10 Lessons from Parents: कहा जाता है कि बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, उन्हें जिस तरीक़े से ढाला जाता है वो ढल जाते हैं। पेरेंट्स बच्चे के सबसे पहले और सबसे प्रभावशाली होते हैं इसीलिए वो सब कुछ तौर-तरीक़े पेरेंट्स से ही सीखते हैं। यहाँ तक कि कई बार बिना बोली और सिखायी हुई बातें भी वो सीख लेते हैं। इसलिए बच्चों की परवरिश करते समय छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना ज़रूरी होता है। जानते हैं वो कौन सी दस बातें हैं जो बच्चे पेरेंट्स से ज़रूर सीखते हैं-
बातचीत का तरीक़ा
बच्चे अपने पेरेंट्स को जिस तरह से बात करते हुए देखते हैं वो भी उसी तरीक़े को अपनाते हैं, चाहें तो धीरे-धीरे, आराम से बात करें या फिर तेज आवाज़ में हमेशा चिल्लाकर बोलें। उनकी बात करने की यह टोन हमेशा बनी रहती है।
विवाद सुलझाने का तरीक़ा

मतभेद और बहस तो हर पति-पत्नी के बीच होती है लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि आप कैसे इन मुद्दों को सुलझाते हैं। अगर बच्चा देखता है कि आप समझदारी और शांति से बात करके झगड़ा ख़त्म करते हैं तो वो भी यही सीखता है और अगर आप एक-दूसरे के ऊपर चिल्लाते हैं तो बच्चा भी वो ही सीखता है।
टाइम मैनेजमेंट
आप किस तरीक़े से अपने समय को मैनेज करते हैं, कैसे वर्क-लाइफ बैलेंस करते हैं, ये सब कुछ बच्चे को बहुत प्रभावित करती हैं। चीज़ों को सही तरह से ऑर्गनाइज़ करना बच्चा पेरेंट्स से ही सीखता है।
मनी मैनेजमेंट
बच्चे पेरेंट्स को देखकर ही मनी मैनेजमेंट सीखते हैं। अगर पेरेंट्स सही तरीक़े से पैसों को खर्च करते है, प्रॉपर सेविंग करते हैं और निवेश करते हैं तो बच्चे भी ये सब सीखते हैं। अगर पेरेंट्स सही तरीक़े से पैसों का उपयोग नहीं करते हैं तो बच्चे भी आगे जाकर पैसों को लेकर ग़ैर ज़िम्मेदार हो जाते हैं।
प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल
हर किसी को लाइफ में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। समस्याओं को सुलझाने की कला बच्चे पेरेंट्स को देखकर ही सीखते हैं। किस तरह से आप धैर्य और शांति से इन समस्याओं को सुलझाते हैं ये बच्चे के लिए ज़रूरी है।
ईटिंग हैबिट्स
पेरेंट्स ख़ुद जिस तरह का खाना खाते हैं और जैसे खाते हैं, बच्चा भी उन्हें देखकर वैसा ही सीखता है। अगर आप ख़ुद सही समय और तरीक़े से हेल्दी फ़ूड खाते हैं तो बच्चा भी आगे के लिए यही सीखता है और अगर आप ख़ुद ही कभी-भी, कैसे भी और कुछ भी खा लेते हैं तो बच्चे में भी ऐसी ही आदत विकसित हो जाती है।
सोशल स्किल्स
पेरेंट्स दूसरों के साथ जिस तरीक़े से व्यवहार करते हैं बच्चे भी वही सीखते हैं। अगर पेरेंट्स लोगों के प्रति अच्छी सोच और विचार रखेंगे तो बच्चे भी आगे जाकर सबके लिए अच्छा सोचेंगे।
मैनर्स
बच्चे घर से ही मैनर्स सीखते हैं। अगर पेरेंट्स हमेशा प्लीज़, सॉरी, थैंक यू जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं तो बच्चे से अच्छे मैनर्स सीखते हैं।
धार्मिक और आध्यात्मिक विश्वास
बच्चों की धार्मिक, आध्यात्मिक सोच सब पेरेंट्स को देखकर ही विकसित होती है।
आत्म-सम्मान
पेरेंट्स किस तरीक़े से अपने आत्म-सम्मान को हैंडल करते हैं, कैसे अपने मूल्यों के साथ समझौता नहीं करते हैं, ये सब बच्चे सीखते हैं।
