Teenager Vastu Upay: स्थिति टीनएज पेरेंटिंग एक इतना चुनौतीपूर्ण काम है, जिसकी कामयाबी के लिए आप हरसंभव प्रयास करती हैं। क्या आप जानती हैं कि वास्तु और विज्ञान भी इस विषय में अहम भूमिका निभाते हैं? जानिए कैसे-
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आप हर तरीके से कोशिश कर चुके हैं, काउंसिलिंग सेशन भी ले चुके हैं पर फिर भी बच्चों को लेकर चिंता बनी ही रहती है। रोज़ ये डर रहता है कि आज कहीं कोई नया मसला ना खड़ा हो जाए। अगर यह समस्या है तो यानी आप भी टीनएज बच्चों के माता-पिता हैं।
बहुत से मसले और परेशानियां होती हैं एक व्यक्ति के जीवन में, पर मां-बाप के जीवन में अपने अलावा एक बड़ी उलझन होती है अपने बच्चों के भविष्य को लेकर।
टीनएज पेरेंटिंग सबसे कठिन मानी जाती है, क्योंकि अब बच्चा बड़ा हो रहा होता है। उसकी समझ विकसित हो रही होती है। उसे अब पहले से ज़्यादा मूड ङ्क्षस्वग्स होते हैं। माता-पिता के लिए भी पेरेंटिंग के मुद्दे अब अलग होते हैं। जैसे अपने बच्चे पर कितनी सख्ती रखनी है, कितनी नहीं। बच्चों की इस कच्ची उम्र की डेटिंग, उनके मनोभाव, उनकी सोच, जो उन्हें सही या गलत की राह पर ले जाती हैं, जो बच्चों के जीवन को मुश्किल बनाती हैं या उनकी मुश्किलें सुलझाती हैं, उनके दोस्त वगैरह।
क्या आप जानते हैं कि आपके घर का वास्तु भी आपकी और आपके बच्चों की सोच को एक रूप में ढालने में सहायक हो सकता है? जी हां, वास्तु एक बहुत बड़ा कारण होता है, बच्चों को ही नहीं, बल्कि घर में रहने वाले हर व्यक्ति को सही राह दिखाने में या गुमराह करने में।
घर की दीवारों के रंग, अलग-अलग दिशाओं में रखी वस्तुएं और दिशा, सपने साथ एक ऊर्जा लिये होती हैं, जो मदद करती हैं बच्चों को सही राह और जीवन में केंद्रित रखने में।
अपनाएं ये वस्तु टिप्स
जिस तरह पृथ्वी की इलेक्ट्रो मैग्नेटिक वेव्ज़ की वजह से मोबाइल टेक्नोलॉजी काम करती है, उसी प्रकार हमारी एनर्जी भी हमारे आस-पास की चीज़ों से सामंजस्य बैठा कर हमारे मन में भाव उत्पन्न करती है, जिससे हम प्रभावित होते हैं, हमारा जीवन प्रभावित होता है। इस बात की गवाह आप खुद हौं। अक्सर आप खुद को कहती हैं ना कि यहां नहीं जाना, मेरा मन नहीं मान रहा या यह व्यक्ति या दोस्त सही नहीं है। वह ऊर्जा ही होती है, जो आपको यह महसूस करवाती है। हमारा-आपका घर भी पृथ्वी की दिशा निर्धारित ऊर्जा के मुताबिक अगर स्थापित न हो, तब भी कई प्रकार की मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

ऊर्जा यानी एनेर्जीज़ को पांच प्रकार में बांटा गया है। हमारा घर भी उन्हीं पांच प्रकार की ऊर्जा से प्रभावित होता है और सही ऊर्जा सही दिशा में हो तो हम स्वस्थ और सुखी जीवन व्यतीत करते हैं। एक और उदाहरण है- जैसे आप आई-लाइनर को आंखों पर लगाती हैं तो सुंदर लगती हैं। होंठों पर लगा लेंगी तो सोचिए कैसी लगेंगी।
12-18 साल के बच्चों के माता-पिता को अगर ये डर सताता है कि उनके बच्चे पढ़ते नहीं हैं। पढ़ाई के लिए कहो तो मोबाइल या लैपटॉप की डिमांड करते है, दिन भर चैटिंग में लगे रहते हैं, हमारी सुनते या मानते नहीं हैं तो अपनाएं ये वास्तु टिप्स-
*अगर वेस्ट-साउथ वेस्ट में मोबाइल रखा है, चाहे पुराना मोबाइल हो तो बच्चे पढ़ाई के वक्त मोबाइल ही मांगते हैं। अगर वहां क्रिएटिव सामान रखा है, तब पढ़ाई के वक्त वैसा ही कुछ करने का मन करता है जैसे पेंटिंग, एक्टिंग, ड्रामा। अगर टीवी है तो बच्चे को टीवी ही याद आता है। इसके पीछे पूरी साइंस है। वास्तु में वेस्ट और साउथ वेस्ट के बीच की जगह एजुकेशन और सेविंग्स की होती है। इस दिशा में बना टॉयलेट सब पढ़ा हुआ भुला देता है। कोशिशों के बावजूद घर में पैसों की इच्छा अनुसार बचत नहीं हो पाती।
इस दोष निवारण का समाधान: वेस्ट-साउथ वेस्ट की जगह पर अपने बच्चे को पढ़ने को कहें। अगर जगह नहीं है बैठ कर पढ़ने की तो बच्चे की कुछ बुक्स वहां रख दें। 2-3 हफ़्तों में आप नोटिस करेंगे कि आपके बच्चे का मन पढ़ने में लगने लगा है। बशर्ते उस दिशा में से टीवी और मोबाइल हटा दिए जाएं।
*दूसरा सबसे बड़ा कंसर्न होता है, माता-पिता का बच्चों के साथ उलझता संबंध। अगर साउथ वेस्ट डायरेक्शन में आप अपने बच्चों, अपने पूरे परिवार की एक-साथ स्माइलिंग फोटोग्राफ फ्रेम करवा कर लगाएंगे तो परिवार में एक-दूसरे के प्रति संवेदना बढ़ेगी, आपसी समझ बढ़ेगी। इसके साथ साउथ-वेस्ट में पीला रंग या पीले रंग की घड़ी/पेंटिंग लगाएंगे तो तीन हफ्तों में ही आप चमत्कारी रूप से आराम महसूस करेंगे। आप देखेंगे कि आपके बच्चों से रिश्ते पहले से मधुर होने लगे हैं। रिश्तों में आंखों की शर्म है, लिहाज़ है, एक-दूसरे के लिए ख्याल और प्यार है।
*तीसरा मुद्दा होता है बच्चों की सही लोगों से दोस्ती। इसका संबंध पूर्व दिशा से है, यानी सूर्य की दिशा। इस दिशा में लाल रंग नहीं होना चाहिए। ईस्ट यानी पूर्व की दिशा में थोड़े ही पौधे रखें, हवादार रखें। अगर पौधे रखने की जगह न हो तो हरे रंग की पेंटिंग या कोई इंडोर प्लांट रख सकते हैं। यहां काला रंग नहीं होना चाहिए।
*क्लैरिटी ऑफ माइंड, यानी दिमाग सुलझा रहे, थका महसूस न करे। उसके लिए नार्थ-ईस्ट में कुछ हरे पौधे रख सकते हैं या श्रीकृष्ण की, बहते पानी की या कोई नीली/हरी पेंटिंग लगा सकते है। यहां कभी कोई एब्सट्रेक्ट पेंटिंग न लगाएं, ताकि फैसलोंं में सही गलत चुनने का फैसला सही साबित हो, आप जि़ंदगी की हर लड़ाई में जीतें, बच्चा हर कॉम्पटीशन में सफल हो, बच्चे का हर सही प्रयास सार्थक हो, बच्चे के लिए फायदेमंद साबित हो। बच्चे की सोच में क्लैरिटी होगी, तभी वह फोकस कर पाएगा।
डिप्रेशन से मुक्ति- वेस्ट और नार्थ वेस्ट के बीच जो जगह हो, उससे साफ रखें। वहां हरे पौधे न लगाएं। वे जगह जितनी साफ होंगी, उतना ही बच्चे की, घर के हर सदस्य की दिमागी सेहत सही रहेगी, स्वस्थ रहेगी।
*अगर बच्चा कॉम्पटीशन एग्जाम की तैयारी कर रहा है, तब उसे नॉर्थ यानी उत्तर दिशा में बैठा कर ईस्ट फेस करके पढ़ने को कहें। इससे बच्चे की इंटेलिजेंस बढ़ेगी, वह जल्द ही कॉम्प्लेक्स इश्यूज को समझेगा।
- बच्चे को दक्षिण दिशा में सर रख कर सोने को कहें। इससे बच्चे को नींद अच्छी आएगी। बेकार की बातें उसके दिमाग से निकलेंगी।
टेंशन कम होगी। इससे जो भी पढ़ाई करेगा, वह देर तक याद रख सकेगा। दिमाग बेहतर काम करेगा। दरअसल ये बात समझना ज़रूरी है कि वास्तु केवल सामानों की इधर-उधर अदला-बदली नहीं, बल्कि संपूर्ण रूप से विज्ञान पर आधारित है।
सावधानी
*क्या आप जानते हैं कि आपके घर का वास्तु भी आपकी और आपके बच्चों की सोच को एक रूप में ढालने में सहायक हो सकता है? जी हां, वास्तु एक बहुत बड़ा कारण होता है, बच्चों को ही नहीं बल्कि घर में रहने वाले हर व्यक्ति को सही राह दिखाने में या गुमराह करने में।
- घर की दीवारों के रंग, अलग-अलग दिशाओं में रखी वस्तुएं और दिशा, सपने साथ एक ऊर्जा लिये होती हैं, जो मदद करती हैं बच्चों को सही राह और जीवन में उन विषयों पर ध्यान केंद्रित रखने में,जो उनके लिए सबसे अधिक आवश्यक है।
