Chandni Chowk
Chandni Chowk

चांदनी चौक की ख़ास बात

सैलानी इस जगह के बाज़ार खानपान और पर्यटन स्थलों को एक्सप्लोर करना पसंद करते हैं। इस जगह के प्रति सिनमा से जुड़े लोगों का भी बहुत ही ज़्यादा आकर्षण रहा है।

Chandni Chowk Speciality: दिल्ली की बात हो और चांदनी चौक का जिक्र नहीं हो तो कुछ अधूरा सा लगता है। दिल्ली की बहुत सारी ऐसी बातें हैं जो चाँदनी चौक के बिना पूरी ही नहीं होती हैं। इसलिए, इस जगह का अपना एक बहुत ही विशेष महत्व है और देश दुनिया के कोने कोने से लोग यहाँ आते हैं। सैलानी इस जगह के बाज़ार खानपान और पर्यटन स्थलों को एक्सप्लोर करना पसंद करते हैं। इस जगह के प्रति सिनेमा से जुड़े लोगों का भी बहुत ही ज़्यादा आकर्षण रहा है। कई ऐसी फ़िल्में हैं जो कभी चांदनी चौक के बिना पूरी ही नहीं हो सकती हैं। एक फ़िल्म का नाम भी चांदनी चौक के नाम पर ही रखा गया है। जिसकी वजह से इस जगह के प्रति पर्यटकों का आकर्षण बना हुआ है। 

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Special feature of Chandni Chowk

चांदनी चौक की सबसे ख़ास बात इस जगह का माहौल है। यह एक ऐसे वतवारन का निर्माण करत है जहां पर आपको सबकुछ अलग सा प्रतीत होने लगता है। इस जगह की हर बात निराली है, यहां किस्म किस्म की चीजें मिलती है। इस जगह पर बहुत सारे बाज़ार हैं जहां पर कपड़े, गहने और जरूरत का हर सामान किफायती दम पर आपको मिल जाता है। इस जगह पर खरीदारी के साथ साथ लोग तरह तरह के खानपान का स्वाद लेने के लिए आते हैं। इस जगह पर लज्जतदार डिशेज खाने को मिलती हैं। चांदनी चौक पर्यटन स्थल के साथ साथ एक बहुत ही पुराना बाजार है जिसका इतिहास 370 साल से भी कहीं ज़्यादा पुराना है। चांदनी चौक की पतली पतली गलियों को कटरा कहा जाता है और हर वक्त यहां खरीदारों की भीड़ जमा रहती है।  

Market set up for daughter

चांदनी चौक का महत्व एतिहासिक है। इस जगह को कभी शाहजहानाबाद के नाम से जाना जाता था। बताया जाता है कि मुगल सम्राट शाहजहां की बेटी को खरीदारी का बहुत शौक था। अपनी बेटी के इसी शौक को पूरा करने के लिए शाहजहां ने लाल किले के आगे पूरा एक बाजार बसा दिया था। इस जगह पर उनकी बेटी खरीदारी करती और शाहजहां बेटी के इस शौक पर काफी खुश रहता था। 1650 में शाहजहां ने इस बाजार को इस तरह बनवाया था कि इसकी रौनक़ बनी रहे। एक वक्त यहां यमुना नदी का पानी भी आता था। धीरे धीरे यह बाजार लोगों के बीच बहुत ज़्यादा प्रसिद्ध हो गया और दिल्ली के खास बाजारों में गिना जाने लगा। 

Example of religious harmony

चांदनी चौक को भले ही मुग़ल शासक शाहजहां ने बसाया था। लेकिन यहां हर धर्म और वर्ग के लिए कुछ ना कुछ ख़ास है। इस जगह पर सभी धर्म और समुदाय के लोग आकर खरीदारी करते हैं। इसी इलाक़े में प्रसिद्ध गौरी शंकर मंदिर भी है और फतेहपुरी मस्जिद भी है। इतना ही नहीं सिखों का मशहूर गुरुद्वारा शीशगंज भी चांदनी चौक में ही स्थित है जहां पर पूरे दिन लंगर चलता रहता है। इस जगह पर सेंट्रल बैपटिस्ट चर्च की मौजूदगी जिसे और भी विविधतापूर्ण बनाती है। यह पूरा बाज़ार चांदी औऱ सोने के सामान और जवाहरातों के लिए मशहूर है। इस जगह पर शादी की शॉपिंग बहुत ही सस्ते में होती है। 

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...