Hindi Social Story: पीछे के मोहल्ले में वैभव रहता था। जो अभी अभी अपनी पढ़ाई पूरी कर ही पाया था के परिवार और पड़ोस के बेरोजगार का ताना सुन सुन करके तंग आ गया था । इसी लिए पढ़ाई पूरी करने के बाद वह नौकरी की तलाश में दिन-रात भटकने लगा था। लगातार प्रयास के बाद भी उसको असफलता मिल रही थी जेब में पैसे कम थे, उम्मीद भी धीरे-धीरे टूट रही थी।
एक दिन वैभव सुबह सुबह इंटरव्यू पर जाते समय वह बस से उतरकर जल्दी-जल्दी सड़क पार कर रहा था कि सामने से आती हुई एक बूढ़ी महिला अचानक लड़खड़ा कर गिर पड़ी। वैभव की नजर पड़ी उस बूढ़ी महिला पर पड़ी,वैसे तो आस-पास बहुत लोग थे, पर कोई रुकने को तैयार नही था। सबके सब अपने-अपने काम में इतने व्यस्त किसी को देखने का टाइम नहीं है।
वैभव की नजर महिला से हट नहीं रही थी वैभव एक पल के लिए सोच में पड़ गया। इंटरव्यू में देर हो रही थी… पर महिला को दर्द में कराहते हुए देखा नहीं जा रहा था जाने क्यों मन अंदर से कह रहा था, वैभव “काम फिर मिल जाएगा, इंसानियत नहीं।” महिला के पास जाकर पूछा , “मां जी आप कौन हैं
“मां जी, आपको चोट तो नहीं लगी?” आप चिंता न करिए आप एकदम ठीक हो जाएगी
महिला दर्द से कराह रही थीं। वैभव ने उन्हें सहारा देकर पास के अस्पताल पहुँचाया। एडमिट कराया सारे पेपर पर खुद ही साइन किया थोड़े पैसे जो उसके पास बचे थे वो भी हॉस्पिटल में जमा कर दिया था ,डॉक्टर ने बताया कि समय पर इलाज होने से बड़ी चोट टल गई। वैभव दवा लेकर आया, पानी पिलाया और उनकी पूरी देखभाल की।
महिला ने कांपते हाथों से उसका हाथ पकड़ा—
“बेटा… मैं क्या दूँ तुम्हें? सिर्फ दुआ… और एक शुक्रिया और तो मेरे पास यहाँ कुछ है भी नहीं बेटा”!
वैभव मुस्कुरा दिया। अचानक से उसको याद आया के वो वह इंटरव्यू के लिए जा रहा था बहुत लेट हो चुका था वह तुरंत इंटरव्यू के लिए भागा, पर वहाँ पहुँचने में पता चला इंटरव्यू हो चुका था। वैभव चुपचाप वहां से लौट रहा था। मन में हल्की सी निराशा भी थी और संतोष भी—क्योंकि उसने किसी की मदद की थी।
अगले दिन उसके फोन पर एक कॉल आया—
“क्या आप वैभव बोल रहे हैं? कल आपने हमारी चेयरपर्सन सर की माँ की जान बचाई थी। वे आपको मिलना चाहती हैं।”
वैभव चकित रह गया। जब वह ऑफिस पहुँचा, तो सामने वही बुजुर्ग महिला बैठी थीं। जिनकी कल उसने मदद की थी हॉस्पिटल पहुंचाया था उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा—
“बेटा, तुमने बिना पहचान, बिना स्वार्थ के मेरी मदद की। यह दुनिया ऐसे लोगों से ही सुंदर बनती है। मेरी तरफ से एक छोटा सा उपहार…”
और उन्होंने वैभव को कंपनी में नौकरी का नियुक्ति पत्र दे दिया।
वैभव की आँखें नम हो गईं। वह शब्द नहीं बोल पाया। महिला ने फिर कहा—
“बेटा, याद रखना… सच्चे दिल से किया गया काम हमेशा लौटकर आता है। कभी धन के रूप में, कभी अवसर के रूप में, और कभी सिर्फ एक दिल से निकले हुए शुक्रिया के रूप में… और वही सबसे कीमती होता है।”
वैभव ने सिर झुकाकर कहा—
“माता जी, आज मुझे समझ आया कि इंसानियत में लगाया हुआ हर पल… कभी व्यर्थ नहीं जाता।” मैं पूरी मेहनत ईमानदारी से आपकी कंपनी में काम करूंगा बहुत धन्यवाद मां जी। वैभव पैर छू कर खुशी खुशी घर को निकला।
शुक्रिया कहना जरूरी है-गृहलक्ष्मी की कहानियां
