Dreading Exam Result
Dreading Exam Result Credit: Istock

Dreading Exam Result: बढ़ते कॉम्‍पटीशन ने बोर्ड एग्‍जाम को हव्‍वा बना दिया है। पहले भी बोर्ड एग्‍जाम हुआ करते थे लेकिन बच्‍चों पर अच्‍छे मार्क्‍स लाने का इतना प्रेशर नहीं था। एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ वर्तमान में बच्‍चों को गलत कदम उठाने के लिए मजबूर कर रही है। हाल ही में 10वीं और 12वीं कक्षा के बोर्ड एग्‍जाम समाप्‍त हुए हैं और अब बच्‍चों को इंतजार है बोर्ड के रिजल्‍ट का। बोर्ड का रिजल्‍ट तय करता है कि बच्‍चा आगे चलकर कौन सी स्‍ट्रीम चुनेगा और किस कॉलेज में एडमिशन लेगा। निस्‍संदेह हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्‍चा सफलता प्राप्‍त करे लेकिन जाने-अनजाने वह बच्‍चे पर अच्‍छे रिजल्‍ट का प्रेशर बनाने लगते हैं। जो बच्‍चे में तनाव, एंग्‍जाइटी और आत्‍महत्‍या जैसे विचारों को जन्‍म दे सकता है। ऐसे में जरूरी है कि पेरेंट्स अपनी अपेक्षाओं और इच्‍छाओं पर लगाम लगाएं और रिजल्‍ट आने से पहले बरतें ये सावधानियां। 

रिजल्‍ट को न बनाएं हव्‍वा

Don't make a mountain out of the results
Don’t make a mountain out of the results

पेरेंट्स की बढ़ती अपेक्षाएं कई बार बच्‍चे के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। हर पेरेंट्स बच्‍चे का बेहतर भविष्‍य बनाना चाहता है लेकिन कई बार छोटी-छोटी चीजें बच्‍चे का भविष्‍य और वर्तमान दोनों खराब कर सकती हैं। रिजल्‍ट एजुकेशन सिस्‍टम का एक हिस्‍सा मात्र है जो बच्‍चे को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्‍साहित करता है। लेकिन पेरेंट्स रिजल्‍ट को हव्‍वा बना देते हैं और बच्‍चे पर प्रेशर बनाने लगते ह‍ैं। यदि आपके बच्‍चे का बोर्ड का रिजल्‍ट आने वाला है तो सावधान हो जाइए। बोर्ड का रिजल्‍ट बच्‍चे की खुशी और जिंदगी से ज्‍यादा नहीं है इसलिए रिजल्‍ट जो भी हो आप उसे सहजता से स्‍वीकारें।

बच्‍चे को करें प्रोत्‍साहित

माना कि बोर्ड का रिजल्‍ट बच्‍चे का भविष्‍य तय करता है लेकिन क्‍या एवरेज स्‍टूडेंट एक बेहतर केरियर नहीं बना सकते। बच्‍चे का रिजल्‍ट चाहे जो भी पेरेंट्स की जिम्‍मेदारी है कि वह बच्‍चे द्वारा की गई मेहनत को एप्रीशिएट करें। वह बच्‍चे को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्‍साहित करें। हो सकता है कि आपका बच्‍चा डॉक्‍टर या इंजीनियर न बनें लेकिन आपके प्रोत्‍साहन से वह एक अच्‍छा इंसान जरूर बन सकता है।

तुलना करने से बचें

कॉम्‍पटेटिव वर्ल्‍ड में लोग अपनी सफलता से नहीं बल्कि दूसरों की सफलता से अधिक प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि जाने-अनजाने पेंरेंट्स अपने बच्‍चे की तुलना उसके दोस्‍तों और परिवारजनों से करने लगते हैं। तुलना करने से न सिर्फ बच्‍चे के आत्‍मसम्‍मान को ठेस पहुंचती है बल्कि उसके मन में अपने दोस्‍त और सहपाठी के प्रति जलन और द्वेष की भावना घर कर सकती है। ऐसी स्थिति में बच्‍चा गलत कदम उठा सकता है। हर बच्‍चे की क्षमताएं अलग होती हैं इसलिए पेरेंट्स अपने बच्‍चे की तुलना करने से बचें।

शांति बनाए रखें

Maintain peace
Maintain peace

यदि आपके बच्‍चे ने बोर्ड एग्‍जाम में अच्‍छा नहीं किया है तो उसे दंडित करने से बचें। माता-पिता को अपने बच्‍चे की कमियों को स्‍वीकार करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। तभी बच्‍चे अपनी असफलताओं का सामना करते समय संयम बनाए रखे की कला सीख सकेंगे। रिजल्‍ट के दौरान पेरेंट्स को बच्‍चे के साथ मिश्रता का व्‍यवहार करते हुए शांति बनाए रखना है। ता‍कि बच्‍चा रिजल्‍ट को सहजता से स्‍वीकार करें। कोई गलत कदम न उठाए।

बनें बैक बोन

बच्‍चे अपने माता-पिता की इच्‍छाओं को पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम करता है। जब रिजल्‍ट मनमाफिक नहीं आ पाता तो बच्‍चा हतोत्‍साहित हो सकता है। ऐसे में पेरेंट्स की जिम्‍मेदारी है कि वह बच्‍चे की बैक बोन बनें। उसे नए सिरे से आगे बढ़ने के लिए प्रोत्‍साहित करें। यदि पेरेंट्स बच्‍चे की सफलता और असफलता को आसानी से स्‍वीकार लेते हैं तो बच्‍चा भी अपनी गलतियों से सीखने की कोशिश करता है।