How to Raise Tech-Smart, Not Screen-Addicted Kids
How to Raise Tech-Smart, Not Screen-Addicted Kids

Overview:बच्चों को इस तरह बनाएं टेक स्मार्ट

आज के समय में बच्चों को स्क्रीन एडिक्ट नहीं, बल्कि टेक स्मार्ट बनाना चाहिए। जानिए कैसे।

Tech-Smart Kids: आज के टाइम पर किसी भी पैरेंट के लिए सबसे मुश्किल होता है बच्चों को स्क्रीन से दूर रखना। आज जब हर चीज इंटरनेट पर मौजूद है तो ऐसे में बच्चों को उससे दूर रखकर हम कहीं ना कहीं उनकी ग्रोथ पर ही नेगेटिव असर डालते हैं। लेकिन एक सच यह भी है कि आज के समय में बच्चे स्क्रीन एडिक्ट बनते जा रहे हैं। ऐसे में वे अपना अधिकतर स्क्रीन पर बेवजह की चीजों को देखने या फिर ऑनलाइन गेम खेलने में निकाल देते हैं। यहीं पर पैरेंट्स की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है।

पैरेंट्स को बच्चों को स्क्रीन से दूर नहीं रखना है, बल्कि उन्हें टेक स्मार्ट बनाने की जरूरत है। अमूमन हम बच्चों को शांत करने के लिए टीवी पर कार्टून या वीडियो चला देते हैं। इससे कुछ वक्त के लिए बच्चे भले ही शांत हो जाएं, लेकिन धीरे-धीरे स्क्रीन उनके दिमाग पर असर डालने लगता है और फिर उनके साथ क्रेविंग से लेकर चिड़चिड़ापन व फोकस से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगती है। आज के समय में पैरेंट्स खुद इस बात से अनजान होते हैं कि वे बच्चों को टेक स्मार्ट किस तरह बनाएं। तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ आसान तरीकों के बारे में बता रहे हैं-

Don't make technology your enemy
Don’t make technology your enemy

अक्सर यह देखने में आता है कि पैरेंट्स अपने बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने के लिए उनके सामने नेगेटिव शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। मसलन, फोन बंद करो, टीवी मत चलाओ। ऐसे में बच्चों का स्क्रीन के साथ समय बिताने का ज्यादा मन करता है। साइकोलॉजी भी कहती है कि मना की गई चीजें ज्यादा रोमांचक लगती हैं। इसलिए, एक पैरेंट के रूप में आप टेक्नोलॉजी को न्यूट्रल बनाओ, नेगेटिव नहीं। इससे बच्चा टेक का इस्तेमाल तो करता है, लेकिन ऑब्सेस्ड नहीं होता।

बच्चों को टेक स्मार्ट बनाने के लिए यह जरूरी है कि वे इसके एडिक्ट ना हो और इसलिए स्क्रीन को लेकर कुछ रूल्स सेट करने बेहद जरूरी हैं। नियम भले ही सख्त हों, लेकिन लहजा नरम होना चाहिए। मसलन, बच्चों को पता होना चाहिए कि होमवर्क के पहले स्क्रीन नहीं या फिर सोने से एक घंटा पहले गैजेट बंद कर देने चाहिए। इसी तरह, डाइनिंग टेबल पर गैजेट्स नहीं होंगे। जब घर में रूल्स सेट होते हैं, तो ऐसे में बच्चों को पता होता है कि उन्हें कब और कितने समय में लिए स्क्रीन देखना चाहिए। 

Combination of education and entertainment
Combination of education and entertainment

जब बच्चा स्क्रीन देख रहा है तो ऐसे में आप कोशिश करें कि बच्चे स्किल पर फोकस करें। स्क्रीन पर वह कुछ सीखें और कुछ ना कुछ क्रिएटिविटी करें। आप बच्चे को स्क्रीन की मदद से कोडिंग ऐप्स, कैनवा, डिजिटल आर्ट, फोटो एडिटिंग बेसिक्स या टाइपिंग स्किल्स आदि सिखा सकती हैं। इससे बच्चा टेक-स्मार्ट बनता है और स्क्रीन को एक लर्निंग टूल की तरह लेता है। साथ ही, उसकी कार्टून व गेम्स की क्रेविंग कम होती है।

मैं मिताली जैन, स्वतंत्र लेखिका हूं और मुझे 16 वर्षों से लेखन में सक्रिय हूं। मुझे डिजिटल मीडिया में 9 साल से अधिक का एक्सपीरियंस है। मैं हेल्थ,फिटनेस, ब्यूटी स्किन केयर, किचन, लाइफस्टाइल आदि विषयों पर लिखती हूं। मेरे लेख कई प्रतिष्ठित...