Geeta Gyan
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Overview: गीता में बताया गया है जीवन के दो सच्चे साथी

गीता में बताया गया है कि, संसार में आत्मा और परमात्मा ही दो सच्चे साथी हैं, बाकी सब छूट जाते हैं।

Geeta Gyan: भगवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं का वर्णन मिलता है, जोकि उन्होंने कुरुक्षत्रे की भूमि में अर्जुन को दिया था। भगवद् गीता ऐसा धार्मिक ग्रंथ और दिव्य उपदेश है जिसके ज्ञान से जीवन के हर पहलू को समझने में मदद मिलती है। महाभारत युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो ज्ञान दिया उसे ही गीता ज्ञान या गीता उपदेश कहा जाता है। इसमें 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। युगों-युगों से लेकर गीता के उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

गीता धार्मिक ग्रंथ होकर भी आध्यात्म के साथ ही धर्म, कर्म, नीति-नियम, प्रेम और करुणा का पाठ पढ़ाती है। इसमें संपूर्ण जीवन का दर्शन समाहित है, जिसका अनुसरण करने वाला व्यक्ति भय, तनाव, चिंता, क्रोध आदि से मुक्त होकर सुखद और सफल जीवन जीता है। इसलिए हर व्यक्ति को गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए और इसमें बताई बातों को जीवन में अपमाना चाहिए। गीता का ज्ञान आत्म मंथन कर स्वयं को पहचाने का हुनर सिखाता है।

हमारे पास कई चीजें होती हैं और कई रिश्ते-नाते भी होते हैं, जिन पर हमें अभिमान होता है। लेकिन गीता में बताया गया है कि आपके जितने साथी क्यों न हो लेकिन जीवन का सच्चा साथी केवल दो होते हैं। आइए जानते हैं गीता के अनुसार कौन हैं ये दो सच्चे साथी।

जीवन के सच्चे साथी बस दो

Geeta Gyan in Hindi
Geeta Gyan in Hindi

मनुष्य अपने जीवनकाल में जन्म और मृत्यु चक्र को पूरा करता है और ये दोनों ही मानव जीवन का सत्य है,जिससे हर व्यक्ति को गुजरना पड़ता है। जिस तरह जन्म सत्य है उसी तरह मृत्यु भी अटल सत्य है। जन्म के बाद मनुष्य अपने जीवनकाल में कई चीजें हासिल करता है और कई रिश्ते-नातों से भी जुड़ जाता है। लेकिन मृत्यु के बाद ये सभी यहीं छूट जाते हैं। इसलिए इन सबका साथ केवल जीवनभर ही रहता है। लेकिन कुछ ऐसी चीजें भी होती हैं, जो जन्म से लेकर मृत्यु के बाद भी आपके साथ रहती है, इसलिए भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण इन दोनों को जीवन का सच्चा साथी कहते हैं।

गीता के अनुसार जीवन के सच्चे साथी

god and soul two true companion in life
god and soul two true companion in life

गीता दर्शन का सार है कि इस संसार में असली साथी केवल वही है जो कभी साथ न छोड़े। गीता के अनुसार परमात्मा और आत्मा ही जीवन के दो सच्चे साथी हैं।

“ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति।” (अध्याय 18, श्लोक 61)
इस श्लोक का अर्थ है कि, ईश्वर हर जीव के हृदय में निवास करता है। भगवान हमारे साथ तब भी रहते हैं जब सब हमारा साथ छोड़ दें, यहां तक की शरीर भी।

“न हन्यते हन्यमाने शरीरे।”(अध्याय 2, श्लोक 20)
इस श्लोक का अर्थ है कि- आत्मा का नाश नहीं होता, वह जन्म-मरण से परे है। इसलिए आत्मा अमर है और आत्मा सच्चा साथी है, जिसका साथ जन्म-जन्मांतर तक रहता है।

आत्मा और परमात्मा के अलावा रिश्ते, संबंध, पैसा, पद और प्रतिष्ठा आदि ये सभी चीजें जीवन के एक पड़ाव तक ही हमारा साथ देते हैं। लेकिन अच्छे-बुरे समय में केवल दो साथी यानी आत्मा और परमात्मा ही हमारे साथ होते हैं। बाकी शेष हमें जन्म के बाद यहीं मिले हैं और यहीं बिछड़ जाएंगे। इसलिए आत्मा और परमात्मा की दो सच्चे साथी हैं।

मेरा नाम पलक सिंह है। मैं एक महिला पत्रकार हूं। मैं पिछले पांच सालों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैं लाइव इंडिया और सिर्फ न्यूज जैसे संस्थानों में लेखन का काम कर चुकी हूं और वर्तमान में गृहलक्ष्मी से जुड़ी हुई हूं। मुझे...