idiopathic hypersomnia symptoms
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रैट पर्सन ट्रेंड दुनियाभर के युवा अपना रहे हैं। हालांकि चीन इससे सबसे ज्यादा प्रभावित है। अगर आप इस विषय में नहीं जानते हैं तो आइए आपको बताते हैं।

Rat Person Trend: जिंदगी को बेहतर बनाना है तो बहुत सारी मेहनत करनी होगी। हर रोज दफ्तर में 10 से 12 घंटे की ड्यूटी से लेकर सप्ताह में 6 दिन काम करना, इसमें शामिल है। लेकिन आज के युवा इस रोबोटिक जिंदगी से परेशान हो गए हैं। और ऐसे में उन्होंने विरोध का एक अनोखा तरीका निकाला है। वे अब बन गए हैं ‘रैट पर्सन’। अगर आप भी इस विषय में नहीं जानते हैं तो आइए आपको बताते हैं।

ऐसे होते हैं रैट पर्सन

रैट पर्सन ट्रेंड दुनियाभर के युवा अपना रहे हैं।
The Rat Person trend is being adopted by youth all over the world.

रैट पर्सन ट्रेंड दुनियाभर के युवा अपना रहे हैं। हालांकि चीन इससे सबसे ज्यादा प्रभावित है। इस ट्रेंड में युवा अपने घर या यूं कहें बिस्तर तक सीमित रह गए हैं। वे दिनभर बिस्तर पर लेटे हुए अपना मोबाइल स्क्रॉल करते हैं। न कहीं बाहर जाते हैं, न दोस्तों से मिलते हैं, न ही नौकरी करते हैं। वे बाहर से खाना ऑर्डर करके खाते हैं। उनका नहाने तक का कोई समय नहीं होता। और पूरा दिन वे ऐसे ही निकाल देते हैं। सोना उनकी पसंदीदा एक्टिविटी बन जाता है। वे दिन में कई घंटे सोते हैं और रात में भी भरपूर नींद लेते हैं।

सोशल मीडिया के हीरो

ऐसे लोगों का समय बिताने का सबसे बड़ा माध्यम है इंटरनेट और सोशल मीडिया। वे अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर खुद को थका हुआ, लाचार, निराश, परेशान और काम से ऊबा हुआ बताते हैं। वहीं बड़ी संख्या में दूसरे युवा उनका समर्थन भी कर रहे हैं। एक ओर इन युवाओं के परिवार वाले और सरकार चाहती है कि ये तकनीक और इनोवेशन पर ध्यान दें। दूसरी ओर इन युवाओं का कहना है कि अब वे इस रेस से बाहर हैं। वे इस अंधी दौड़ का हिस्सा ही नहीं बनना चाहते।

डिप्रेशन हो सकता है कारण

‘रैट पर्सन’ बने लोगों का कहना है कि वे असभ्य नहीं हैं। लेकिन अब वे कुछ करना नहीं चाहते। कुछ लोग इसे युवाओं के विरोध करने का एक शांत तरीका मानते हैं। द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार उपन्यासकार लियाओ जेंघू कहते हैं कि रैट पर्सन में किसी बात को लेकर उत्साह ही नहीं रह जाता। वे अपने करियर में आगे नहीं बढ़ना चाहते। न ही वे दूसरे लोगों से मिलना पसंद करते हैं। ऐसे में कई लोगों में डिप्रेशन के लक्षण भी नजर आते हैं।

क्या आंदोलन कर रहे हैं युवा

वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के स्टीव सांग का कहना है कि यह कॉर्पोरेट कल्चर के प्रति युवाओं की बगावत का तरीका है। इंसान को रोबोट बनाने वाले इस कल्चर के बीच युवा आक्रामक आंदोलन की जगह, अपने घर में लेटे हुए एक जंग पर हैं। कई प्रोफेशनल्स ने काम करना बंद कर दिया है। वहीं कुछ वर्कफोर्स से खुद बाहर हो गए हैं।

कठिनाइयों से थकान

विशेषज्ञों के अनुसार यूके में रहने वाले कई युवा रैट पर्सन बन गए हैं। वे लगातार बढ़ती महंगाई और जिंदगी जीने की कठिनाइयों से थक चुके हैं। लोगों से मिलने की जगह वे अपनी शारीरिक और मानसिक ऊर्जा बचाने पर फोकस कर रहे हैं। ऐसे युवा कई कई दिनों तक घर से बाहर ही नहीं निकल रहे हैं। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जीवन और पूंजीवाद किसी के लिए नहीं रुकता है। ऐसे में निरंतर आगे बढ़ने की कोशिश करना और परेशानियों का सामना करना ही बेहतर है।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...