Split image showing a serious-looking older man with glasses on the left and a poster of The Taj Story on the right, where he is holding a miniature Taj Mahal model.
The Taj Story

Summary: ताजमहल कोर्ट में खड़ा! परेश रावल की नई फिल्म में इतिहास खुद बोल उठेगा

‘द ताज स्टोरी’ एक काल्पनिक कोर्टरूम ड्रामा है, जिसमें ताजमहल की स्थापित कहानी पर सवाल उठाए जाते हैं। परेश रावल की एक्टिंग और तुषार अमरीश गोयल की निर्देशन शैली दर्शकों को इतिहास, विश्वास और जिज्ञासा के बीच एक अनोखे सफर पर ले जाती है।

The Taj Story: ताजमहल क्या है, प्यार का स्मारक या फिर इतिहास का रहस्य? क्या होगा जब इतिहास को खुद कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया जाएगा? 13 मार्च को देखिए केवल लॉयन्सगेट प्ले पर, द ताज स्टोरी, जो दर्शकों को एक ऐसे काल्पनिक कोर्टरूम ड्रामा में ले जाएगी, जो भारत के सबसे प्रतिष्ठित स्मारकों में से एक की तनावपूर्ण सुर्खियों पर केंद्रित है। इसमें परेश रावल ने शानदार अभिनय किया है। यह एक कानूनी थ्रिलर फिल्म है, जिसमें इतिहास को दर्ज करने के तरीके पर सवाल खड़ा किया गया है, किन लोगों ने इतिहास लिखा है और जब आम जनता इन स्थापित कहानियों को चुनौती देती है, तब क्या होता है?

जब ताजमहल के एक अनुभवी टूर गाईड विष्णु दास स्वीकृत इतिहास पर सवाल खड़ा करते हैं, तो उनकी निजी शंकाएं सत्य, विश्वास और इतिहास को लिखने की ताकत को लेकर एक सार्वजनिक कोर्टरूम में बहस छेड़ देती हैं। तुषार अमरीश गोयल द्वारा निर्देशित इस फिल्म में साक्ष्य और भावना के बीच धुंधले अंतर में उतरकर दर्शकों को संगमरमर से आगे देखने तथा इस कहानी पर फिर से विचार करने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसके बारे में वो यही समझते आए हैं कि वो इसे अच्छी तरह जानते हैं। इस फिल्म में जाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, नमित दास और स्नेहा वाघ ने भी बेहतरीन अभिनय किया है।

इस फिल्म में अपने किरदार के बारे में अनुभवी कलाकार, परेश रावल ने कहा, “द ताज स्टोरी में मैं विष्णु दास का किरदार निभा रहा हूँ। वह पारंपरिक रूप में हीरो नहीं है, बल्कि एक ऐसा आदमी है, जो ताजमहल की उस कहानी पर सवाल खड़ा करता है, जो वह सालों से टूरिस्ट्स को सुनाता आया है। और एक सवाल सबकुछ बदल देता है, क्या होगा जब हमारी पीढ़ियाँ जिस कहानी को सच मानती आई हैं, वह अधूरी हो? यह सवाल उसे इतिहास, अध्ययन और कोर्टरूम की बहस तक ले जाता है। मैं इस किरदार की ओर इसलिए आकर्षित हुआ क्योंकि वह किसी विचारधारा या विवाद से नहीं, बल्कि जिज्ञासा और दृढ़निश्चय से प्रेरित है। विष्णु सवाल पूछने का साहस करता है, तब भी, जब इसके उत्तर उसके जीवन को अस्तव्यस्त कर सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “साथ ही, यह फिल्म आस्था के बारे में नहीं है। बल्कि यह हमारे साझा इतिहास को खोजने के बारे में है। कलाकार के रूप में हम हमेशा ऐसी कहानी की ओर आकर्षित होते हैं, जो चर्चा छेड़ दें। द ताज स्टोरी उसी तरह की फिल्म है। यह एक ऐसी फिल्म है, जो मैंने हमेशा अपने काम से पेश करने की कोशिश की है। मुझे उम्मीद है कि दर्शक इस फिल्म को खुले दिमाग से देखेंगे, क्योंकि कभी-कभी सिनेमा का मतलब उत्तर देना नहीं, बल्कि अपने पीछे सवाल छोड़ जाना होता है।”

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सोनल शर्मा एक अनुभवी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया, प्रिंट और पीआर में 20 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने दैनिक भास्कर, पत्रिका, नईदुनिया-जागरण, टाइम्स ऑफ इंडिया और द हितवाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया...