंग गाइडलाइन

मेनोपॉज के बाद भी सर्वाइकल स्क्रीनिंग जारी रहनी चाहिए। इस उम्र की महिलाओं को हर तीन साल में एक बार पैप स्मीयर टेस्ट या हर पांच साल में HPV टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। उम्र बढ़ने के साथ सर्वाइकल कैंसर का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, इसलिए लगातार सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

क्या 65 साल के बाद भी महिलाओं को सर्वाइकल स्क्रीनिंग की जरूरत होती है?

65 साल की उम्र के बाद, यदि पहले की सभी जांच रिपोर्ट लगातार सामान्य रही हों, तो नियमित स्क्रीनिंग बंद की जा सकती है। लेकिन जिन महिलाओं की रिपोर्ट पहले कभी असामान्य रही हो या जिन्हें गायनेकोलॉजिस्ट ने सलाह दी हो, उन्हें फॉलो-अप स्क्रीनिंग जारी रखनी चाहिए।

डॉ. वज़ीर इस बात पर जोर देती हैं कि नियमित सर्वाइकल स्क्रीनिंग और समय पर मिलने वाली सही मेडिकल सलाह मिलकर कई जिंदगियाँ बचा सकती हैं। वह महिलाओं को प्रोत्साहित करती हैं कि वे अपने गायनेकोलॉजिस्ट से खुलकर बात करें, स्क्रीनिंग के ऑप्शन्स को समझें और लक्षणों के आने का इंतजार करने के बजाय बचाव से जुड़ी देखभाल को प्राथमिकता दें।

मेरा नाम दिव्या गोयल है। मैंने अर्थशास्त्र (Economics) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और उत्तर प्रदेश के आगरा शहर से हूं। लेखन मेरे लिए सिर्फ एक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से संवाद का एक ज़रिया है।मुझे महिला सशक्तिकरण, पारिवारिक...