Gadget Addiction in Children: बहुत कम पेरेंट्स ये जानते हैं कि गैज़ेट्स एडिक्शन से बच्चे को होने वाले नुकसान वैसे ही होते हैं, जैसे किसी ड्रग्स या अल्कोहल एडिक्ट इंसान को होते हैं।
हमने सदियों से सुना है कि क्योंकि भगवान हमेशा हमारे पास नहीं होते, इसलिए उन्होंने पेरेंट्स को बच्चों की लाइफ में भेजा है, लेकिन गौर फरमाइए तो पाइएगा कि हर पेरेंट जि़ंदगी की दौड़-भाग में, अपनी प्रोफेशनल लाइफ और सामाजिक जिम्मेदारियों में भी उलझा होता है। तभी कभी घर आए गेस्ट से बातें करने के लिए तो कभी बच्चे को फुसलाने के लिए और कभी उसे तकनीकी रूप से स्मार्ट बनाने के लिए उसे फोन, टैब या लैपटॉप में उलझाया जाता है, लेकिन बहुत कम लोग ये जानते हैं कि अगर शुरू में ही इस बात का ध्यान न दिया जाए कि बच्चा इन गैजेट्स के साथ कितना समय बिता रहा है तो गैजेट्स का ये इस्तेमाल एडिक्शन का रूप ले सकता है।
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गैजेट एडिक्शन से बच्चों पर प्रभाव
ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन में हुए एक शोध के अनुसार मोबाइल जेनरेशन में पैदा हुए शिशुओं में दस में से मात्र एक शिशु ऐसा है, जिसे स्वास्थ्य स्तर के अनुसार एक्टिव कहा जा सकता है।
ज्यादातर समय मोबाइल में ही व्यस्त रहने की वजह से बच्चे को सामाजिक और अपने आसपास में हो रही चीज़ों को समझने और उनसे सीखने का मौका ही नहीं मिलता है। स्क्रीन टाइम की वजह से बच्चे की कल्पना शक्ति पर भी प्रभाव पड़ता है और आगे चलकर उनके सोचने की क्षमता और याददाश्त पर भी असर पड़ता है।
इतना ही नहीं, गैजेट्स की आदत लगने पर जब बच्चे के स्क्रीनटाइम को कम किया जाता है तो इस बात से भी वे चिड़चिड़ा व्यवहार करते हैं।
इसके अलावा गैजेट्स के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों की आंखों के साथ-साथ दिमाग के विकास पर भी असर पड़ता है। गैजेट की आदत बढ़ने के साथ ही गुस्सा आना, तनाव, जिद्दीपन, जल्दी भावुक होना जैसे लक्षण भी नज़र आने लगते हैं।
और भी हैं प्रभाव

1 अत्यधिक गैजेट के इस्तेमाल से बच्चों की एकाग्रता पर बुरा असर पड़ता है और कभी-कभी इस वजह से उनमें डिप्रेशन और सूसाइड जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।
2 अल्बर्टा यूनिवॢसटी के शोधकर्ताओं के अनुसार ज्यादातर शिक्षक ये मानते हैं कि डिजिटल टेक्नोलॉजी की अधिक इस्तेमाल की वजह से बच्चों को कक्षा में भी ध्यान लगाने में दिक्कतें आती हैं। शिक्षकों ने माना कि बच्चों के गैजेड्स के एक्सपोजर की वजह से किसी भी तरह के शैक्षिक कार्यों में ध्यान केंद्रित करने में परेशानी आती है।
3 शोधकर्ताओं के अनुसार जो किशोर पांच घंटे या उससे अधिक समय इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के साथ बिताते हैं, उनकी नींद पूरी नहीं होती और ये आगे चलकर उनके विकास में दिक्कत पैदा करता है।
कैसे समझें गैजेट्स एडिक्शन को
*हमेशा किसी न किसी गैजेट का इस्तेमाल करना।
मूड का तेजी से खराब होना या गैजेट के बारे में कुछ पूछने पर पलट कर जवाब देना।
दूसरी किसी भी एक्टिविटीज़ में रुचि न रहना।
- गैजेट्स यूज़ करने के लिए झूठ बोलना या कुछ और गलत काम करना।
बात-बात पर चिड़चिड़ापन, नाराज़ होना या मूड बिगड़ जाना।
क्या करें गैजेट्स एडिक्ट होने पर
1 बच्चे के साथ ज्यादा समय बिताएं। हो सकता है कि इस वजह से आपको प्रोफेशनल लाइफ में या अपनी सोशल लाइफ में कुछ जगहों पर पांव पीछे खींचना पड़े, लेकिन इससे लंबे समय में आपके बच्चे को फायदा होगा।
2 बच्चे अपनी हर प्रॉब्लम का हल अपने पैरेन्ट्स के पास ढूंढते हैं। अगर वह आपके पास अपनी छोटी-छोटी परेशानियां लेकर आए तो उनको सुनिए। भले ही उनकी ये बात
आपके लिए बेकार सी बात हो, लेकिन उन्हें ये मत कहिए कि ऐसी बातों के लिए टाइम वेस्ट
न करो।
3 बच्चों को गैजेट्स से दूर रखने के लिए खुद स्टोरीटेलर की भूमिका निभाएं। खुद गढ़ी कहानियां सुनाएं या फिर पुरानी पारंपरिक लोककथाएं सुनाएं, लेकिन हर कहानी के अंत में उन्हें कुछ सीख जरूर दें।
4 बच्चे से हर तरह और हर मुद्दे पर बात करें। उनके स्कूल में क्या हुआ, दोस्तों के बीच क्या हुआ, उनकी पसंद ना पसंद, उनके हर सवाल का जवाब देने जैसी बातचीत जरूर करें। विशेषज्ञों के अनुसार, बातचीत की कमी की वजह से ही कई बच्चे अपना मन लगाने के लिए गैजेट्स का रुख करते हैं।
5 बच्चों को रचनात्मक कार्यों के प्रति प्रोत्साहित करें। अक्सर देखा गया है कि जब बच्चों को कुछ करने के लिए नहीं मिलता तो वे मोबाइल जैसे किसी गैजेट में व्यस्त हो जाते हैं। ऐसे में बच्चे को आर्ट या क्राफ्ट जैसी किसी क्लास में एंरॉल कराएं। यदि बच्चे को म्यूजि़क या स्विमिंग जैसी एक्टिविटी पसंद है तो उसे ऐसी जगह भेजें, जहां ये चीज़ें सिखाई जाती हों।
इस तरह की एक्टिविटीज़ बच्चे के संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास में मददगार होती है।
पेरेंट्स खुद बनें रोल मॉडल
याद रखें, बच्चे अपने पेरेंट्स के व्यवहार का अनुसरण करते हैं और इसलिए अगर आप उन्हें गैजेट्स से दूर रखना चाहते हैं तो खुद भी गैजेट्स के साथ कम समय बिताएं। कई बार देखा गया है कि पेरेंट्स खुद ही खाना खाते हुए, रोड पर चलते हुए, ड्राइव करते हुए फोन पर स्क्रॉल करते नज़र आते हैं। ऐसी आदतों से खुद को दूर रखने की कोशिश करें। संयमित हो इस्तेमाल बातचीत के माध्यम से बच्चों को समझाइए की गैजेट्स हमारे बेहतर इस्तेमाल के लिए बने हैं। बच्चों को एजुकेशनल वीडियो या कुछ ऐसी चीज़ें दिखाएं, जहां से उन्हें कुछ सीखने के लिए मिले। अगर उन्हें इन गैजेट्स का इस्लेमाल गेम्स के लिए करना है तो भी उन्हें गैजेट्स दें, लेकिन पहले उन्हें बता दें कि उन्हें इस गैजेट का संयमित इस्तेमाल करना है।
